त्रिमाही परीक्षा रद्द कर बच्चों को कार्यक्रम में भेजने का आरोप, पेरेंट्स एसोसिएशन ने प्रभारी DEO के निलंबन की मांग उठाई

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नेताओं के कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए विद्यार्थियों की परीक्षा प्रभावित करने का आरोप, कलेक्टर से शिकायत; शिक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

राजनांदगांव। विद्यार्थियों की पढ़ाई और परीक्षा को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। राजनांदगांव के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी/हिंदी माध्यम विद्यालय (बक्शी स्कूल) में पूर्व निर्धारित त्रैमासिक परीक्षा को कथित तौर पर अचानक रद्द कर विद्यार्थियों को एक कार्यक्रम में भेजे जाने को लेकर छत्तीसगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध जताया है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि विद्यार्थियों की परीक्षा प्रभावित कर उन्हें राजनीतिक कार्यक्रम में भीड़ के रूप में इस्तेमाल किया गया।

मामला मंगलवार को राजनांदगांव ऑडिटोरियम में आयोजित ‘सेवा संकल्प कार्यक्रम’ से जुड़ा बताया जा रहा है। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री सहित अन्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी रही। इसी दौरान बक्शी स्कूल के विद्यार्थियों की पहले से निर्धारित त्रैमासिक परीक्षा को अचानक रद्द कर बच्चों को कार्यक्रम स्थल भेजे जाने का आरोप लगाया गया है।

परीक्षा रद्द कराने के पीछे किसका आदेश?

छत्तीसगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन का आरोप है कि विद्यार्थियों की परीक्षा रद्द कराने के पीछे शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भूमिका रही। एसोसिएशन ने विशेष रूप से प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कार्यक्रम में अधिक से अधिक भीड़ जुटाने के उद्देश्य से विद्यार्थियों को वहां भेजा गया।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। परीक्षा रद्द करने का वास्तविक आदेश किस स्तर से जारी हुआ, विद्यार्थियों को कार्यक्रम में भेजने के संबंध में लिखित निर्देश क्या थे और इसके पीछे आधिकारिक कारण क्या बताया गया—इन सवालों के जवाब सामने आना अभी बाकी है।

‘बच्चों की परीक्षा से बड़ा कोई कार्यक्रम नहीं’

छत्तीसगढ़ पेरेंट्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने मामले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि विद्यार्थियों की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को किसी भी प्रशासनिक अथवा सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

एसोसिएशन का कहना है कि यदि परीक्षा वास्तव में किसी कार्यक्रम में भीड़ जुटाने के लिए रद्द कराई गई है, तो यह बेहद गंभीर प्रशासनिक मामला है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

कलेक्टर से लिखित शिकायत, निलंबन की मांग

मामले को लेकर प्रदेश अध्यक्ष क्रिष्टोफर पॉल ने राजनांदगांव कलेक्टर को लिखित शिकायत सौंपते हुए पूरे घटनाक्रम की जांच की मांग की है। एसोसिएशन ने प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल को इस मामले का मुख्य जिम्मेदार बताते हुए तत्काल निलंबित करने की मांग की है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या वास्तव में निर्धारित त्रैमासिक परीक्षा को किसी जनप्रतिनिधि के कार्यक्रम में विद्यार्थियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए रद्द कराया गया था? अगर ऐसा हुआ है तो परीक्षा स्थगित करने का आदेश किसने दिया? विद्यार्थियों को कार्यक्रम में भेजने के निर्देश किस अधिकारी ने दिए? और क्या इसके लिए शिक्षा विभाग की ओर से कोई लिखित अनुमति या आदेश जारी किया गया था?

शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

विद्यार्थियों की परीक्षा उनके शैक्षणिक मूल्यांकन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ऐसे में परीक्षा कार्यक्रम में अचानक बदलाव को लेकर अभिभावकों के बीच भी सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। यदि परीक्षा किसी अपरिहार्य प्रशासनिक कारण से स्थगित की गई थी, तो विभाग को उसका स्पष्ट कारण और नई परीक्षा तिथि सार्वजनिक करनी चाहिए।

वहीं यदि पेरेंट्स एसोसिएशन के आरोप सही पाए जाते हैं कि परीक्षा को केवल किसी कार्यक्रम में विद्यार्थियों की भीड़ बढ़ाने के लिए प्रभावित किया गया, तो यह शिक्षा व्यवस्था में प्रशासनिक प्राथमिकताओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े करेगा।

फिलहाल मामला शिकायत के स्तर पर है और आरोपों की आधिकारिक जांच तथा संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि परीक्षा रद्द करने का वास्तविक कारण क्या था और विद्यार्थियों को कार्यक्रम में भेजने के पीछे किस स्तर से निर्णय लिया गया।

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