
कांग्रेस के हल्लाबोल के बीच विधायक हर्षिता की प्रशासनिक बैठक में मौजूदगी, संगठन में उठे सवाल—आखिर प्राथमिकता क्या?”
एक तरफ कलेक्ट्रेट में कांग्रेस का हल्लाबोल, दूसरी तरफ नवरात्रि मेला बैठक में विधायक की मौजूदगी; कार्यकर्ताओं के बीच उठे सवाल—संगठन बड़ा या प्रशासनिक जिम्मेदारी?
राजनांदगांव -जिले की राजनीति में सोमवार को एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने कांग्रेस संगठन और उसके निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है। एक ओर कांग्रेस जिला संगठन द्वारा मतदाता अधिकारों और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र की कांग्रेस विधायक हर्षिता स्वामी बघेल डोंगरगढ़ में आगामी क्वांर नवरात्रि मेले की व्यवस्थाओं से जुड़ी प्रशासनिक बैठक में नजर आईं।
उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार डोंगरगढ़ के मां बम्लेश्वरी मंदिर में 11 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले क्वांर नवरात्रि मेले को लेकर यात्रियों की सुविधा, कानून-व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं पर चर्चा के लिए 28 सितंबर को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में बैठक निर्धारित थी।
इसी बीच राजनांदगांव जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा मतदाता अधिकारों और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया। कांग्रेस की ओर से इस कार्यक्रम के लिए कार्यकर्ताओं से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की गई थी।
यही वजह है कि एक ही दिन सामने आई दोनों गतिविधियों को लेकर अब कांग्रेस के अंदर और राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं।
एक तरफ संगठन का आंदोलन, दूसरी तरफ प्रशासनिक बैठक
कांग्रेस संगठन द्वारा जब किसी मुद्दे को लेकर आंदोलन का आह्वान किया जाता है, तो पार्टी के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका स्वाभाविक रूप से चर्चा में आती है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब जिला कांग्रेस संगठन प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहा था, उस समय पार्टी की निर्वाचित विधायक की प्रशासनिक बैठक में मौजूदगी को संगठन किस नजरिए से देखता है?
क्या विधायक के लिए क्षेत्र से जुड़ी प्रशासनिक बैठक में शामिल होना प्राथमिकता थी?
या फिर संगठन के आंदोलन में जनप्रतिनिधि की मौजूदगी अपेक्षित थी?
इन सवालों का जवाब फिलहाल संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
क्या संगठन करेगा जवाब-तलब?
अब सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या कांग्रेस संगठन इस पूरे घटनाक्रम को महज एक प्रशासनिक दायित्व मानेगा या फिर विधायक की भूमिका को लेकर संगठनात्मक स्तर पर चर्चा होगी।
हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि विधायक एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं और क्षेत्र की कानून-व्यवस्था, धार्मिक आयोजन तथा आम लोगों से जुड़ी प्रशासनिक व्यवस्थाओं में उनकी भागीदारी का अपना सार्वजनिक दायित्व हो सकता है।
दूसरी तरफ पार्टी संगठन द्वारा निर्धारित राजनीतिक कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
यही दोहरी भूमिका अब इस पूरे घटनाक्रम को चर्चा का विषय बना रही है।
कार्यकर्ताओं के बीच भी उठ सकता है सवाल
राजनीतिक गतिविधियों में कार्यकर्ताओं की भूमिका बेहद अहम होती है। ऐसे में यदि एक ओर कार्यकर्ता किसी मुद्दे को लेकर सड़क पर आंदोलन कर रहे हों और उसी दौरान पार्टी का कोई निर्वाचित जनप्रतिनिधि प्रशासनिक बैठक में दिखाई दे, तो कार्यकर्ताओं के बीच सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि इस पूरे मामले में विधायक हर्षिता बघेल की ओर से बैठक में शामिल होने के कारण और उनकी प्राथमिकताओं को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आए, तभी उनकी भूमिका का पूर्ण आकलन किया जा सकेगा।
इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक और संगठनात्मक चर्चा के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई का निष्कर्ष माना जाना चाहिए।
विधायक हर्षिता बघेल कौन हैं?
हर्षिता स्वामी बघेल डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस की निर्वाचित विधायक हैं। विधानसभा संबंधी उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार वे दिसंबर 2023 से डोंगरगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रही हैं और वर्तमान में पद पर हैं।
ऐसे में क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक आयोजन से जुड़ी प्रशासनिक तैयारियों में उनकी भागीदारी को उनके जनप्रतिनिधि के दायित्व से जोड़कर भी देखा जा सकता है।
लेकिन कांग्रेस संगठन के आंदोलन और प्रशासनिक बैठक की टाइमिंग ने राजनीतिक चर्चा को जरूर जन्म दे दिया है।
अब कांग्रेस संगठन के रुख पर टिकी नजर
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस संगठन इस मामले को किस रूप में लेता है।
क्या संगठन इसे विधायक की सामान्य प्रशासनिक जिम्मेदारी मानेगा?
क्या विधायक से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा जाएगा?
या फिर पार्टी नेतृत्व इसे कोई मुद्दा नहीं मानते हुए सामान्य घटनाक्रम के तौर पर लेगा?
फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं।
राजनीतिक तौर पर इतना जरूर है कि एक ही दिन कांग्रेस का प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन और उसी दौरान कांग्रेस विधायक की प्रशासनिक बैठक में मौजूदगी ने संगठनात्मक प्राथमिकताओं और निर्वाचित जनप्रतिनिधि की भूमिका को लेकर बहस छेड़ दी है।
अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में कांग्रेस जिला संगठन या विधायक हर्षिता बघेल इस पूरे मामले पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।
बड़ा सवाल
कांग्रेस संगठन का आंदोलन अपनी जगह और विधायक की प्रशासनिक जिम्मेदारी अपनी जगह—लेकिन दोनों कार्यक्रम एक ही समय पर हों, तो प्राथमिकता किसे मिले?
यही सवाल फिलहाल राजनांदगांव के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
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📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
✨ पहचान — बेबाक, तेज़ और सच को जनता तक पहुँचाने वाली पत्रकारिता।


