176 FIR, 14 राज्यों में फैला साइबर ठगी का नेटवर्क! मोहला-मानपुर पुलिस ने पश्चिम बंगाल से दबोचा मास्टरमाइंड, 3 आरोपी गिरफ्तार

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1.71 लाख से ज्यादा लोगों को निशाना बनाने वाले नेटवर्क का खुलासा, एक वर्चुअल बैंक खाते की जांच में सामने आई देशभर की 176 FIR; कर्नाटक में 54 और बिहार में 46 मामले

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। छत्तीसगढ़ पुलिस ने अंतर्राज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का दावा किया है। मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले की खड़गांव पुलिस ने पश्चिम बंगाल से साइबर ठगी के कथित मुख्य सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से जुड़े एक वर्चुअल बैंक खाते की तकनीकी और बैंकिंग ट्रांजेक्शन जांच में देश के अलग-अलग राज्यों में दर्ज 176 आपराधिक प्रकरणों का लिंक सामने आया है।

पुलिस के अनुसार, इस नेटवर्क ने देशभर में 1.71 लाख से अधिक लोगों को निशाना बनाया। जांच में सामने आए मामलों का दायरा 14 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक फैला हुआ बताया गया है। इनमें अकेले कर्नाटक में 54, बिहार में 46 और तेलंगाना में 28 FIR दर्ज होने की जानकारी पुलिस ने दी है।

60 हजार रुपये के ट्रांजेक्शन ने खोला बड़े नेटवर्क का राज

पूरा मामला थाना खड़गांव में दर्ज अपराध क्रमांक 06/26 से सामने आया। पुलिस के मुताबिक, पीड़ित से ठगी गई 3,12,348 रुपये की रकम को अलग-अलग नौ बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया था।

जांच के दौरान पुलिस टीम ने बैंकिंग ट्रांजेक्शन और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण किया। इसी दौरान एक कथित वर्चुअल बैंक खाता नंबर 211071614 सामने आया। पुलिस के अनुसार, इस खाते में अकेले 60 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए थे।

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को इस खाते से जुड़े साइबर अपराधों का बड़ा नेटवर्क मिला। पुलिस का दावा है कि इसी वर्चुअल खाते के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाया गया।

14 राज्यों तक फैला नेटवर्क, 176 FIR का दावा

पुलिस द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, वर्चुअल बैंक खाते के विश्लेषण में 14 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज कुल 176 FIR सामने आई हैं।

राज्यवार आंकड़े इस प्रकार बताए गए हैं—

  • कर्नाटक – 54 FIR
  • बिहार – 46 FIR
  • तेलंगाना – 28 FIR
  • उत्तर प्रदेश – 10 FIR
  • केरल – 08 FIR
  • महाराष्ट्र – 07 FIR
  • हरियाणा – 06 FIR
  • तमिलनाडु – 06 FIR
  • दिल्ली – 04 FIR
  • पश्चिम बंगाल – 03 FIR
  • अंडमान निकोबार – 01 FIR
  • अरुणाचल प्रदेश – 01 FIR
  • मिजोरम – 01 FIR
  • राजस्थान – 01 FIR

पुलिस के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में दर्ज इन मामलों को आपस में जोड़ने में बैंकिंग ट्रांजेक्शन और तकनीकी विश्लेषण महत्वपूर्ण कड़ी साबित हुए।

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में भी 31 शिकायतें

पुलिस के मुताबिक, साइबर ठगी के इस नेटवर्क से संबंधित 31 शिकायतें मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के अलग-अलग थानों में भी दर्ज थीं।

थाना-वार शिकायतों का विवरण—

  • अंबागढ़ चौकी थाना – 15 शिकायतें
  • खड़गांव थाना – 09 शिकायतें
  • मोहला थाना – 03 शिकायतें
  • मानपुर थाना – 02 शिकायतें
  • गोटाटोला थाना – 01 शिकायत
  • मदनवाड़ा थाना – 01 शिकायत

इन शिकायतों और तकनीकी साक्ष्यों को जोड़ते हुए पुलिस टीम ने मामले की जांच को आगे बढ़ाया।

लोकेशन बदलकर पुलिस को चकमा देने का आरोप

पुलिस के अनुसार, आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे और देश के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय थे। विभिन्न राज्यों की पुलिस टीमें भी इस नेटवर्क से जुड़े आरोपियों की तलाश कर रही थीं।

इसी बीच मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला पुलिस की विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन के आधार पर आरोपियों की लोकेशन ट्रेस की। इसके बाद पुलिस टीम ने पश्चिम बंगाल में घेराबंदी कर 30 सितंबर 2026 को तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।

कौन हैं गिरफ्तार आरोपी?

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में—

1. आदित्य रजक
पिता – उपेंद्र रजक
निवासी – कोननगर नवोग्राम, थाना उत्तरपारा, जिला हुगली, पश्चिम बंगाल।
पुलिस ने आदित्य रजक को मामले का कथित मुख्य सरगना बताया है।

2. कृष्णा चौधरी
पिता – अरुण चौधरी
निवासी – टीटागढ़ महावीर मंदिर के पास, वार्ड नंबर 06, नार्थ 24 परगना, थाना टीटागढ़।

3. सुमन वर्मा
पिता – अजय वर्मा
निवासी – टीटागढ़ महावीर मंदिर के पास, वार्ड नंबर 06, नार्थ 24 परगना, थाना टीटागढ़।

पुलिस के मुताबिक, तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जा चुका है।

खड़गांव पुलिस और साइबर सेल की अहम भूमिका

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी पुलिस के मुताबिक, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वाय.पी. सिंह के दिशा-निर्देशन और अनुविभागीय अधिकारी पुलिस मानपुर विनोद कुमार मिंज के मार्गदर्शन में कार्रवाई की गई।

खड़गांव थाना प्रभारी निरीक्षक सुशील त्रिपाठी और प्रशिक्षु उप निरीक्षक अब्दुल रियाज के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मामले की जांच आगे बढ़ाई।

कार्रवाई में प्रशिक्षु उपनिरीक्षक अब्दुल रियाज, सहायक उपनिरीक्षक धन सिंह महिलांगे, आरक्षक आशीष जोगी, आरक्षक नर्मदा प्रसाद पैकरा, महिला सहायक आरक्षक सरिता जाड़े और जिला साइबर सेल की विशेष भूमिका बताई गई है।

पुलिस की अपील—साइबर ठगी होते ही तुरंत करें शिकायत

पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते, ओटीपी, पासवर्ड या अन्य बैंकिंग जानकारी साझा न करें। संदिग्ध वर्चुअल बैंकिंग या किसी अनजान खाते के झांसे में आने से बचें।

यदि कोई व्यक्ति साइबर फ्रॉड का शिकार होता है तो घटना की जानकारी तत्काल नजदीकी पुलिस थाने अथवा राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन पर देने की अपील की गई है।

बड़ा सवाल: एक खाते से इतने मामलों तक कैसे पहुंचा नेटवर्क?

इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक कथित वर्चुअल बैंक खाते के जरिए इतने बड़े पैमाने पर साइबर अपराध का नेटवर्क कैसे संचालित हो रहा था और इसके पीछे कितने अन्य लोग जुड़े हुए हैं? पुलिस की आगे की जांच में नेटवर्क की पूरी कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।

नोट: 1.71 लाख से अधिक लोगों को निशाना बनाने और 176 FIR से जुड़े आंकड़े पुलिस द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताए गए हैं। इन दावों की अंतिम पुष्टि संबंधित राज्यों में दर्ज मामलों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।

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