आरटीआई जानकारी मांगने पर पत्रकार को धमकी देने का आरोप, सरपंच पति का ऑडियो-वीडियो वायरल

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ग्राम पंचायत पटेवा का मामला चर्चा में, सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री की नहीं हुई आधिकारिक पुष्टि

राजनांदगांव। जिले की ग्राम पंचायत पटेवा में सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगने को लेकर विवाद का मामला सामने आया है। एक क्षेत्रीय पत्रकार द्वारा पंचायत के कार्यों और खर्चों से संबंधित जानकारी मांगे जाने के बाद सरपंच पति पर धमकी देने के आरोप लगे हैं। इस मामले से जुड़े कथित ऑडियो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बन गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पटेवा में एक पत्रकार ने पंचायत के विकास कार्यों और वित्तीय गतिविधियों से संबंधित जानकारी सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी थी। आरोप है कि निर्धारित प्रक्रिया के तहत जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय मामले को आपसी समझौते और लेनदेन के माध्यम से निपटाने की कोशिश की गई।

कथित ऑडियो में समझौते की चर्चा का दावा

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित ऑडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि उसमें पंचायत सचिव और पत्रकार के बीच बातचीत सुनाई दे रही है। वायरल सामग्री में कथित तौर पर यह चर्चा की जा रही है कि पत्रकार सरपंच से बातचीत कर मामला समाप्त कर दे। हालांकि, इस ऑडियो की सत्यता और उसमें शामिल व्यक्तियों की पहचान की अब तक किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।

वायरल वीडियो में धमकी देने के आरोप

वहीं, सोशल मीडिया पर प्रसारित एक अन्य कथित वीडियो में ग्राम पंचायत की सरपंच लक्ष्मी वर्मा के पति रवि वर्मा पर पत्रकार को धमकाने और गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देने के आरोप लगाए जा रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय स्तर पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं।

हालांकि, समाचार लिखे जाने तक संबंधित पक्षों की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सार्वजनिक नहीं किया गया था। प्रशासन या पुलिस द्वारा भी वायरल वीडियो और ऑडियो की पुष्टि संबंधी कोई जानकारी जारी नहीं की गई है।

फिर उठे ‘सरपंच पति’ की भूमिका पर सवाल

यह मामला सामने आने के बाद पंचायतों में तथाकथित “सरपंच पति” की भूमिका को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर ऐसे आरोप सामने आते रहे हैं कि महिला आरक्षित सीटों पर निर्वाचित प्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति या अन्य परिजन पंचायत के प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में सक्रिय हस्तक्षेप करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायती राज व्यवस्था में निर्वाचित प्रतिनिधियों को स्वयं निर्णय लेने और प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए सशक्त बनाया गया है। ऐसे में यदि कोई अनधिकृत व्यक्ति पंचायत संचालन में हस्तक्षेप करता है तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत माना जाता है।

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आरटीआई का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 का मुख्य उद्देश्य शासन और प्रशासन में पारदर्शिता लाना तथा नागरिकों को सार्वजनिक संस्थाओं के कार्यों और खर्चों की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देना है। कानून के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराना संबंधित विभागों और संस्थाओं की जिम्मेदारी होती है।

ऐसे में आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगने वाले व्यक्ति को कथित रूप से धमकाए जाने के आरोपों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल आरटीआई की भावना के विरुद्ध होगा, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों से जुड़ा विषय भी बन सकता है।

प्रशासनिक जांच की मांग

स्थानीय स्तर पर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है। ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि वायरल ऑडियो और वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। साथ ही, यदि किसी पक्ष द्वारा कानून का उल्लंघन किया गया है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल सामग्री और लगाए गए आरोपों के आधार पर चर्चा में है। वायरल ऑडियो और वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की संभावित जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

(नोट: यह समाचार उपलब्ध आरोपों और वायरल सामग्री के आधार पर तैयार किया गया है। वायरल ऑडियो-वीडियो की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि समाचार लिखे जाने तक नहीं हुई है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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