
बंद गोदाम में कथित अवैध निर्माण-भंडारण का खुलासा, तीन जिलों तक सप्लाई के संकेत; शिकायतों पर कार्रवाई में देरी को लेकर शिवशंकर सिंह ने उठाए गंभीर सवाल
दुर्ग – गंजपारा नदी रोड स्थित एक बंद गोदाम में कथित रूप से बिना वैध लाइसेंस कृषि आदान सामग्री के निर्माण, भंडारण और बिक्री के मामले ने कृषि विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संयुक्त कार्रवाई में 2,259 लीटर तरल और 4,712 किलोग्राम ठोस/पाउडर कृषि सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में डोंगरगढ़ में पदस्थ वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी होतम सिंह रावत के निलंबन की कार्रवाई भी सामने आई है।
कार्रवाई के बाद कृषि आदान क्षेत्र में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से शिकायतें कर रहे शिवशंकर सिंह ने पूरे मामले की व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि काला हीरा, फार्मर बायो क्रॉप साइंस और AVK क्रॉप साइंस सहित अन्य संस्थाओं को लेकर पिछले करीब दो वर्षों से शिकायतें और जांच की मांग की जाती रही है। ऐसे में अब बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त होने के बाद सवाल उठ रहा है कि पहले की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
गोदाम से क्या-क्या मिला?
बताई गई कार्रवाई में गोदाम से बड़ी मात्रा में कृषि आदान सामग्री बरामद की गई है। इनमें—
1,499 लीटर कीटनाशक
362 किलो ठोस कीटनाशक
760 लीटर जैव उत्प्रेरक
2,975 किलो ठोस जैव उत्प्रेरक
1,375 किलो सूक्ष्म पोषक तत्व
821.50 लीटर स्प्रेडर
के अलावा पैकिंग मशीन, खाली रैपर, कार्टून, कच्चा माल और बिक्री बिल बुक भी जब्त किए जाने की जानकारी है।
जब्त सामग्री के नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। इनकी वास्तविक गुणवत्ता और वैधता की पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
तीन जिलों तक पहुंची सप्लाई की कड़ी?
जांच के दौरान मिली बिल बुक से दुर्ग, राजनांदगांव और खैरागढ़ क्षेत्र के स्थानीय विक्रेताओं तक सामग्री पहुंचने के संकेत मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में जांच का दायरा केवल एक गोदाम तक सीमित रहने के बजाय कथित सप्लाई नेटवर्क और संबंधित विक्रेताओं तक बढ़ने की मांग उठ रही है।
सवाल यह भी है कि यदि सामग्री बड़े पैमाने पर तैयार और सप्लाई की जा रही थी, तो इसके लिए आवश्यक लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर, बिलिंग और परिवहन दस्तावेजों की जांच पहले क्यों नहीं हुई?
कर्मचारी के बयान में अधिकारी का नाम आने का दावा
विभागीय कार्रवाई के दौरान कर्मचारी रमेश ठाकुर से पूछताछ में कथित तौर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी होतम सिंह रावत का नाम सामने आने की बात कही गई है। दावा है कि उनके निर्देश पर सामग्री दूसरे जिलों में भेजी जाती थी।
हालांकि, यह आरोप जांच का विषय है और इसकी अंतिम पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर होना बाकी है।
शिवशंकर सिंह का सवाल—दो साल तक शिकायतें कहां थीं?
शिवशंकर सिंह का कहना है कि कृषि आदान से जुड़े मामलों, कथित अवैध वसूली और अधिकारियों तथा निजी कृषि आदान कारोबारियों के बीच संभावित सांठगांठ को लेकर उनके द्वारा लंबे समय से शिकायतें की जाती रही हैं।
उनके अनुसार राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्य सचिव और संबंधित विभागीय अधिकारियों तक शिकायतें भेजकर जांच की मांग की गई थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की कथित संपत्ति और आर्थिक गतिविधियों की जांच के लिए ईडी और सीबीआई स्तर पर जांच की मांग किए जाने की भी बात कही है।
अब दुर्ग में हुई कार्रवाई के बाद उनका सवाल है कि यदि शिकायतें पहले से मौजूद थीं तो विभागीय स्तर पर उनकी जांच की स्थिति क्या थी?
सिर्फ गोदाम नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच की मांग
शिवशंकर सिंह ने मांग की है कि जांच में केवल जब्त सामग्री तक सीमित न रहकर काला हीरा, फार्मर बायो क्रॉप साइंस, AVK क्रॉप साइंस और अन्य संबंधित संस्थाओं के लाइसेंस, उत्पादन, स्टॉक, बिक्री बिल और सप्लाई चैन की भी जांच की जाए।
साथ ही पिछले वर्षों में विभागीय अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण, लाइसेंस जारी करने, नमूना परीक्षण, जब्ती और शिकायतों पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी सामने लाने की मांग की गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल—शिकायत पहले, कार्रवाई बाद में क्यों?
दुर्ग की कार्रवाई के बाद कई सवाल जांच के केंद्र में हैं—
क्या पहले मिली शिकायतों की समयबद्ध जांच हुई थी?
क्या कृषि आदान कारोबारियों के लाइसेंस और स्टॉक का नियमित सत्यापन हुआ?
तीन जिलों में कथित सप्लाई से जुड़े विक्रेताओं की भी जांच होगी?
और क्या विभागीय अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच होगी?
फिलहाल जब्ती, निलंबन और विभागीय जांच की कार्रवाई जारी है। संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी की जांच दस्तावेजी साक्ष्यों और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर होना बाकी है।
दो साल की शिकायतों के बाद खुला ‘कृषि आदान’ का बड़ा खेल! 2259 लीटर और 4712 किलो सामग्री जब्त, अब पूरे सिंडिकेट की जांच की मांग
बंद गोदाम में कथित अवैध निर्माण-भंडारण का खुलासा, तीन जिलों तक सप्लाई के संकेत; शिकायतों पर कार्रवाई में देरी को लेकर शिवशंकर सिंह ने उठाए गंभीर सवाल
दुर्ग – गंजपारा नदी रोड स्थित एक बंद गोदाम में कथित रूप से बिना वैध लाइसेंस कृषि आदान सामग्री के निर्माण, भंडारण और बिक्री के मामले ने कृषि विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संयुक्त कार्रवाई में 2,259 लीटर तरल और 4,712 किलोग्राम ठोस/पाउडर कृषि सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले में डोंगरगढ़ में पदस्थ वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी होतम सिंह रावत के निलंबन की कार्रवाई भी सामने आई है।
कार्रवाई के बाद कृषि आदान क्षेत्र में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से शिकायतें कर रहे शिवशंकर सिंह ने पूरे मामले की व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि काला हीरा, फार्मर बायो क्रॉप साइंस और AVK क्रॉप साइंस सहित अन्य संस्थाओं को लेकर पिछले करीब दो वर्षों से शिकायतें और जांच की मांग की जाती रही है। ऐसे में अब बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त होने के बाद सवाल उठ रहा है कि पहले की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
गोदाम से क्या-क्या मिला?
बताई गई कार्रवाई में गोदाम से बड़ी मात्रा में कृषि आदान सामग्री बरामद की गई है। इनमें—
1,499 लीटर कीटनाशक
362 किलो ठोस कीटनाशक
760 लीटर जैव उत्प्रेरक
2,975 किलो ठोस जैव उत्प्रेरक
1,375 किलो सूक्ष्म पोषक तत्व
821.50 लीटर स्प्रेडर
के अलावा पैकिंग मशीन, खाली रैपर, कार्टून, कच्चा माल और बिक्री बिल बुक भी जब्त किए जाने की जानकारी है।
जब्त सामग्री के नमूने गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। इनकी वास्तविक गुणवत्ता और वैधता की पुष्टि जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।
तीन जिलों तक पहुंची सप्लाई की कड़ी?
जांच के दौरान मिली बिल बुक से दुर्ग, राजनांदगांव और खैरागढ़ क्षेत्र के स्थानीय विक्रेताओं तक सामग्री पहुंचने के संकेत मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में जांच का दायरा केवल एक गोदाम तक सीमित रहने के बजाय कथित सप्लाई नेटवर्क और संबंधित विक्रेताओं तक बढ़ने की मांग उठ रही है।
सवाल यह भी है कि यदि सामग्री बड़े पैमाने पर तैयार और सप्लाई की जा रही थी, तो इसके लिए आवश्यक लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर, बिलिंग और परिवहन दस्तावेजों की जांच पहले क्यों नहीं हुई?
कर्मचारी के बयान में अधिकारी का नाम आने का दावा
विभागीय कार्रवाई के दौरान कर्मचारी रमेश ठाकुर से पूछताछ में कथित तौर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी होतम सिंह रावत का नाम सामने आने की बात कही गई है। दावा है कि उनके निर्देश पर सामग्री दूसरे जिलों में भेजी जाती थी।
हालांकि, यह आरोप जांच का विषय है और इसकी अंतिम पुष्टि उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर होना बाकी है।
शिवशंकर सिंह का सवाल—दो साल तक शिकायतें कहां थीं?
शिवशंकर सिंह का कहना है कि कृषि आदान से जुड़े मामलों, कथित अवैध वसूली और अधिकारियों तथा निजी कृषि आदान कारोबारियों के बीच संभावित सांठगांठ को लेकर उनके द्वारा लंबे समय से शिकायतें की जाती रही हैं।
उनके अनुसार राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्य सचिव और संबंधित विभागीय अधिकारियों तक शिकायतें भेजकर जांच की मांग की गई थी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों की कथित संपत्ति और आर्थिक गतिविधियों की जांच के लिए ईडी और सीबीआई स्तर पर जांच की मांग किए जाने की भी बात कही है।
अब दुर्ग में हुई कार्रवाई के बाद उनका सवाल है कि यदि शिकायतें पहले से मौजूद थीं तो विभागीय स्तर पर उनकी जांच की स्थिति क्या थी?
सिर्फ गोदाम नहीं, पूरे नेटवर्क की जांच की मांग
शिवशंकर सिंह ने मांग की है कि जांच में केवल जब्त सामग्री तक सीमित न रहकर काला हीरा, फार्मर बायो क्रॉप साइंस, AVK क्रॉप साइंस और अन्य संबंधित संस्थाओं के लाइसेंस, उत्पादन, स्टॉक, बिक्री बिल और सप्लाई चैन की भी जांच की जाए।
साथ ही पिछले वर्षों में विभागीय अधिकारियों द्वारा किए गए निरीक्षण, लाइसेंस जारी करने, नमूना परीक्षण, जब्ती और शिकायतों पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी सामने लाने की मांग की गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल—शिकायत पहले, कार्रवाई बाद में क्यों?
दुर्ग की कार्रवाई के बाद कई सवाल जांच के केंद्र में हैं—
क्या पहले मिली शिकायतों की समयबद्ध जांच हुई थी?
क्या कृषि आदान कारोबारियों के लाइसेंस और स्टॉक का नियमित सत्यापन हुआ?
तीन जिलों में कथित सप्लाई से जुड़े विक्रेताओं की भी जांच होगी?
और क्या विभागीय अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच होगी?
फिलहाल जब्ती, निलंबन और विभागीय जांच की कार्रवाई जारी है। संबंधित कंपनियों और व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि सक्षम जांच एजेंसी की जांच दस्तावेजी साक्ष्यों और प्रयोगशाला रिपोर्ट के आधार पर होना बाकी है।

🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
📍 पता: राजीव नगर, वार्ड नं. 42, बसंतपुर, राजनांदगांव, Chhattisgarh – 491441
📞 मोबाइल: 9406138940
📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
✨ पहचान — बेबाक, तेज़ और सच को जनता तक पहुँचाने वाली पत्रकारिता।


