पत्रकारों पर दबाव और चरित्र हनन के आरोप, प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने CM से मांगी उच्चस्तरीय जांच

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सरगुजा-अंबिकापुर में पत्रकारों और सोशल मीडिया एक्टिविस्टों के खिलाफ कथित अभियान का मामला, संगठन ने निष्पक्ष जांच की उठाई मांग
अंबिकापुर- रायपुर। सरगुजा संभाग और अंबिकापुर क्षेत्र में पत्रकारों एवं सोशल मीडिया एक्टिविस्टों के खिलाफ कथित तौर पर चरित्र हनन, धमकी, भ्रामक प्रचार और सोशल मीडिया सामग्री को काट-छांटकर प्रसारित करने के आरोपों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मामले को लेकर प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन की छत्तीसगढ़ इकाई ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
एसोसिएशन की ओर से जारी ज्ञापन में कहा गया है कि सरगुजा क्षेत्र में वन उपज, खनिज, भूमि, रेत सहित प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े मामलों को लेकर पत्रकारों और सोशल मीडिया एक्टिविस्टों द्वारा समय-समय पर जनहित के सवाल उठाए जाते रहे हैं। संगठन का आरोप है कि ऐसे मामलों में प्रभावशाली लोगों के हित प्रभावित होने के बाद कुछ पत्रकारों और सोशल मीडिया एक्टिविस्टों को कथित रूप से निशाना बनाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।
सोशल मीडिया पर बदनाम करने का आरोप
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कुछ मामलों में पत्रकारों को सोशल मीडिया के माध्यम से बदनाम करने, धमकाने, निजी जीवन और चरित्र को निशाना बनाने तथा उनके वीडियो या बयानों की कथित तौर पर आधी-अधूरी क्लिप काटकर अलग अर्थ में प्रसारित करने का प्रयास किया गया।
संगठन का कहना है कि यदि पत्रकारों द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों के बाद उनके खिलाफ शिकायत, एफआईआर अथवा सोशल मीडिया अभियान चलाए जाते हैं, तो पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच जरूरी है, ताकि वास्तविक तथ्यों को सामने लाया जा सके।
संपादक मनोज पांडे का मामला भी ज्ञापन में शामिल
एसोसिएशन ने ज्ञापन में बुलंद छत्तीसगढ़ के संपादक मनोज पांडे से संबंधित मामले का भी उल्लेख किया है। संगठन के अनुसार, उनके विरुद्ध जनसंपर्क कार्यालय में तोड़फोड़ से संबंधित शिकायत का मामला उसके संज्ञान में आया है। ज्ञापन में इस मामले सहित पत्रकारों के विरुद्ध सामने आए अन्य मामलों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच की मांग
प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि सरगुजा संभाग एवं अंबिकापुर क्षेत्र में पत्रकारों तथा सोशल मीडिया एक्टिविस्टों के विरुद्ध लगाए जा रहे आरोपों, शिकायतों, एफआईआर और कथित सोशल मीडिया अभियानों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
संगठन का कहना है कि जांच के दौरान मूल वीडियो, पूरी सोशल मीडिया सामग्री, संबंधित शिकायतों, एफआईआर और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जाए, ताकि किसी भी पक्ष

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