खबर का असर 1962 MVU में डीजल शिकायत पर ड्राइवर निलंबित, डॉक्टर की भूमिका पर सवाल

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शिवशंकर सिंह ने उठाई निष्पक्ष जांच की मांग, GPS, लॉगबुक और डीजल रिकॉर्ड के मिलान का मुद्दा; 20 से अधिक गोवंश की सड़क हादसे में मौत का मामला भी उठाया

राजनांदगांव – बालोद। पशुपालकों के घर तक पशु चिकित्सा सेवा पहुंचाने के उद्देश्य से संचालित 1962 मोबाइल वेटरनरी यूनिट (MVU) की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। डीजल उपयोग में कथित अनियमितता की शिकायत के बाद संबंधित वाहन के ड्राइवर को निलंबित किए जाने की बात सामने आई है। अब शिकायतकर्ता शिवशंकर सिंह ने सवाल उठाया है कि यदि घटना के समय वाहन में ड्राइवर के साथ डॉक्टर भी मौजूद थे, तो डॉक्टर की भूमिका की जांच किस स्तर पर हुई?

शिवशंकर सिंह के अनुसार, उन्होंने बालोद कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, पशु स्वास्थ्य विभाग तथा देवरी थाना में मामले को लेकर लिखित शिकायत प्रस्तुत की है। उनका दावा है कि शिकायत के बाद Bavya Health Services Pvt. Ltd. की ओर से संबंधित ड्राइवर के विरुद्ध निलंबन की कार्रवाई की गई। हालांकि, उनका कहना है कि केवल ड्राइवर पर कार्रवाई से मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट नहीं होती।

ड्राइवर पर कार्रवाई तो डॉक्टर की भूमिका की जांच क्यों नहीं?

शिकायतकर्ता का मुख्य सवाल है कि यदि डीजल उपयोग, वाहन संचालन अथवा कथित अनियमितता से जुड़े मामले में ड्राइवर के विरुद्ध कार्रवाई की गई है, तो उसी समय वाहन में मौजूद डॉक्टर सहित पूरे दल की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

शिवशंकर सिंह का कहना है कि यदि जांच में डॉक्टर की कोई भूमिका नहीं पाई जाती है तो इसका स्पष्ट उल्लेख रिकॉर्ड में होना चाहिए। वहीं, यदि जांच में किसी स्तर पर उनकी भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

GPS और लॉगबुक की जांच से खुल सकता है पूरा मामला

1962 MVU व्यवस्था में GPS ट्रैकिंग और कॉल सेंटर आधारित संचालन का उल्लेख किया जाता है। ऐसे में शिकायतकर्ता ने वाहन की GPS लोकेशन, लॉगबुक, डीजल खपत, ईंधन बिल, 1962 कॉल लॉग और ड्यूटी रिपोर्ट की जांच की मांग उठाई है।

उनका कहना है कि संबंधित अवधि में वाहन ने वास्तव में कितने किलोमीटर की यात्रा की, कितना डीजल स्वीकृत हुआ, कितना खर्च दर्ज किया गया और GPS रिकॉर्ड तथा लॉगबुक में कोई अंतर है या नहीं—इन सभी बिंदुओं का दस्तावेजों के आधार पर मिलान होना चाहिए।

163 से अधिक MVU और करोड़ों के टेंडर पर भी सवाल

शिवशंकर सिंह ने छत्तीसगढ़ में संचालित 163 से अधिक मोबाइल वेटरनरी यूनिटों की व्यवस्था को लेकर भी व्यापक पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि जब इतनी बड़ी संख्या में MVU संचालित हो रही हैं और इस व्यवस्था में करोड़ों रुपये के टेंडर एवं सरकारी भुगतान जुड़े हैं, तो वाहनों के संचालन, ईंधन, मानव संसाधन, दवाओं, मरम्मत और रखरखाव से संबंधित रिकॉर्ड की नियमित जांच आवश्यक है।

उनके अनुसार यह भी सार्वजनिक होना चाहिए कि संबंधित अवधि में कंपनी को किस आधार पर भुगतान किया गया और विभागीय अधिकारियों ने भुगतान से पहले किन रिकॉर्डों का सत्यापन किया।

20 से अधिक गोवंश की मौत का मामला भी उठाया

इसी बीच शिवशंकर सिंह ने चिचोला थाना क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में 20 से अधिक गोवंश की मौत के मामले को भी उठाया है। उनके अनुसार इस संबंध में जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, जिला पंचायत CEO, पशुपालन विभाग, NHAI और संबंधित थाना को शिकायत दी गई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में गोवंश की सड़क दुर्घटना में मौत के मामले में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, सड़क पर सुरक्षा संबंधी क्या इंतजाम थे, दुर्घटना के बाद संबंधित विभागों को कब सूचना दी गई और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए।

“कंपनी को बचाने का प्रयास तो नहीं?”—शिकायतकर्ता

शिवशंकर सिंह ने आरोप लगाया है कि शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से उन्हें संबंधित कंपनी को बचाए जाने की आशंका है। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उनका कहना है कि पूरे मामले की जांच केवल कंपनी के स्तर तक सीमित न रखकर जिला प्रशासन, पशुपालन विभाग और पुलिस के स्तर पर स्वतंत्र एवं दस्तावेज-आधारित जांच कराई जानी चाहिए।

सरकारी भुगतान और जवाबदेही का भी मामला

शिकायतकर्ता ने 1962 MVU व्यवस्था से जुड़े कई रिकॉर्ड की जांच की मांग की है। इनमें—

  • वाहन ने कितने किलोमीटर की यात्रा की?
  • कितना डीजल स्वीकृत और खर्च हुआ?
  • GPS रिकॉर्ड और लॉगबुक में कितना अंतर है?
  • 1962 कॉल सेंटर पर कितनी कॉल आईं?
  • कितनी कॉल पर MVU मौके पर पहुंची?
  • संबंधित दिन किस डॉक्टर और स्टाफ की ड्यूटी थी?
  • दवाओं का कितना उपयोग हुआ?
  • वाहन की मरम्मत और रखरखाव पर कितना भुगतान हुआ?
  • कंपनी को भुगतान किस आधार पर किया गया?
  • विभागीय अधिकारियों ने रिकॉर्ड का सत्यापन किया या नहीं?

जैसे बिंदु शामिल हैं।

अब जांच के नतीजे पर नजर

पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ड्राइवर के निलंबन के बाद विभागीय जांच किस स्तर तक पहुंची? क्या घटना के समय मौजूद डॉक्टर की भूमिका की भी जांच हुई? क्या GPS, लॉगबुक और डीजल रिकॉर्ड का मिलान किया गया? और चिचोला क्षेत्र में 20 से अधिक गोवंश की मौत के मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई?

इन सवालों पर जिला प्रशासन, पशुपालन विभाग, पुलिस तथा संबंधित सेवा प्रदाता कंपनी का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और मांगों की स्वतंत्र पुष्टि की प्रतीक्षा है।

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