
एमपी भोज ओपन यूनिवर्सिटी में पीएचडी और राजनांदगांव पॉलीटेक्निक कॉलेज में संविदा नियुक्ति की अवधि के मिलान की मांग, मूल दस्तावेजों से जांच कराने की उठी मांग
राजनांदगांव – मिनीमाता शासकीय कन्या पॉलीटेक्निक कॉलेज, राजनांदगांव के पूर्व प्राचार्य एवं वर्तमान प्राध्यापक डॉ. मृदुल रत्न चौरसिया की पीएचडी डिग्री और संविदा नियुक्ति से जुड़े रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले में मुख्य सवाल यह है कि एमपी भोज (मुक्त) विश्वविद्यालय, भोपाल में पीएचडी से जुड़ी अवधि और राजनांदगांव के शासकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज में संविदा नियुक्ति की अवधि क्या एक-दूसरे से ओवरलैप करती थीं?
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने संबंधित विभाग एवं सक्षम जांच एजेंसी से मामले की निष्पक्ष, समयबद्ध और दस्तावेज-आधारित जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति पर लगाए गए आरोपों को अंतिम सत्य मानने के बजाय दोनों संस्थानों के मूल अभिलेखों का मिलान कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जानी चाहिए।
एक ही अवधि में दो संस्थानों से जुड़ाव कैसे?
शिवशंकर सिंह ने सवाल उठाया है कि डॉ. चौरसिया की एमपी भोज ओपन यूनिवर्सिटी में पीएचडी की वास्तविक अवधि क्या थी और उसी दौरान राजनांदगांव पॉलीटेक्निक कॉलेज में उनकी संविदा नियुक्ति, उपस्थिति और कार्य किस प्रकार दर्ज था।
यदि रिकॉर्ड में दोनों अवधियों का ओवरलैप सामने आता है, तो उपस्थिति, अवकाश, विभागीय अनुमति, नियुक्ति की शर्तों और विश्वविद्यालय के नियमों का परीक्षण किए जाने की मांग की गई है।
पीएचडी के रिकॉर्ड की होगी असली परीक्षा
मामले में पीएचडी से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों के सत्यापन की मांग की गई है। इनमें—
- पीएचडी में प्रवेश एवं पंजीयन की तारीख
- शोध कार्य की वास्तविक अवधि
- शोध निर्देशक/गाइड से संबंधित रिकॉर्ड
- शोध प्रगति रिपोर्ट
- विश्वविद्यालयीन उपस्थिति एवं अन्य अभिलेख
- शोध जमा किए जाने की तारीख
- डिग्री प्रदान किए जाने से संबंधित रिकॉर्ड
शामिल हैं।
मांग है कि इन रिकॉर्ड का राजनांदगांव पॉलीटेक्निक कॉलेज के नियुक्ति एवं उपस्थिति अभिलेखों से मिलान किया जाए।
संविदा नियुक्ति के रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में
जांच में संविदा नियुक्ति आदेश, अनुबंध, उपस्थिति पंजी, वेतन अथवा मानदेय भुगतान रिकॉर्ड, अवकाश आवेदन एवं स्वीकृति, विभागीय अनुमति और नियुक्ति की शर्तों से जुड़े दस्तावेजों को शामिल करने की मांग की गई है।
खास तौर पर यह देखा जाना है कि संविदा नियुक्ति के दौरान किसी अन्य संस्थान में अध्ययन या शोध से संबंधित गतिविधियों के लिए क्या विभागीय अनुमति आवश्यक थी और यदि आवश्यक थी तो क्या ऐसी अनुमति ली गई थी।
डॉ. चौरसिया ने आरोपों को बताया द्वेषपूर्ण
वहीं, डॉ. मृदुल रत्न चौरसिया का पक्ष भी सामने आया है। उनका कहना है कि वे निर्दोष हैं और उनके खिलाफ लगाए जा रहे गंभीर आरोप द्वेषपूर्ण हैं। उनका यह भी कहना है कि मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
ऐसे में पूरे मामले में आरोपों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय सरकारी विभाग और विश्वविद्यालय के मूल रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।
शिवशंकर सिंह ने उठाए ये बड़े सवाल
- एमपी भोज ओपन यूनिवर्सिटी में पीएचडी की वास्तविक अवधि क्या थी?
- पीएचडी में प्रवेश और पंजीयन कब हुआ?
- शोध कार्य और डिग्री प्रदान किए जाने की वास्तविक तारीख क्या है?
- इसी अवधि में पॉलीटेक्निक कॉलेज में संविदा नियुक्ति कितने समय की थी?
- दोनों संस्थानों के रिकॉर्ड में उपस्थिति किस प्रकार दर्ज है?
- क्या अध्ययन/शोध के लिए विभागीय अनुमति ली गई थी?
- संविदा नियुक्ति की शर्तों में अन्य संस्थान से जुड़े रहने को लेकर क्या प्रावधान थे?
- पीएचडी के दौरान विश्वविद्यालय का शोध प्रगति रिकॉर्ड क्या कहता है?
- यदि दोनों अवधियों में ओवरलैप है तो उस अवधि में वास्तविक कार्य और अध्ययन किस प्रकार हुआ?
- क्या नियुक्ति और पीएचडी से जुड़े अभिलेखों का पूर्व में विभागीय सत्यापन कराया गया था?
रिकॉर्ड खोलेगा राज!
शिवशंकर सिंह ने संबंधित विभाग एवं सक्षम जांच एजेंसी से मांग की है कि कॉलेज और विश्वविद्यालय के मूल अभिलेखों का स्वतंत्र सत्यापन और आपसी मिलान कराया जाए। उनका कहना है कि जांच का उद्देश्य किसी व्यक्ति को पहले से दोषी ठहराना नहीं, बल्कि नियुक्ति, उपस्थिति और पीएचडी से जुड़े रिकॉर्ड की वास्तविक स्थिति सामने लाना होना चाहिए।
यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए और यदि रिकॉर्ड आरोपों की पुष्टि नहीं करते हैं तो संबंधित व्यक्ति की स्थिति भी स्पष्ट की जाए।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि पीएचडी रिकॉर्ड, संविदा नियुक्ति और उपस्थिति रजिस्टर के दस्तावेज क्या तस्वीर सामने लाते हैं। मामले में जांच प्रतिवेदन सार्वजनिक किए जाने की भी मांग की गई है।

🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
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📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
✨ पहचान — बेबाक, तेज़ और सच को जनता तक पहुँचाने वाली पत्रकारिता।


