
शिवशंकर सिंह ने उठाए गंभीर सवाल—CCTV फुटेज, अस्पतालों का भौतिक निरीक्षण, मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरों की CDR जांच की मांग
राजनांदगांव। एक मरीज के तीन अलग-अलग अस्पतालों में उपचार के बाद हुई मौत का मामला अब जांच की मांग के साथ नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है। मामले को लेकर शिवशंकर सिंह ने CMHO सहित प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष विस्तृत और बिंदुवार जांच की मांग रखी है। उन्होंने सवाल उठाया है कि मरीज के भर्ती होने से लेकर अस्पताल बदलने, ऑपरेशन और अंततः मौत तक के पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने लाने के लिए सिर्फ कागजी रिकॉर्ड ही नहीं, बल्कि CCTV फुटेज, मेडिकल दस्तावेज और मौके का भौतिक निरीक्षण भी कराया जाना चाहिए।
शिवशंकर सिंह के अनुसार, मरीज को सबसे पहले शिवाय हॉस्पिटल, राजनांदगांव में भर्ती कराया गया था। उनका आरोप है कि आयुष्मान योजना के तहत उपचार के नाम पर मरीज को वहां रखा गया। इसके बाद 19 अगस्त 2026 को मरीज को डॉ. कुमुद महोबिया मेमोरियल अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।
25 अगस्त को डिस्चार्ज, कुछ घंटे बाद तीसरे अस्पताल पहुंचने पर सवाल
शिकायत के अनुसार, दूसरे अस्पताल में मरीज के उपचार में डॉ. चंचल देवांगन और डॉ. कुमुद महोबे से संबंधित चिकित्सकीय प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि हड्डी के ऑपरेशन के नाम पर मरीज को भर्ती रखा गया और 25 अगस्त 2026 को सुबह करीब 10:30 बजे डिस्चार्ज किया गया।
इसके बाद, शिकायतकर्ता के अनुसार, उसी दिन शाम करीब 4 बजे मरीज को राजनांदगांव हेल्थ केयर सेंटर, डोंगरगांव रोड ले जाया गया, जहां ऑपरेशन किए जाने की बात सामने आई है।
यही घटनाक्रम अब जांच का प्रमुख बिंदु बन गया है। सवाल यह है कि एक अस्पताल से डिस्चार्ज होने के कुछ ही घंटे बाद मरीज को तीसरे अस्पताल में किन चिकित्सकीय परिस्थितियों में ले जाया गया और वहां उपचार एवं ऑपरेशन की प्रक्रिया किस आधार पर हुई?
मृतक की बेटी के बयान से जुड़े तथ्यों की भी जांच की मांग
शिवशंकर सिंह का कहना है कि मृतक की बेटी ने उपचार और ऑपरेशन से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी दी है। उनके अनुसार, परिजन कथित ऑपरेशन स्थल तक भी उन्हें लेकर गए और संबंधित स्थान की पहचान कराई।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। यही वजह है कि शिकायतकर्ता ने प्रशासन से मौके का संयुक्त भौतिक निरीक्षण और वीडियोग्राफी कराने की मांग की है, ताकि दस्तावेजों और मौके पर उपलब्ध वास्तविक स्थिति का मिलान किया जा सके।
तीनों अस्पतालों की CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग
मामले में सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक तीनों अस्पतालों की CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की है।
शिवशंकर सिंह ने मांग की है कि—
- शिवाय हॉस्पिटल में मरीज के भर्ती होने से डिस्चार्ज तक की CCTV फुटेज सुरक्षित कराई जाए।
- डॉ. कुमुद महोबिया मेमोरियल अस्पताल की संबंधित अवधि की फुटेज सुरक्षित की जाए।
- राजनांदगांव हेल्थ केयर सेंटर की मरीज के पहुंचने और उपचार से संबंधित CCTV फुटेज भी जांच में शामिल की जाए।
- उपलब्ध डिजिटल रिकॉर्ड/फुटेज को जांच अभिलेख का हिस्सा बनाया जाए।
उनका कहना है कि CCTV फुटेज से मरीज की आवाजाही, अस्पताल में प्रवेश-निकास और संबंधित समयावधि की गतिविधियों के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
अस्पतालों का संयुक्त निरीक्षण कराने की मांग
शिवशंकर सिंह ने दुर्ग संभाग के कमिश्नर और राजनांदगांव कलेक्टर से संबंधित अस्पतालों का संयुक्त भौतिक निरीक्षण कराने की मांग की है।
उनके अनुसार निरीक्षण के दौरान अस्पताल की वास्तविक व्यवस्थाओं, ऑपरेशन थिएटर, मरीज की भर्ती-डिस्चार्ज प्रक्रिया, मेडिकल रिकॉर्ड, उपचार संबंधी दस्तावेज और लागू नर्सिंग होम नियमों की स्थिति का परीक्षण किया जाना चाहिए।
उन्होंने निरीक्षण की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने की भी मांग रखी है।
डॉक्टरों की कॉल डिटेल और संपर्कों की जांच पर जोर
शिकायत में डॉ. चंचल देवांगन और डॉ. कुमुद महोबे के बीच संबंधित अवधि की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच की मांग भी की गई है।
शिवशंकर सिंह का कहना है कि यदि जांच एजेंसी को कानूनी प्रक्रिया के तहत CDR उपलब्ध होती है, तो उससे मरीज के अस्पताल बदलने और उपचार प्रक्रिया के दौरान संबंधित व्यक्तियों के बीच हुए संपर्कों के संबंध में तथ्यात्मक जानकारी मिल सकती है।
“दस्तावेजों के साथ मौके पर भी हो जांच”
शिवशंकर सिंह ने कहा कि किसी भी डॉक्टर, अस्पताल या व्यक्ति को जांच पूरी होने से पहले दोषी ठहराना उचित नहीं है। उनके अनुसार, निष्पक्ष जांच में मेडिकल रिकॉर्ड, आयुष्मान योजना से जुड़े दस्तावेज, भर्ती एवं डिस्चार्ज रिकॉर्ड, ऑपरेशन संबंधी कागजात, CCTV फुटेज और परिजनों के बयान को शामिल किया जाना चाहिए।
उनका कहना है कि जांच का उद्देश्य वास्तविक घटनाक्रम सामने लाना होना चाहिए और यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
“डॉ. चंचल से जुड़े दावों की सच्चाई जांच में ही सामने आएगी”
शिकायत में डॉ. चंचल देवांगन से संबंधित कुछ आरोप और सवाल भी उठाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मकता है और संबंधित रिकॉर्ड जांच के बाद क्या तस्वीर सामने आती है।
वीडियो रिकॉर्डिंग, CCTV, मेडिकल दस्तावेज, अस्पताल के रजिस्टर और अन्य उपलब्ध रिकॉर्ड इस मामले में घटनाक्रम की पुष्टि के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो अस्पतालों के घेराव की चेतावनी
शिवशंकर सिंह ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन द्वारा मामले में निष्पक्ष और बिंदुवार जांच, रिकॉर्ड सुरक्षित कराने तथा संबंधित अस्पतालों के भौतिक निरीक्षण की कार्रवाई नहीं की जाती है, तो संगठन की ओर से CMHO कार्यालय के घेराव और संबंधित अस्पतालों के खिलाफ आंदोलन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जांच में देरी या कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन किया जाएगा और इसकी सूचना प्रशासन को दी जाएगी।
बड़ा सवाल—मरीज की मौत से पहले क्या हुआ था?
अब पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मरीज के तीन अस्पतालों में उपचार के दौरान वास्तविक चिकित्सकीय घटनाक्रम क्या रहा? किस अस्पताल में कौन-सा उपचार हुआ? किस समय मरीज को डिस्चार्ज किया गया? तीसरे अस्पताल में पहुंचने के बाद कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई? और इन सभी घटनाओं का मेडिकल रिकॉर्ड व CCTV फुटेज से कितना मिलान होता है?
इन सवालों का जवाब प्रशासनिक जांच, चिकित्सकीय दस्तावेज, CCTV फुटेज और संबंधित पक्षों के बयान सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
नोट: इस खबर में उल्लेखित आरोप एवं दावे शिकायतकर्ता शिवशंकर सिंह द्वारा उठाए गए सवालों और जांच की मांग पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि समाचार प्रकाशन के समय नहीं हुई है। संबंधित डॉक्टरों एवं तीनों अस्पतालों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
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📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
✨ पहचान — बेबाक, तेज़ और सच को जनता तक पहुँचाने वाली पत्रकारिता।


