वाइडनेयर स्कूल की राजगामी भूमि पर फिर उठे सवाल! 2018 से 2023 तक की शिकायतों पर मांगी गई ATR

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1975 के अधिपत्य से लेकर 2023 के आदेश तक जांच की मांग, 19 बिंदुओं पर मांगा जवाब; कलेक्टर और एसपी को पूर्व शिकायत का भी हवाला

राजनांदगांव। लालबाग स्थित वाइडनेयर स्कूल से जुड़ी राजगामी संपदा न्यास की भूमि को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए गए हैं। कर्तव्य न्याय भागीदारी आंदोलन भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने राजगामी संपदा न्यास की अध्यक्ष को आवेदन सौंपकर वर्ष 2018 से 2023 तक इस मामले में की गई शिकायतों पर Action Taken Report (ATR) उपलब्ध कराने की मांग की है।

शिकायतकर्ता ने आवेदन में दावा किया है कि इसी प्रकरण को लेकर पूर्व में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव के समक्ष भी शिकायतें प्रस्तुत की गई थीं। अब मांग की गई है कि शिकायतों पर हुई कार्रवाई, जांच अधिकारियों, दस्तावेजों और लिए गए निर्णयों की स्थिति रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट की जाए।

करीब 1.50 लाख वर्गफुट भूमि का मामला

आवेदन के अनुसार मामला खसरा नंबर 369, नवीन खसरा नंबर 183 एवं 184 से संबंधित करीब 1,50,000 वर्गफुट भूमि का है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच संबंधित अधिकारियों के समक्ष दस्तावेजों के साथ कई शिकायतें प्रस्तुत की गईं, लेकिन अब तक उन शिकायतों पर हुई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं है।

1975 के अधिपत्य और लीज प्रस्ताव पर उठे सवाल

शिकायत में पुराने राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा गया है कि तत्कालीन कलेक्टर द्वारा 9 दिसंबर 1975 को उक्त भूमि का अग्रिम अधिपत्य रायपुर धर्मप्रांतिय समाज, रायपुर को प्राथमिक विद्यालय निर्माण के उद्देश्य से दिए जाने का उल्लेख है।

इसके बाद 12 दिसंबर 1975 को 30 वर्ष की लीज के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे जाने की बात भी आवेदन में कही गई है।

अब शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि उस लीज प्रस्ताव की आगे क्या स्थिति रही और वर्तमान में भूमि की वैधानिक स्थिति क्या है?

2003 के प्रस्ताव और 2007 के कथित हस्तांतरण की जांच की मांग

आवेदन में संबंधित संस्थाओं के बीच हुए कथित समझौते तथा संपत्ति के हस्तांतरण की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है।

शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि रायपुर डायोसिस एज्युकेशन सोसायटी द्वारा वर्ष 2003 में कथित प्रस्ताव पारित किया गया और इसके बाद 16 मार्च 2007 को शिक्षा प्रचार एवं प्रसार समिति, रायपुर के पक्ष में कथित हस्तांतरण किया गया।

अब सवाल यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान राजगामी संपदा न्यास अथवा शासन की अनुमति आवश्यक थी या नहीं और क्या इसकी विधिवत जांच की गई?

2023 के अधिपत्य आदेश पर भी मांगी गई पूरी जानकारी

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि शिक्षा प्रचार एवं प्रसार समिति द्वारा संपत्ति को अपनी निजी संपत्ति के रूप में प्रस्तुत किए जाने के बाद वर्ष 2023 में अधिपत्य संबंधी आदेश प्राप्त किया गया।

शिकायतकर्ता ने इस आदेश की वैधानिक प्रक्रिया से लेकर उससे पहले किए गए परीक्षण, नोटशीट, अनुमोदन और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जानकारी मांगी है।

19 बिंदुओं पर ATR की मांग

शिवशंकर सिंह द्वारा दिए गए आवेदन में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जानकारी मांगी गई है—

  • वर्ष 2018 से 2023 तक प्राप्त शिकायतों पर दिनांकवार क्या कार्रवाई हुई?
  • जांच किस अधिकारी अथवा समिति ने की?
  • जांच आदेश की प्रमाणित प्रति क्या है?
  • संबंधित संस्थाओं से कौन-कौन से दस्तावेज लिए गए?
  • भूमि के मूल स्वामित्व और राजगामी संपदा की स्थिति का परीक्षण हुआ या नहीं?
  • वर्ष 1975 के अग्रिम अधिपत्य और 30 वर्ष की लीज प्रस्ताव की वर्तमान स्थिति क्या है?
  • वर्ष 2003 के कथित प्रस्ताव और 2007 के कथित हस्तांतरण की वैधानिकता की जांच हुई या नहीं?
  • भूमि हस्तांतरण के लिए न्यास अथवा शासन की अनुमति आवश्यक थी या नहीं?
  • वर्ष 2023 के अधिपत्य आदेश की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराई जाए।
  • उससे संबंधित नोटशीट और अनुमोदन की जानकारी दी जाए।
  • वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में भूमि किसके नाम दर्ज है?
  • वर्तमान कब्जा किसका है?
  • भूमि का बाजार अथवा शासकीय मूल्यांकन किया गया या नहीं?
  • राजगामी संपदा को संभावित आर्थिक अथवा संपत्ति संबंधी नुकसान का आकलन हुआ या नहीं?
  • कथित अनधिकृत हस्तांतरण संबंधी शिकायत जांच में सही, आंशिक रूप से सही अथवा निराधार पाई गई?
  • यदि शिकायत सही पाई गई तो क्या कार्रवाई की गई?
  • यदि शिकायत निराधार पाई गई तो जांच रिपोर्ट और उसके आधार क्या हैं?
  • क्या किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही प्रथमदृष्टया सामने आई?
  • यदि जांच लंबित है तो उसका कारण और समय-सीमा क्या है?

कलेक्टर और एसपी कार्यालय में पूर्व शिकायत का भी हवाला

शिवशंकर सिंह के अनुसार यह मामला केवल राजगामी संपदा न्यास तक सीमित नहीं है। आवेदन में दावा किया गया है कि इसी प्रकरण को लेकर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक, राजनांदगांव के समक्ष भी पूर्व में शिकायतें प्रस्तुत की गई थीं।

ऐसे में अब राजगामी संपदा न्यास से ATR मांगने के साथ-साथ प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर पूर्व शिकायतों पर हुई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने की मांग भी की गई है।

“फाइलों में नहीं, मूल रिकॉर्ड के आधार पर हो जांच”

शिकायतकर्ता शिवशंकर सिंह का कहना है कि मामला बहुमूल्य राजगामी संपदा की भूमि से जुड़ा है, इसलिए जांच केवल पत्राचार या औपचारिक कार्रवाई तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

उनकी मांग है कि मूल राजस्व रिकॉर्ड, लीज संबंधी दस्तावेज, न्यास के अभिलेख, पंजीकृत दस्तावेज, हस्तांतरण संबंधी प्रस्ताव और वर्ष 2023 के अधिपत्य आदेश से जुड़ी पूरी प्रक्रिया का परीक्षण किया जाए और वास्तविक स्थिति रिकॉर्ड के आधार पर सामने लाई जाए।

बड़ा सवाल—क्या खुलेगा पुरानी शिकायतों का रिकॉर्ड?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वर्ष 2018 से 2023 के बीच इस भूमि को लेकर जो शिकायतें की गईं, उन पर वास्तव में क्या कार्रवाई हुई? क्या कोई जांच हुई? जांच हुई तो उसका निष्कर्ष क्या रहा? और यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई तो इसके पीछे कारण क्या था?

फिलहाल शिकायतकर्ता ने राजगामी संपदा न्यास से 19 बिंदुओं पर जवाब और ATR मांगी है। अब निगाह इस बात पर है कि न्यास, कलेक्टर कार्यालय और पुलिस अधीक्षक कार्यालय इस मामले में क्या आधिकारिक जानकारी सामने रखते हैं।

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