राजगामी संपदा न्यास पर फिर उठे गंभीर सवाल, 10 साल से ऑडिट नहीं होने का आरोप; FIR की मांग

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राजनांदगांव – श्रीमती सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा न्यास को लेकर एक बार फिर वित्तीय पारदर्शिता और नियमों के पालन पर सवाल खड़े किए गए हैं। एक्टिविस्ट क्रिस्टोफर पॉल ने दुर्ग संभागायुक्त को शिकायत सौंपकर न्यास के जिम्मेदार अधिकारियों एवं सदस्यों के विरुद्ध FIR दर्ज कराने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
शिकायत में दावा किया गया है कि सार्वजनिक न्यास के पंजीकृत बायलॉज में निर्धारित प्रावधानों का लंबे समय से पालन नहीं किया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने विशेष रूप से वर्ष 2015 से मार्च 2026 तक न्यास का ऑडिट नहीं होने का आरोप लगाया है।

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बजट को लेकर भी नियमों के उल्लंघन का आरोप
शिकायत में बायलॉज की कंडिका 4 का हवाला देते हुए कहा गया है कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष का वार्षिक बजट आय-व्यय का विवरण वर्ष शुरू होने से कम से कम दो माह पहले शासन के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाना चाहिए और स्वीकृति के बाद ही व्यय किया जा सकता है। आरोप है कि न्यास की समिति द्वारा इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है।
2015 से ऑडिट नहीं होने का दावा
शिकायतकर्ता ने बायलॉज की कंडिका 18 का उल्लेख करते हुए समय-समय पर शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अंकेक्षण कराने की आवश्यकता बताई है। आरोप है कि वर्ष 2015 से मार्च 2026 तक न्यास का ऑडिट नहीं कराया गया।
शिकायत में इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए वित्तीय गड़बड़ी या गबन की आशंका जताई गई है। हालांकि, ये आरोप शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
पहले भी शिकायत, कार्रवाई पर सवाल
क्रिस्टोफर पॉल के अनुसार, इस संबंध में पूर्व में भी संबंधित कार्यालय को लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।
अब शिकायतकर्ता ने दुर्ग संभागायुक्त से मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यास के जिम्मेदार पदाधिकारियों एवं अधिकारियों के विरुद्ध FIR दर्ज कराने, दस्तावेजों की जांच कराने और निष्पक्ष जांच के आदेश की मांग की है।
बड़ा सवाल – क्या राजगामी संपदा न्यास के बायलॉज के अनुसार नियमित बजट अनुमोदन और ऑडिट हुआ या नहीं? अगर लंबे समय से ऑडिट नहीं हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? अब निगाहें प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।

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