
गणेशिया बाई पाल और खेमन लाल साहू की मौत के बाद नवजीवन-महोबिया समेत चार अस्पताल जांच के घेरे में; शिवशंकर सिंह ने Nursing Home Act, आयुष्मान अनुपालन और भौतिक सत्यापन पर उठाए सवाल*
राजनांदगांव – नवजीवन अस्पताल और कुमुद महोबिया अस्पताल सहित चार निजी अस्पतालों में गणेशिया बाई पाल एवं खेमन लाल साहू की मौत से जुड़े मामलों की जांच के लिए जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के नेतृत्व में जांच समिति गठित किए जाने के बाद अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती निष्पक्ष, पारदर्शी और मौके पर आधारित जांच की है।
निजी अस्पतालों में Nursing Home Act के अनुपालन, पंजीयन एवं लाइसेंस की शर्तों, उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं, स्टाफ, उपचार रिकॉर्ड तथा आयुष्मान भारत योजना के नियमों की वास्तविक स्थिति जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकती है।
लेकिन इस नई जांच के साथ ही पुराने मामलों की कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
10 बड़े सवाल, जिनका जवाब जनता चाहती है
पहला सवाल: क्या जांच समिति केवल अस्पताल प्रबंधन और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज करेगी या अस्पतालों का अचानक/मौके पर भौतिक सत्यापन भी करेगी?
दूसरा सवाल: क्या Nursing Home Act के तहत अस्पतालों के पंजीयन, लाइसेंस और निर्धारित शर्तों का वास्तविक अनुपालन जांचा जाएगा?
तीसरा सवाल: अस्पताल में जितने डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य स्वास्थ्यकर्मी रिकॉर्ड में दर्शाए गए हैं, क्या वे वास्तव में निर्धारित समय पर उपलब्ध थे?
चौथा सवाल: मरीजों की केस शीट, जांच रिपोर्ट, दवाओं का रिकॉर्ड, बिल, भुगतान रसीद, उपचार की समय-सीमा और डेथ रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच होगी या नहीं?
पांचवां सवाल: क्या अस्पताल में उपलब्ध उपकरण और घोषित चिकित्सा सुविधाओं का मौके पर भौतिक सत्यापन किया जाएगा?
छठा सवाल: यदि संबंधित अस्पताल आयुष्मान भारत PM-JAY में पंजीकृत हैं, तो क्या उपचार, पैकेज, बिलिंग और मरीजों से संबंधित योजना के नियमों का अनुपालन भी जांच के दायरे में आएगा?
सातवां सवाल: यदि जांच में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अस्पताल, संचालक अथवा जिम्मेदार व्यक्ति के विरुद्ध किस सक्षम प्राधिकारी द्वारा और किस नियम के तहत कार्रवाई की जाएगी?
आठवां सवाल: यदि जांच में कोई आरोप प्रमाणित नहीं होता तो क्या प्रशासन स्पष्ट रूप से अपनी जांच रिपोर्ट और निष्कर्ष सार्वजनिक करेगा?
नौवां सवाल: पूर्व में गठित जांच समितियों की रिपोर्ट और उनके अनुपालन की समीक्षा कौन करेगा?
दसवां सवाल: क्या नई जांच समिति अपनी रिपोर्ट की समयसीमा और कार्रवाई की स्थिति सार्वजनिक करेगी?
संजीवनी अस्पताल प्रकरण फिर चर्चा में
शिवशंकर सिंह ने पूर्व के संजीवनी अस्पताल एवं विद्या संगोड़े मामले का हवाला देते हुए सवाल उठाया है कि यदि किसी जांच में अनियमितताएं सामने आती हैं और उसके बाद सक्षम अधिकारी कार्रवाई के निर्देश देते हैं, तो उन निर्देशों का पालन हुआ या नहीं—इसकी निगरानी कौन करता है?
उनका कहना है कि उनके अनुसार संबंधित मामले में परिवार को उपचार खर्च के संबंध में निर्देश दिए गए थे और निर्धारित अवधि में अनुपालन की अपेक्षा थी। उनका दावा है कि लंबे समय बाद भी पूर्ण अनुपालन की स्थिति स्पष्ट नहीं हुई और इस संबंध में उन्होंने कलेक्टर राजनांदगांव के समक्ष पुनः शिकायत की।
अब सवाल यह है कि यदि पुराने मामलों के अनुपालन की निगरानी ही स्पष्ट नहीं है तो नई जांच रिपोर्ट का परिणाम जमीन पर कैसे दिखाई देगा?
जांच समिति बनना समाधान नहीं
शिवशंकर सिंह का कहना है कि शिकायतों के बाद जांच समिति गठित करना प्रशासनिक प्रक्रिया का एक चरण है, लेकिन वास्तविक जवाबदेही तब तय होगी जब—
मौके पर भौतिक सत्यापन हो,
दस्तावेजों का स्वतंत्र मिलान हो,
मरीज/परिजनों के बयान दर्ज हों,
चिकित्सकीय रिकॉर्ड की जांच हो,
Nursing Home Act की शर्तों का परीक्षण हो,
आयुष्मान योजना के रिकॉर्ड की जांच हो,
जिम्मेदारी निर्धारित हो और
नियमों के अनुसार अंतिम कार्रवाई हो।
उनका कहना है कि “जांच समिति बनाकर मामले को लंबित रखना किसी भी शिकायत का अंतिम समाधान नहीं हो सकता।”
निजी अस्पताल और अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
शिवशंकर सिंह ने निजी अस्पतालों और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच कथित सांठगांठ की आशंका को भी जांच का विषय बताया है। हालांकि ऐसी किसी सांठगांठ का निष्कर्ष स्वतंत्र जांच और प्रमाण के बिना नहीं निकाला जा सकता।
उनका सवाल है कि यदि वर्षों से शिकायतें होती रही हैं और कई मामलों में जांच भी गठित हुई है, तो प्रत्येक मामले की अंतिम कार्रवाई, जिम्मेदारी और अनुपालन रिपोर्ट जनता के सामने क्यों नहीं आती?
अब कलेक्टर और CMHO की जवाबदेही भी महत्वपूर्ण
इस मामले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने अब दो स्तरों पर जवाबदेही का प्रश्न है।
पहला—नई जांच कितनी निष्पक्ष और तथ्यपरक है?
दूसरा—पूर्व में दिए गए आदेशों और जांच रिपोर्टों का कितना अनुपालन हुआ?
यदि किसी अस्पताल में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित कानून एवं सक्षम प्राधिकारी के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो प्रशासन को स्पष्ट निष्कर्ष देना चाहिए।
शिवशंकर सिंह बोले—अब सिर्फ बयान नहीं, जमीन पर जांच चाहिए
शिवशंकर सिंह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, कर्तव्य न्याय भागीदारी आंदोलन भारत ने कहा कि गणेशिया बाई पाल और खेमन लाल साहू की मौत के मामलों की जांच को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बनने दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा—
“जनता अब जांच समिति का गठन नहीं, जांच का परिणाम देखना चाहती है। अस्पतालों का भौतिक सत्यापन हो, Nursing Home Act के पालन की वास्तविक स्थिति सामने आए, आयुष्मान योजना के नियमों की जांच हो और यदि कोई अनियमितता प्रमाणित होती है तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जाए। साथ ही पूर्व शिकायतों और जांच रिपोर्टों के लंबित अनुपालन की भी समीक्षा हो।”
उन्होंने कहा कि यदि नई जांच भी केवल कथन, कागजी रिपोर्ट और लंबित फाइल तक सीमित रहती है, तो इससे स्वास्थ्य प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े होंगे।
अब नजर जांच समिति की कार्रवाई पर है—क्या इस बार जांच फाइल से निकलकर अस्पताल की जमीन तक पहुंचेगी?

🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
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📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
✨ पहचान — बेबाक, तेज़ और सच को जनता तक पहुँचाने वाली पत्रकारिता।


