बड़ी खबर | तीन अस्पताल, एक मौत और 15 बड़े सवाल! गनेशिया बाई केस में जांच की मांग, आयुष्मान योजना पर भी उठे सवाल

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90 वर्षीय महिला की मौत के बाद उपचार प्रक्रिया पर गंभीर सवाल, कुमुद मोहबिया अस्पताल, शिवाय हॉस्पिटल और राजनांदगांव हेल्थ केयर हॉस्पिटल के रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच की मांग

राजनांदगांव। जिले में करीब 90 वर्षीय श्रीमती गनेशिया बाई पाल की उपचार के दौरान हुई मौत का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। मरीज के उपचार, ऑपरेशन, आयुष्मान योजना के उपयोग, कथित अतिरिक्त राशि की मांग, रेफरल, ऑपरेशन के बाद संक्रमण और अंततः मृत्यु के कारणों को लेकर निष्पक्ष एवं विशेषज्ञ जांच की मांग की गई है।

इस मामले को लेकर कर्तव्य न्याय भागीदारी आंदोलन भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने राज्यपाल, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव, संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, कलेक्टर राजनांदगांव, CMHO सहित संबंधित चिकित्सा एवं नर्सिंग नियामक प्राधिकारियों को शिकायत भेजी है।

12 अगस्त को गिरने के बाद शुरू हुआ उपचार

शिकायत के अनुसार गनेशिया बाई पाल 12 अगस्त 2026 को घर में गिर गई थीं। इसके बाद उन्हें राजनांदगांव के बलदेव बाग स्थित कुमुद मोहबिया अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार मरीज के पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद ऑपरेशन को लेकर कथित रूप से अतिरिक्त राशि की मांग की गई। शिकायत में लगभग ₹25 हजार ऑपरेशन के लिए तथा करीब ₹21 हजार जमा करने के बाद डिस्चार्ज दिए जाने संबंधी कथित बातचीत का उल्लेख किया गया है।

परिवार का दावा है कि इस बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है। शिकायतकर्ता ने जांच एजेंसी के समक्ष इस रिकॉर्डिंग को प्रस्तुत किए जाने की बात कही है।

ऑपरेशन से लेकर रेफरल तक उठे सवाल

शिकायत में यह भी सवाल उठाया गया है कि यदि संबंधित अस्पताल में ऑपरेशन के लिए आवश्यक मशीनरी अथवा चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध या कार्यशील नहीं थी, तो मरीज को दूसरे अस्पताल में कब, क्यों और किन परिस्थितियों में रेफर किया गया?

मामले में शिवाय हॉस्पिटल और राजनांदगांव हेल्थ केयर हॉस्पिटल से जुड़े उपचार एवं मेडिकल रिकॉर्ड की भी जांच की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि तीनों अस्पतालों के मेडिकल रिकॉर्ड को एक साथ रखकर विशेषज्ञ समीक्षा की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मरीज का उपचार किस अस्पताल में, किस डॉक्टर द्वारा और किस परिस्थिति में किया गया तथा उसकी हालत कब और किन कारणों से बिगड़ी।

ऑपरेशन के बाद संक्रमण का आरोप, 7 सितंबर को मौत

शिकायत के मुताबिक ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत लगातार खराब होती गई और टांकों में संक्रमण होने की बात सामने आई। उपचार जारी रहने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने का दावा किया गया है।

इसके बाद 7 सितंबर 2026 की सुबह करीब 3 बजे गनेशिया बाई पाल की मृत्यु हो गई।

मौत के बाद परिवार की ओर से उपचार की पूरी प्रक्रिया और मृत्यु के वास्तविक चिकित्सकीय कारणों की स्वतंत्र जांच की मांग उठाई गई है।

🔴 15 सवालों पर जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की है। प्रस्तावित बोर्ड में वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ, सर्जन, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी, संक्रमण नियंत्रण विशेषज्ञ और सक्षम प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल करने की मांग की गई है।

जांच में प्रमुख रूप से इन बिंदुओं को शामिल करने की मांग की गई है—

  1. ऑपरेशन की आवश्यकता और उसकी प्रक्रिया क्या थी?
  2. मरीज अथवा परिजनों से Informed Consent लिया गया था या नहीं?
  3. कथित ₹25 हजार और ₹21 हजार की राशि किस मद में मांगी गई?
  4. आयुष्मान योजना के तहत अस्पताल ने क्या-क्या क्लेम किया?
  5. तीनों अस्पतालों के बिल और भुगतान रिकॉर्ड क्या कहते हैं?
  6. मरीज के रेफरल और ट्रांसफर का पूरा रिकॉर्ड क्या है?
  7. ऑपरेशन और एनेस्थीसिया से संबंधित रिकॉर्ड में क्या दर्ज है?
  8. ऑपरेशन के बाद मरीज की पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल कैसी रही?
  9. संक्रमण कब और किन परिस्थितियों में हुआ?
  10. संक्रमण नियंत्रण के निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन हुआ या नहीं?
  11. नर्सिंग स्टाफ की भूमिका और उपचार संबंधी रिकॉर्ड क्या बताते हैं?
  12. अस्पतालों के CCTV फुटेज में क्या सामने आता है?
  13. डिजिटल बिलिंग रिकॉर्ड और आयुष्मान पोर्टल पर दर्ज जानकारी में क्या समानता है?
  14. मरीज की हालत बिगड़ने और मृत्यु के बीच चिकित्सकीय घटनाक्रम क्या रहा?
  15. मृत्यु का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था?

CCTV, आयुष्मान रिकॉर्ड और वीडियो सुरक्षित रखने की मांग

शिकायतकर्ता ने अस्पतालों के उपलब्ध CCTV फुटेज, बिलिंग सिस्टम, आयुष्मान पोर्टल रिकॉर्ड, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखने की मांग की है।

इसके अलावा परिवार के पास उपलब्ध कथित वीडियो रिकॉर्डिंग की मूल डिजिटल फाइल का फॉरेंसिक परीक्षण कराने की मांग भी की गई है, ताकि रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और उसमें बातचीत करने वाले व्यक्तियों की पहचान की जांच हो सके।

‘दोषी घोषित करना उद्देश्य नहीं, निष्पक्ष जांच जरूरी’

शिवशंकर सिंह ने शिकायत में कहा है कि किसी डॉक्टर, अस्पताल या कर्मचारी को जांच से पहले दोषी घोषित करना उद्देश्य नहीं है। मांग केवल इतनी है कि कुमुद मोहबिया अस्पताल, शिवाय हॉस्पिटल और राजनांदगांव हेल्थ केयर हॉस्पिटल से संबंधित उपचार रिकॉर्ड को एक साथ रखकर स्वतंत्र विशेषज्ञ जांच कराई जाए।

यदि जांच में किसी डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, अस्पताल प्रबंधन अथवा अन्य व्यक्ति की चिकित्सकीय लापरवाही, कर्तव्यहीनता, आर्थिक अनियमितता या किसी कानूनी प्रावधान के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

अब बड़ा सवाल—जांच कब?

90 वर्षीय महिला की मौत से जुड़े इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या स्वास्थ्य विभाग तीनों अस्पतालों के उपचार रिकॉर्ड, आयुष्मान क्लेम, बिलिंग, CCTV और मेडिकल दस्तावेजों की स्वतंत्र विशेषज्ञ जांच कराएगा?

यदि जांच निष्पक्ष तरीके से होती है, तो उपचार की पूरी कड़ी और मरीज की हालत बिगड़ने से लेकर मृत्यु तक के घटनाक्रम से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।

नोट: इस खबर में उल्लिखित आरोप एवं दावे शिकायत में लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है। संबंधित अस्पतालों/चिकित्सकों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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