राजगामी संपदा न्यास पर गंभीर आरोप: 2015 से ऑडिट नहीं, संपत्तियों के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता की जांच की मांग

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राजनांदगांव – राजगामी संपदा न्यास की संपत्तियों और वित्तीय व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छत्तीसगढ़ वैष्णव महासभा ने न्यास की संपत्तियों के कथित दुरुपयोग, आर्थिक आय के बंदरबांट और लंबे समय से ऑडिट नहीं होने का आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

महासभा के पूर्व मंडलेश्वर कृष्ण कुमार वैष्णव ने प्रशासन से राजगामी संपदा न्यास की संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ ही अब तक हुए वित्तीय लेन-देन की जांच कराने की मांग उठाई है।

1988 में बना न्यास, संपत्ति संरक्षण के उद्देश्य पर उठे सवाल

ज्ञापन में कहा गया है कि राजगामी संपदा न्यास का गठन वर्ष 1988 में संपदा की संपत्तियों के संरक्षण, विस्तार और समुचित उपयोग के उद्देश्य से किया गया था। महासभा का आरोप है कि इन उद्देश्यों के विपरीत न्यास की संपत्तियों और उनसे होने वाली आर्थिक आय का कथित रूप से विभिन्न संस्थाओं एवं व्यक्तियों के बीच अनुचित तरीके से उपयोग किया जा रहा है।

महासभा ने दावा किया है कि ऐसी परिस्थितियों के कारण न्यास की संपत्ति लगातार घटने की स्थिति में है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

2015 से ऑडिट नहीं होने का दावा, वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल

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ज्ञापन में सबसे गंभीर मुद्दा न्यास के वर्ष 2015 से अब तक ऑडिट नहीं होने का उठाया गया है। महासभा का कहना है कि इतने लंबे समय तक ऑडिट नहीं होना न्यास की वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

सवाल यह भी है कि इस अवधि में न्यास की संपत्तियों से कितनी आय हुई, उसका उपयोग किन कार्यों में किया गया और वित्तीय लेन-देन का हिसाब-किताब किस स्तर पर रखा गया?

‘उपाध्यक्ष’ पद को लेकर भी विवाद

महासभा ने न्यास में ‘उपाध्यक्ष’ पद पर नियुक्ति को लेकर भी आपत्ति दर्ज कराई है। ज्ञापन में दावा किया गया है कि न्यास के नियमों में उपाध्यक्ष का पद स्वीकृत या सृजित नहीं है। इसके बावजूद एक व्यक्ति को उपाध्यक्ष नियुक्त किए जाने का आरोप लगाया गया है।

महासभा ने इस नियुक्ति और इससे जुड़े वित्तीय निर्णयों की भी जांच की मांग की है।

अब प्रशासन के सामने बड़ा सवाल—कौन करेगा जांच?

कृष्ण कुमार वैष्णव ने कलेक्टर से मांग की है कि पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए राजगामी संपदा न्यास की संपत्तियों का भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही वर्ष 2015 से अब तक के वित्तीय रिकॉर्ड, आय-व्यय, संपत्ति संबंधी दस्तावेज और सभी महत्वपूर्ण लेन-देन की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

अब देखना होगा कि राजगामी संपदा न्यास को लेकर लगाए गए इन गंभीर आरोपों पर जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है और लंबे समय से लंबित बताए जा रहे ऑडिट को लेकर क्या कार्रवाई होती है।

नोट: खबर में उल्लिखित अनियमितताओं और नियुक्ति संबंधी बातें महासभा द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित न्यास/पदाधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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