बड़ी खबर | जमीन सौदे में लाला यादव की सफाई—“धोखाधड़ी के आरोप निराधार, कोर्ट केस के कारण रुकी रजिस्ट्री”

addtext 09 10 01.18.57

48 डिसमिल जमीन का ₹2.5 करोड़ में हुआ था सौदा, ₹25 लाख एडवांस देने का दावा; बोले—“न्यायालयीन विवाद सुलझने के बाद पूरी राशि देकर करानी थी रजिस्ट्री”

राजनांदगांव। ग्राम पेंड्री स्थित जमीन सौदे को लेकर दर्ज धोखाधड़ी के मामले में आरोपी लाला यादव ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया है। यादव का कहना है कि यह मामला किसी तरह की धोखाधड़ी या जमीन हड़पने से जुड़ा नहीं है, बल्कि जमीन के एक हिस्से को लेकर सामने आए न्यायालयीन विवाद के कारण रजिस्ट्री की प्रक्रिया रोकनी पड़ी थी।

₹2.5 करोड़ में तय हुआ था जमीन का सौदा

लाला यादव के अनुसार, ग्राम पेंड्री में 48 डिसमिल जमीन का सौदा करीब ₹2.5 करोड़ में तय हुआ था। सौदे के तहत उन्होंने विक्रेता को ₹25 लाख एडवांस दिए थे। दोनों पक्षों के बीच विधिवत इकरारनामा भी निष्पादित किया गया था।

यादव का दावा है कि सौदे की शर्तों के अनुसार रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि संबंधित जमीन के मुख्य हिस्से को लेकर न्यायालय में प्रकरण लंबित है।

“विवादित जमीन की रजिस्ट्री कराना जोखिम भरा था”

यादव का कहना है कि न्यायालयीन विवाद लंबित रहने के दौरान जमीन की रजिस्ट्री कराना जोखिम भरा था। इसलिए उन्होंने विक्रेता से पहले अदालत में चल रहे विवाद का निराकरण कराने और उसके बाद शेष राशि का भुगतान कर रजिस्ट्री कराने की बात कही थी।

उन्होंने साफ किया कि जमीन हड़पने या विक्रेता के साथ धोखाधड़ी करने की उनकी कोई मंशा नहीं थी। उनका कहना है कि विवाद का समाधान होने के बाद वे सौदे की शेष राशि का भुगतान करने और रजिस्ट्री कराने के लिए तैयार थे।

🚨 पुलिस कार्रवाई पर भी उठाए सवाल

एफआईआर और पुलिस कार्रवाई को लेकर भी लाला यादव ने सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि जांच एजेंसी ने मामले के मूल दस्तावेज, इकरारनामे की शर्तें और जमीन से जुड़े न्यायालयीन विवाद का पर्याप्त अध्ययन किए बिना जल्दबाजी में कार्रवाई की।

यादव का कहना है कि यदि पूरे मामले के दस्तावेजों और घटनाक्रम की निष्पक्ष तरीके से जांच की जाए तो स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

दस्तावेजों के साथ जांच में सहयोग का दावा

लाला यादव ने कहा कि उनके पास इकरारनामा, एडवांस भुगतान के प्रमाण और अन्य वैधानिक दस्तावेज सुरक्षित हैं। उन्होंने जांच में पुलिस को पूरा सहयोग देने की बात कही है।

उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होने पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि विवाद का वास्तविक कारण क्या था और रजिस्ट्री क्यों रुकी।

अब जांच में सामने आएगा असली सच

एक ओर जहां जमीन सौदे को लेकर धोखाधड़ी के आरोपों में पुलिस कार्रवाई हुई है, वहीं आरोपी लाला यादव ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे न्यायालयीन विवाद के कारण उत्पन्न हुआ जमीन सौदे का विवाद बताया है।

अब पूरे मामले में इकरारनामा, एडवांस भुगतान, जमीन के दस्तावेज और लंबित न्यायालयीन प्रकरण की जांच के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी।

नोट: यह खबर आरोपी लाला यादव द्वारा दिए गए पक्ष/दावों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं हुई है। पुलिस या शिकायतकर्ता का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

Advertisement
Advertisement

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top