बड़ी खबर | खाद चोरी पर ग्रामीणों का अनोखा इंसाफ! यूरिया की बोरी कंधे पर बांधकर आरोपियों का गाजे-बाजे के साथ निकाला जुलूस

addtext 09 10 09.03.32

मैनपुर के झोलाराव गांव में चोरी के आरोपियों को ग्रामीणों ने पकड़कर दी अनोखी सजा, पुलिस को सौंपने के बजाय गांव में घुमाया

गरियाबंद। जिले के अंतिम छोर और ओडिशा सीमा से सटे मैनपुर ब्लॉक के ग्राम झोलाराव में खाद चोरी की एक घटना और उसके बाद ग्रामीणों की कार्रवाई पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों ने खाद चोरी के आरोप में दो युवकों को कथित तौर पर रंगेहाथ पकड़ लिया। इसके बाद पुलिस को सौंपने के बजाय ग्रामीणों ने दोनों के कंधों पर यूरिया की बोरियां बांधकर गाजे-बाजे के साथ पूरे गांव में जुलूस निकाल दिया।

बताया जा रहा है कि गांव के एक किसान के घर से यूरिया खाद की दो बोरियां चोरी हो गई थीं। चोरी का आरोप गांव के ही प्रभु और कृष्णा नामक दो युवकों पर लगाया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, दोनों युवक कथित तौर पर खाद की बोरियां लेकर उसे ठिकाने लगाने या बेचने की कोशिश में थे।

🔴 ग्रामीणों ने घेराबंदी कर पकड़ा

घटना की भनक कुछ ग्रामीणों को लगने के बाद उन्होंने दोनों युवकों की घेराबंदी की। ग्रामीणों का दावा है कि दोनों को चोरी की गई यूरिया की बोरियों के साथ पकड़ लिया गया। इसके बाद मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई।

ग्रामीणों के अनुसार पूछताछ के दौरान चोरी की बात सामने आने के बाद दोनों युवकों को कथित तौर पर गांव में ही सजा देने का फैसला किया गया।

🥁 कंधे पर यूरिया की बोरी, ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस

इसके बाद ग्रामीणों ने दोनों युवकों के कंधों पर उसी यूरिया की बोरियां रस्सी से बांध दीं, जिन्हें चोरी किए जाने का आरोप है। इतना ही नहीं, ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़े और गाजे-बाजे की व्यवस्था कर दोनों को पूरे गांव में पैदल घुमाया।

जुलूस के दौरान गांव के बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग भी घरों से बाहर निकलकर इस पूरे घटनाक्रम को देखते नजर आए। ग्रामीणों की इस कार्रवाई का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

⚠️ बड़ा सवाल—कानून हाथ में लेने का अधिकार किसे?

खाद चोरी के आरोपियों को पकड़ना और चोरी का सामान बरामद करना एक बात है, लेकिन किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से सजा देना और जुलूस निकालना कानून-व्यवस्था से जुड़े कई सवाल खड़े करता है।

अब सवाल यह भी है कि क्या ग्रामीणों द्वारा की गई यह कार्रवाई कानून के दायरे में थी? क्या आरोपियों को पुलिस के हवाले किया गया या नहीं? और यदि सार्वजनिक रूप से जुलूस निकाला गया, तो इस पूरे मामले पर पुलिस प्रशासन की क्या कार्रवाई होगी?

फिलहाल प्रभु और कृष्णा पर लगाए गए चोरी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले में पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

📌 सवाल बड़ा है:

खाद चोरी पर ग्रामीणों का ‘अनूठा इंसाफ’ या कानून को अपने हाथ में लेने की कोशिश?

मैनपुर के झोलाराव गांव की यह घटना अब सिर्फ खाद चोरी तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि कानून व्यवस्था और ग्रामीण न्याय व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर रही है।

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