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रायपुर – पशुपालन विभाग की पशु चिकित्सा एम्बुलेंस वाहन क्रमांक CG02AU1606 में डीजल की कथित हेराफेरी और वित्तीय अनियमितता को लेकर शिकायत सामने आई है। कर्तव्य न्याय भागीदारी आंदोलन भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने इस मामले में रायपुर कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक समेत राज्य और केंद्र स्तर के संबंधित अधिकारियों को शिकायत आवेदन सौंपकर निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

शिकायत में दावा किया गया है कि 4 सितंबर 2026 को करीब 11:20 बजे एम्बुलेंस के लिए उपलब्ध कराए गए डीजल में निर्धारित मात्रा की तुलना में करीब 20 प्रतिशत कमी पाई गई। शिकायतकर्ता ने उपलब्ध फोटो और वीडियो का हवाला देते हुए आरोपों की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को जांच से पहले दोषी नहीं माना जा रहा है और आरोपों की वास्तविकता सक्षम जांच के बाद ही सामने आएगी।

पेट्रोल पंप के CCTV और बिलों की जांच की मांग

शिकायतकर्ता के मुताबिक घटना से संबंधित दृश्य सामग्री में एम्बुलेंस के पास एक व्यक्ति के हाथ में ईंधन का डिब्बा दिखाई देता है। आवेदन में संबंधित चालक पर डीजल डिब्बे में लेने और अधिक राशि का बिल लेने का आरोप लगाए जाने का उल्लेख है। इन आरोपों की पुष्टि के लिए अंजनी/अंजलि फ्यूल स्टेशन के बिक्री रजिस्टर, डिजिटल रिकॉर्ड, बिल और भुगतान संबंधी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है।

इसके साथ ही 4 सितंबर को सुबह करीब 11:20 बजे के आसपास की CCTV फुटेज तत्काल सुरक्षित कराने की मांग की गई है, ताकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य समय के साथ डिलीट या ओवरराइट न हो जाएं।

GPS, लॉगबुक और डीजल खपत का होगा मिलान?

शिकायत में एम्बुलेंस के GPS रिकॉर्ड, लॉगबुक, डीजल पर्ची, स्टॉक रजिस्टर और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की मांग की गई है। साथ ही वाहन द्वारा तय किए गए वास्तविक किलोमीटर और इस्तेमाल किए गए डीजल की मात्रा का तकनीकी एवं वैज्ञानिक मिलान कराने की बात कही गई है।

शिकायतकर्ता ने यह भी मांग की है कि केवल 4 सितंबर की घटना तक जांच सीमित न रखी जाए, बल्कि पिछले छह महीने के दौरान एम्बुलेंस की डीजल खपत, किलोमीटर, बिल और भुगतान का विशेष ऑडिट कराया जाए। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कथित अनियमितता किसी एक दिन की थी या लंबे समय से ऐसा हो रहा था।

चालक से लेकर विभागीय अधिकारियों तक की भूमिका जांचने की मांग

आवेदन में चालक, वाहन प्रभारी, संबंधित विभागीय अधिकारियों और पेट्रोल पंप कर्मचारियों के बयान दर्ज करने की मांग की गई है। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की मिलीभगत, लापरवाही या संरक्षण सामने आता है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय करने का आग्रह किया गया है।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि यदि जांच में डीजल चोरी, सरकारी धन की हानि, फर्जी बिल, गलत रिकॉर्ड, मिलीभगत या अनुचित भुगतान प्रमाणित होता है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ FIR और विभागीय कार्रवाई की जाए। सरकारी धन की क्षति प्रमाणित होने पर नियमानुसार वसूली की मांग भी की गई है।

10 अधिकारियों को भेजी शिकायत

शिकायत आवेदन रायपुर कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, जिला पशु चिकित्सा सेवाएं, संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, संचालक पशुधन विकास विभाग, कृषि विकास एवं किसान कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तथा राज्य के संबंधित मंत्री के अलावा भारत सरकार के पशुपालन एवं डेयरी विभाग और केंद्रीय मंत्री को संबोधित किया गया है।

जांच के बाद ही साफ होगी आरोपों की सच्चाई

शिकायतकर्ता ने कहा है कि उपलब्ध फोटो-वीडियो और घटनाक्रम के आधार पर संदेह उत्पन्न हुआ है, लेकिन किसी व्यक्ति को जांच से पहले दोषी घोषित नहीं किया जा सकता। अब CCTV फुटेज, GPS डेटा, फ्यूल बिल, लॉगबुक और अन्य दस्तावेजों की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तव में डीजल की मात्रा में कोई हेराफेरी या वित्तीय अनियमितता हुई थी या नहीं।

शिकायतकर्ता ने पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध उच्चस्तरीय जांच कराने तथा जांच पूरी होने के बाद कार्रवाई की लिखित जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की है।

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