गौवंश की सेवा और किसानों की फसल सुरक्षा का अनोखा मॉडल! संबलपुर में 10 ग्रामीणों की दो टीमें संभाल रहीं जिम्मेदारी

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एक टीम जुटा रही चारा-पानी और दवाइयों की व्यवस्था, दूसरी टीम खेतों से आवारा मवेशियों को सुरक्षित हटाकर बचा रही फसल; ग्रामीणों ने प्रशासन से मांगा सहयोग

डोंडी लोहारा/संबलपुर। प्रदेश में आवारा गौवंश की समस्या और किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान के बीच डोंडी लोहारा क्षेत्र के ग्राम संबलपुर के ग्रामीणों ने सामुदायिक भागीदारी की ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है। ग्रामीणों ने गौ-सेवा और फसल सुरक्षा के लिए 10 लोगों की दो अलग-अलग टीमें बनाई हैं। एक टीम गौवंश की देखभाल कर रही है, जबकि दूसरी टीम किसानों की फसल को आवारा पशुओं से बचाने में जुटी है।

चंदा जुटाकर हो रही गौ-सेवा

संबलपुर के ग्रामीणों ने अपनी जिम्मेदारी खुद उठाते हुए पांच लोगों की एक टीम बनाई है। यह टीम गांव से चंदा एकत्र कर आवारा गौवंश के लिए चारा, पानी, दवाई और देखरेख की व्यवस्था करती है। संसाधनों की कमी के बावजूद ग्रामीण सामूहिक सहयोग से इस व्यवस्था को संचालित कर रहे हैं।

खेत में मवेशी दिखे तो तुरंत एक्शन

दूसरी पांच सदस्यीय टीम का काम किसानों की खड़ी फसल की सुरक्षा करना है। खेतों में आवारा मवेशियों के पहुंचने की सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंचती है और उन्हें सुरक्षित तरीके से खेत से बाहर निकालती है। इसके बाद मवेशियों को गौ-सेवा करने वाली टीम के हवाले कर दिया जाता है।

इस व्यवस्था से ग्रामीणों को दोहरा फायदा मिल रहा है। एक ओर गौवंश को भोजन-पानी और देखभाल मिल रही है, वहीं दूसरी ओर किसानों की मेहनत से तैयार फसल को नुकसान से बचाया जा रहा है।

प्रशासनिक सहयोग नहीं मिलने का आरोप

ग्रामीणों का कहना है कि गौवंश के संरक्षण और व्यवस्था के लिए उन्हें अभी तक प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया है। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय विधायक अनिला भेड़िया से भी गौ-सेवा और संरक्षण के लिए सहयोग की अपेक्षा जताई है।

ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन इस सामुदायिक पहल को सहयोग प्रदान करे और गौवंश के लिए चारा, पानी, उपचार, आश्रय तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था में मदद करे।

शिवशंकर सिंह ने पहुंचकर लिया जायजा

ग्रामीणों की इस पहल की जानकारी मिलने के बाद कर्तव्य न्याय भागीदारी आंदोलन के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ग्राम संबलपुर पहुंचे। उन्होंने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों द्वारा संचालित गौ-सेवा व्यवस्था का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से उनकी समस्याओं एवं जरूरतों की जानकारी ली।

ग्रामीणों ने शिवशंकर सिंह से प्रशासनिक स्तर पर सहयोग दिलाने की अपील की। इस पर उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि गौवंश की सेवा और संरक्षण के इस सामुदायिक प्रयास में वे उनके साथ खड़े रहेंगे और प्रशासनिक सहयोग दिलाने के लिए आवश्यक प्रयास करेंगे।

सिर्फ गौ-सेवा नहीं, किसान हित भी जुड़ा

संबलपुर के इस मॉडल की सबसे खास बात यह है कि ग्रामीणों ने गौ-सेवा और किसान हित को एक साथ जोड़ दिया है। आमतौर पर आवारा मवेशियों को लेकर जहां गांवों में विवाद की स्थिति बनती है, वहीं संबलपुर के ग्रामीणों ने समस्या के समाधान के लिए सामूहिक जिम्मेदारी का रास्ता अपनाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और समाज की ओर से आर्थिक एवं व्यवस्थागत सहयोग मिले, तो इस मॉडल को आसपास के अन्य गांवों में भी लागू किया जा सकता है।

गांवों के लिए बन सकता है मिसाल

संबलपुर के ग्रामीणों की यह पहल बताती है कि स्थानीय स्तर पर सामुदायिक भागीदारी के जरिए आवारा गौवंश, फसल नुकसान और गौ-सेवा जैसी समस्याओं का समाधान खोजा जा सकता है। अब ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी पहल को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक सहयोग देगा।

संबलपुर का संदेश साफ है—सामूहिक जिम्मेदारी से गौवंश की सेवा भी संभव है और किसानों की फसल की सुरक्षा भी।

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