
खसरा नंबर 289/114 से लेकर ₹1.65 लाख मासिक किराये तक कई बिंदु जांच के घेरे में, GST पंजीयन में लगाए गए दस्तावेजों की भी पड़ताल की उठी मांग
रायपुर। होटल एटमॉस्फेरिया से जुड़ी संपत्ति के कथित किरायानामे और GST पंजीयन को लेकर अब कई सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध दस्तावेजों और सामने आई जानकारी के आधार पर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। मामला खास तौर पर खसरा नंबर 289/114 के स्वामित्व, कथित किरायानामे की वैधता, ₹1.65 लाख प्रतिमाह किराये और GST पंजीयन के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों से जुड़ा बताया जा रहा है।
बताया जा रहा है कि होटल एटमॉस्फेरिया को किराये पर दिए जाने से संबंधित दस्तावेजों में खसरा नंबर 289/114 का उल्लेख है। वहीं उपलब्ध जानकारी के अनुसार उक्त भूमि राजस्व रिकॉर्ड में रामकिशन कलश के नाम दर्ज होने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में जांच का अहम बिंदु यह है कि यदि भूमि का स्वामित्व किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज है, तो संबंधित परिसर को होटल को किराये पर देने का अधिकार किस आधार पर प्राप्त हुआ?
कथित किरायानामे की वैधता पर उठे सवाल
मामले में श्रेष्ठा तिवारी द्वारा होटल एटमॉस्फेरिया को परिसर किराये पर दिए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में यह जांच जरूरी बताई जा रही है कि उनके पास संपत्ति किराये पर देने का वैध अधिकार किस दस्तावेज के आधार पर था।
जांच की मांग करने वालों का कहना है कि खसरा नंबर 289/114 के वर्तमान और पुराने राजस्व रिकॉर्ड, भूमि के स्वामित्व एवं कब्जे की स्थिति तथा होटल के पक्ष में तैयार किए गए किरायानामे की मूल प्रति का सत्यापन कराया जाना चाहिए।
इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि किरायानामा किसने तैयार किया, किसके हस्ताक्षर हैं, गवाह कौन हैं और संपत्ति को किराये पर देने के अधिकार के समर्थन में कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे।
₹1.65 लाख मासिक किराये का दावा, बैंक रिकॉर्ड से हो सत्यापन
मामले में संपत्ति का किराया करीब ₹1.65 लाख प्रतिमाह होने की बात भी सामने आई है। हालांकि इस राशि की वास्तविकता की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।
यदि वास्तव में इतनी राशि किराये के रूप में प्राप्त हुई है तो इसकी पुष्टि बैंक खातों, किराये की रसीदों, लेखा पुस्तकों, आयकर रिटर्न और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड से की जा सकती है। इसलिए जांच एजेंसियों से इन दस्तावेजों की पड़ताल कराने की मांग की गई है।
GST पंजीयन कैसे हुआ? दस्तावेजों की जांच की मांग
मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू होटल एटमॉस्फेरिया से संबंधित GST पंजीयन बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार कथित किरायानामे के आधार पर विनोद कुमार अग्रवाल द्वारा GST पंजीयन कराया गया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि GST पंजीयन के दौरान कौन-कौन से दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे? संबंधित परिसर पर व्यवसाय संचालित करने के अधिकार को किस दस्तावेज के आधार पर स्वीकार किया गया? क्या स्थल सत्यापन हुआ था और यदि हुआ तो निरीक्षण रिपोर्ट में क्या दर्ज किया गया?
इन तमाम बिंदुओं की GST पंजीयन फाइल के आधार पर जांच की मांग की गई है।
GST विभाग में पदस्थापना को लेकर भी जांच की मांग
मामले में यह आरोप भी सामने आया है कि जनसंपर्क विभाग/संवाद के अपर संचालक संजीव तिवारी की पत्नी सरिता तिवारी GST कार्यालय, रायपुर में पदस्थ हैं। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि किए जाने की आवश्यकता है।
सिर्फ किसी अधिकारी के रिश्तेदार का संबंधित विभाग में पदस्थ होना अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। लेकिन यदि संबंधित GST पंजीयन की प्रक्रिया उसी कार्यालय से हुई है, तो फाइल किस अधिकारी ने संसाधित की, स्थल निरीक्षण किसने किया और दस्तावेजों को किस आधार पर स्वीकार किया गया, इसकी निष्पक्ष जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
यदि जांच में किसी तरह के गलत दस्तावेज, कूटरचित दस्तावेज अथवा पद के अनुचित प्रभाव के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तभी संबंधित व्यक्तियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
होटल संचालन के लाइसेंस भी जांच के दायरे में लाने की मांग
मामले में केवल किरायानामा और GST पंजीयन ही नहीं, बल्कि होटल संचालन से जुड़े अन्य दस्तावेजों की भी जांच की मांग उठी है।
इसके तहत नगर निगम, पर्यटन विभाग, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, अग्निशमन विभाग, आबकारी विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों से प्राप्त लाइसेंस, अनुमति और NOC की जांच कराने की मांग की गई है।
साथ ही यह भी देखा जाना जरूरी बताया गया है कि होटल संचालन के लिए विभिन्न विभागों में जमा दस्तावेजों में संपत्ति के स्वामित्व या किराये के अधिकार को साबित करने के लिए कौन से कागजात लगाए गए थे।
दस्तावेजों की जांच से खुलेगा पूरा राज
फिलहाल पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि खसरा नंबर 289/114 की वास्तविक स्वामित्व स्थिति क्या है और यदि राजस्व रिकॉर्ड में जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम दर्ज है तो होटल एटमॉस्फेरिया को परिसर किराये पर देने का वैध अधिकार किस आधार पर प्राप्त हुआ?
इसके साथ ही कथित किरायानामा वास्तविक और वैध है या नहीं, GST पंजीयन में कौन से दस्तावेज लगाए गए, स्थल निरीक्षण हुआ या नहीं और ₹1.65 लाख प्रतिमाह किराये का दावा कितना सही है—इन सवालों का जवाब संबंधित मूल दस्तावेजों की जांच से ही सामने आ सकता है।
ऐसे में मूल राजस्व रिकॉर्ड, किरायानामा, GST पंजीयन फाइल, स्थल निरीक्षण रिपोर्ट, बैंकिंग एवं आयकर रिकॉर्ड और होटल संचालन से जुड़े लाइसेंस की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग जोर पकड़ रही है।

🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
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📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
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