75 दिनों तक गूंजेगी बस्तर की परंपरा: कल से शुरू होगा विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा

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मां दंतेश्वरी के दरबार में पाट जात्रा पूजा विधान से होगा शुभारंभ, अक्टूबर में होंगी ऐतिहासिक रथ परिक्रमा, मुरिया दरबार और मावली परघाव जैसी भव्य रस्में

रायपुर -जगदलपुर – छत्तीसगढ़ की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और लोक परंपराओं की पहचान विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व का आगाज बुधवार, 12 अगस्त को होने जा रहा है। हरेली अमावस्या के पावन अवसर पर जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी मंदिर प्रांगण में पाट जात्रा पूजा विधान के साथ 75 दिवसीय ऐतिहासिक पर्व की शुरुआत होगी।
बस्तर दशहरा अपने अनूठे स्वरूप के कारण देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। खास बात यह है कि यहां दशहरा भगवान राम की रावण पर विजय के रूप में नहीं, बल्कि मां दंतेश्वरी की आराधना और बस्तर की सदियों पुरानी जनजातीय परंपराओं के रूप में मनाया जाता है।
🪓 पाट जात्रा से शुरू होगी रथ निर्माण की तैयारी
पाट जात्रा पूजा विधान के दौरान पारंपरिक रूप से मांझी-चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन, पुजारी, पटेल, नाईक-पाईक और सेवादार शामिल होंगे। रथ निर्माण से जुड़ी पारंपरिक औजार निर्माण की रस्म भी इसी अवसर पर निभाई जाएगी।
बस्तर दशहरा समिति ने सभी सेवादारों, ग्रामीणों और गणमान्य नागरिकों से पाट जात्रा पूजा विधान में शामिल होने की अपील की है।
📅 जानिए कब-कब होंगी प्रमुख रस्में
तारीख
प्रमुख आयोजन
12 अगस्त
पाट जात्रा पूजा विधान से शुभारंभ
24 सितंबर
डेरी गड़ाई पूजा विधान
10 अक्टूबर
काछनगादी पूजा विधान
11 अक्टूबर
कलश स्थापना पूजा विधान
12 अक्टूबर
जोगी बिठाई पूजा विधान
13–18 अक्टूबर
नवरात्रि पूजा एवं रथ परिक्रमा
18 अक्टूबर
बेल पूजा विधान
19 अक्टूबर
महाअष्टमी एवं निशा जात्रा
20 अक्टूबर
कुंवारी पूजा, जोगी उठाई एवं मावली परघाव
21 अक्टूबर
भीतर रैनी एवं रथ परिक्रमा
22 अक्टूबर
बाहर रैनी एवं रथ परिक्रमा
23 अक्टूबर
काछन जात्रा एवं ऐतिहासिक मुरिया दरबार
24 अक्टूबर
कुटुम्ब जात्रा एवं ग्राम्य देवी-देवताओं की विदाई
27 अक्टूबर
मावली माता की डोली की विदाई और औपचारिक समापन
🚩 भीतर रैनी और बाहर रैनी होंगे मुख्य आकर्षण
बस्तर दशहरा की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में भीतर रैनी और बाहर रैनी का विशेष महत्व है। इन अवसरों पर विशाल रथ की परिक्रमा और पारंपरिक रस्में देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक पहुंचते हैं।
वहीं 23 अक्टूबर को ऐतिहासिक मुरिया दरबार आयोजित होगा, जिसमें बस्तर की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और जनजातीय संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
🌿 संस्कृति, आस्था और परंपरा का अनूठा संगम
मां दंतेश्वरी को समर्पित यह 75 दिवसीय पर्व बस्तर की आस्था, आदिवासी संस्कृति, लोक परंपरा और सामुदायिक सहभागिता का अद्भुत संगम है। सदियों पुरानी रस्में आज भी उसी श्रद्धा और परंपरा के साथ निभाई जाती हैं।
12 अगस्त से शुरू होकर 27 अक्टूबर तक चलने वाला यह पर्व एक बार फिर बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को देश-दुनिया के सामने जीवंत करेगा।

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