कलेक्टर फेल या सिस्टम?’ विकास कार्यों के श्रेय को लेकर छिड़ी बहस, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

addtext 08 05 01.22.18

भूमि पूजन से लोकार्पण तक श्रेय की राजनीति पर सवाल, डोंगरगढ़–कटघोरा रेलवे लाइन का मुद्दा भी बहस के केंद्र में

रायपुर -राजनांदगांव -छत्तीसगढ़ में विकास कार्यों के श्रेय और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं भारतीय किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने कहा कि “कलेक्टर फेल या सिस्टम?” अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही का गंभीर विषय बन चुका है।
शिवशंकर सिंह का कहना है कि विकास कार्यों की स्वीकृति, निविदा, निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी जैसी जिम्मेदारियां प्रशासन और संबंधित विभागों की होती हैं। इसके बावजूद भूमि पूजन और लोकार्पण के समय अधिकांश राजनीतिक श्रेय जनप्रतिनिधियों को मिलता है, जबकि योजनाओं में देरी या गुणवत्ता संबंधी शिकायतों की जिम्मेदारी प्रशासन पर डाल दी जाती है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को यह जानने का अधिकार है कि किसी भी विकास कार्य की स्वीकृति किस विभाग ने दी, बजट किसने जारी किया, निर्माण किस एजेंसी ने कराया और उसकी निगरानी किस अधिकारी ने की। केवल शिलापट्ट पर नाम दर्ज होने या फीता काटने से विकास कार्यों का वास्तविक मूल्यांकन नहीं किया जा सकता।
शिवशंकर सिंह ने डोंगरगढ़–कटघोरा रेलवे लाइन परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना भी श्रेय लेने की राजनीति का शिकार रही है। उनके अनुसार, जनता को भ्रमित करने के बजाय विकास कार्यों की पूरी प्रक्रिया और जिम्मेदार एजेंसियों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि प्रत्येक विकास कार्य पर संबंधित विभाग, जिम्मेदार अधिकारी, स्वीकृत राशि, कार्य की समय-सीमा और प्रगति का विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य किया जाए। इससे जनता तय कर सकेगी कि सफलता का वास्तविक श्रेय किसे मिलना चाहिए और विफलता की जवाबदेही किसकी है।
हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि इस विषय पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह बयान मुख्य रूप से शिवशंकर सिंह और उनके संगठन का पक्ष है। प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक श्रेय को लेकर यह बहस आने वाले समय में और तेज होने की संभावना है।

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