मलेरिया प्रभावित सुदूर गांव पह

बीमार बेटे को गोद में लेकर डोंगी का इंतजार करती मां की तस्वीर के बाद हरकत में आया प्रशासन, प्रभावित गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश

addtext 08 04 05.41.20

बीमार बेटे को गोद में लेकर डोंगी का इंतजार करती मां की तस्वीर के बाद हरकत में आया प्रशासन, प्रभावित गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश

पखांजूर – कांकेर जिले के कोयलीबेड़ा विकासखंड के सुदूर सीताराम क्षेत्र में मलेरिया के बढ़ते प्रकोप और इलाज के लिए ग्रामीणों को उफनती नदी पार करने की मजबूरी की खबर सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। बीमार बेटे को गोद में लेकर बेचाघाट नदी किनारे डोंगी का इंतजार करती एक मां की मार्मिक तस्वीर ने पूरे प्रदेश का ध्यान इस क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की ओर खींचा। इसके बाद कलेक्टर स्वयं मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम के साथ बेचाघाट नदी पैदल पार कर सुदूर गांवों का दौरा किया। गांव पहुंचकर उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद किया, उनकी समस्याएं सुनीं और मलेरिया से प्रभावित परिवारों की स्थिति की जानकारी ली।
ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग बुखार और मलेरिया की चपेट में हैं। समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलने के कारण मरीजों को इलाज के लिए उफनती नदी पार कर छोटेबेठिया तक जाना पड़ता है, जिससे गंभीर मरीजों की परेशानी और बढ़ जाती है।
दौरे के दौरान कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग को प्रभावित गांवों में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाने, घर-घर सर्वे करने, सभी संदिग्ध मरीजों की जांच सुनिश्चित करने, पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता बनाए रखने और मलेरिया नियंत्रण के लिए प्रभावी अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसी भी मरीज को इलाज के अभाव में परेशानी न हो और दूरस्थ गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं तत्काल पहुंचाई जाएं।
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले एक मां की अपने तेज बुखार से पीड़ित मासूम बेटे को गोद में लेकर उफनती नदी किनारे डोंगी का इंतजार करती तस्वीर सामने आई थी। इस तस्वीर ने दूरस्थ आदिवासी अंचल में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। खबर के बाद प्रशासन की सक्रियता से ग्रामीणों में राहत की उम्मीद जगी है।
अब देखना होगा कि प्रशासन के निर्देशों का जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाई देता है और सुदूर आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कब तक मिल पाती हैं।

Advertisement
Advertisement

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top