छत्तीसगढ़ के 914 एमबीबीएस इंटर्न अनिश्चितकालीन हड़ताल पर, स्टाइपेंड 30 हजार करने की मांग; राजनांदगांव के 128 डॉक्टर भी आंदोलन में शामिल

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ओपीडी और वार्ड सेवाओं का बहिष्कार, फिलहाल केवल इमरजेंसी सेवाएं जारी; मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन होगा और उग्र

राजनांदगांव – स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ के सभी शासकीय मेडिकल कॉलेजों के 914 एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टर मंगलवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इस प्रदेशव्यापी आंदोलन में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय, राजनांदगांव के 128 इंटर्न डॉक्टर भी शामिल हैं। मेडिकल कॉलेज परिसर में इंटर्न डॉक्टर शांतिपूर्ण धरने पर बैठकर सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं।
इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान में उन्हें 15,900 रुपये मासिक स्टाइपेंड दिया जाता है, जो अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है। उन्होंने सरकार से स्टाइपेंड बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रतिमाह किए जाने की मांग की है। उनका आरोप है कि कई बार ज्ञापन और नोटिस देने के बावजूद अब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके चलते उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
हड़ताल के कारण इंटर्न डॉक्टरों ने ओपीडी और वार्ड सेवाओं का बहिष्कार कर दिया है, जिससे अस्पताल की नियमित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। हालांकि मरीजों को राहत देने के लिए फिलहाल केवल आपातकालीन सेवाएं जारी रखी गई हैं। इंटर्न डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द वार्ता कर उनकी मांगों का समाधान नहीं किया, तो वे आपातकालीन सेवाओं का भी बहिष्कार करने पर विचार करेंगे।
इस आंदोलन का असर केवल राजनांदगांव तक सीमित नहीं है। डोंगरगढ़, खैरागढ़, छुईखदान, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, छुरिया, डोंगरगांव सहित आसपास के क्षेत्रों से इलाज के लिए आने वाले मरीजों को भी इसका सामना करना पड़ सकता है।
आंदोलन को आईएमए मेडिकल स्टूडेंट्स नेटवर्क (आईएमए-एमएसएन), आईएमए और आईएमए-जेडीएन का नैतिक समर्थन मिला है। आईएमए-एमएसएन छत्तीसगढ़ के राज्य संयोजक शाहदिल खुसरू ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग से इंटर्न डॉक्टरों के साथ जल्द चर्चा कर समाधान निकालने की अपील की है।
इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाएं बाधित करना नहीं, बल्कि अपनी लंबे समय से लंबित मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे ही सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेगी, वे तत्काल आंदोलन समाप्त कर मरीजों की सेवा में लौट आएंगे।
फिलहाल पूरे प्रदेश की नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आने वाले दिनों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

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