क्या VVIP जिले में पत्रकारों को काटकर फेंके जाने का इंतजार कर रही है खाकी?

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​राजनांदगांव (संस्कारधानी) | विशेष विश्लेषणात्मक रिपोर्ट
रिपोर्टर: लाल टोपी राजू सोनी
​सुशासन का ढोल पीटने वाली सरकार और जिले के हुक्मरानों को कान खोलकर सुन लेना चाहिए— संस्कारधानी राजनांदगांव में लोकतंत्र की हत्या का खाका खींचा जा चुका है! संपादक छत्तीसगढ़ की सुनवाई औऱ सी न्यूज़ के ब्यूरो चीफ व 18 वर्षों से कलम के सिपाही तुलसी गौतम के घर बीती रात जो खौफनाक मंजर रचा गया, वह सिर्फ एक पत्रकार पर हमला नहीं, बल्कि सीधे-सीधे प्रदेश की कानून-व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है!
​युवक भूपेंद्र साहू हाथों में धारदार हथियार लिए दबंगों ने रात के सन्नाटे में घर के दरवाजे उखाड़ने और तोड़फोड़ का जो नंगा नाच नाचा, उसने दिखा दिया कि अपराधियों के सिर पर किसका हाथ है। किस्मत अच्छी थी कि अंतिम सांसें गिनने से पहले पत्रकार और उनका परिवार बच गया, वरना आज शहर में एक और पत्रकार की मय्यत उठ रही होती!
​🚨 सीधे सवाल: माननीय विधानसभा अध्यक्ष, सांसद और नेता प्रतिपक्ष से!
​विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह जी (राजनांदगांव विधायक) से:
​जिस संस्कारधानी से आप लगातार प्रतिनिधित्व करते हैं और जहां से सत्ता का केंद्र चलता है, क्या वहीं कलम चलाने की सजा मौत तय की जा रही है? आपके ही क्षेत्र में 18 साल से निष्पक्ष पत्रकारिता कर रहा व्यक्ति अपनी पत्नी और मासूम बच्चे को लेकर दहशत में रो रहा है—क्या यही सुशासन की गारंटी है?
​सांसद संतोष पांडेय जी से:
​जनता और लोकतंत्र के पहरेदारों पर जब खुलेआम हथियार लहराए जा रहे हैं, तब आपकी खामोशी का राज क्या है? क्या संसद तक राजनांदगांव के पत्रकारों का खून बहने के बाद ही आवाज पहुंचेगी?
​नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत जी से:
​विपक्ष में बैठकर तमाशा देखने के बजाय क्या आप इस मामले को विधानसभा से लेकर सड़क तक उठाएंगे? या पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा केवल चुनाव में वोट बटोरने का जरिया मात्र है?
​🚓 पुलिस प्रशासन का ‘मजाक’ और खाकी की मेहरबानी
​रात में ही सूचना मिलने के बावजूद सुबह पुलिस ने अपराधियों पर जो मामूली धाराएं चिपकाकर इतिश्री की, वह यह साफ उजागर करता है कि खाकी अपराधियों की ‘रक्षक’ बनी बैठी है!
​अरे साहिब! जिन पर जानलेवा हमले और बलवे का मुकदमा दर्ज होना चाहिए था, वे आज उसी मोहल्ले में सीना तानकर घूम रहे हैं!
​पीड़ित पत्रकार की पत्नी आंगनवाड़ी की नौकरी छोड़ने पर मजबूर है, मासूम बच्चा स्कूल जाने से डर रहा है—अगर इस परिवार को कुछ भी होता है, तो उसकी पूरी जवाबदेही राजनांदगांव पुलिस और प्रशासन की होगी!
​💥 कब बनेगा पत्रकार सुरक्षा कानून?
​15 साल से प्रदेश का पत्रकार छाती पीट-पीटकर ‘पत्रकार सुरक्षा कानून’ मांग रहा है।
​न वेतन की गारंटी,
​न पेंशन का ठिकाना,
​और अब न जान-माल की कोई सुरक्षा!
​क्या पत्रकारों का काम सिर्फ नेताओं के भाषणों को चमकाना और उनकी चाटुकारिता करना रह गया है? जब कोई सच दिखाता है, तो उस पर हमला करवाकर पूरे तंत्र को तमाशाबीन बना दिया जाता है!
​लाल टोपी राजू सोनी का सीधा संदेश:
“यह कलम किसी के रहमों-कर्म पर नहीं चलती। यदि आरोपी पर तत्काल संगीन व गैर-जमानती धाराएं नहीं लगाई गईं और पीड़ित पत्रकार तुलसी गौतम के परिवार को सुरक्षा नहीं दी गई, तो यह आग सिर्फ राजनांदगांव में नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ की सड़कों पर दिखेगी!”

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