⚠️ राजनांदगांव जिला अस्पताल बेपटरी: संलग्नीकरण समाप्ति के बाद इमरजेंसी व्यवस्था चरमराई, मरीज निजी अस्पतालों की ओर मजबूर

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ड्रेसर, नर्स और स्टाफ की भारी कमी से जिला अस्पताल की आपातकालीन सेवाएं प्रभावित, शहर के बीच स्थित अस्पताल में तत्काल इलाज की व्यवस्था पर संकट


विशेष रिपोर्ट | शशिकांत सनसनी | राजनांदगांव | SANSANI TIMES

राजनांदगांव का शासकीय जिला अस्पताल इन दिनों गंभीर अव्यवस्था और स्टाफ की भारी कमी के कारण पूरी तरह से बेपटरी होता नजर आ रहा है। शासन द्वारा जारी संलग्नीकरण समाप्ति के आदेश के बाद सभी संलग्न कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थान पर वापस भेज दिया गया, जिसके बाद जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर सीधा और गंभीर असर पड़ा है।

शहर के मध्य स्थित यह जिला अस्पताल लंबे समय से आम नागरिकों के लिए प्राथमिक और त्वरित उपचार का मुख्य केंद्र रहा है। सड़क दुर्घटना, झगड़ा, अचानक स्वास्थ्य संकट और अन्य आपातकालीन मामलों में लोग सबसे पहले इसी अस्पताल का रुख करते थे। लेकिन अब स्टाफ की भारी कमी के कारण यहां की आपातकालीन सेवाएं लगभग चरमराने की स्थिति में पहुंच चुकी हैं।

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इमरजेंसी सेवाओं पर सबसे बड़ा संकट

जिला अस्पताल के अधिकृत सेटअप के अनुसार यहां कम से कम 5 ड्रेसर (घाव उपचार कर्मी) का होना अनिवार्य है, ताकि 24 घंटे चलने वाली आपातकालीन सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो सकें। लेकिन संलग्नीकरण समाप्त होने के बाद अब अस्पताल में केवल 2 ड्रेसर ही कार्यरत हैं।

स्वास्थ्य नियमों के अनुसार इमरजेंसी ड्यूटी में हर शिफ्ट में एक डॉक्टर, एक नर्स, एक ड्रेसर और एक वार्ड बॉय की उपलब्धता जरूरी होती है। ऐसे में केवल दो ड्रेसर पूरे दिन की तीन शिफ्टों में माइनर ऑपरेशन थिएटर (Minor OT) और आपातकालीन सेवाओं को कैसे संभालेंगे—यह अब बड़ा सवाल बन चुका है।

स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई मामलों में नर्स और वार्ड बॉय ही कटे-फटे अंगों में टांके लगाने को मजबूर हैं, जो न केवल चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि मरीजों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।


मेडिकल कॉलेज अस्पताल की दूरी बन रही जानलेवा

जिला अस्पताल शहर के बीचों-बीच स्थित है, इसलिए छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं और आपातकालीन मामलों में यहां तत्काल पहुंचना आसान होता था। लेकिन अब स्टाफ की कमी के चलते मरीजों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया जा रहा है, जो लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित है।

दुर्घटना में घायल मरीजों के लिए यह दूरी कई बार जानलेवा साबित हो सकती है। गंभीर अवस्था में समय पर इलाज न मिल पाने के कारण लोग अब मजबूरी में निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां इलाज महंगा होने के बावजूद तत्काल सुविधा उपलब्ध हो जाती है।


नर्सों की कमी ने बढ़ाई परेशानी

स्थिति केवल ड्रेसरों तक सीमित नहीं है। जिला अस्पताल में पहले से ही सेटअप के अनुसार नर्सों की संख्या कम थी। ऊपर से जिन नर्सों को जिला अस्पताल से अन्य अस्पतालों में संलग्न किया गया था, उन्हें वापस नहीं भेजा जा रहा है।

इस कारण अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ की स्थिति और भी खराब हो गई है। मरीजों की देखभाल, वार्ड प्रबंधन, इमरजेंसी सपोर्ट और ऑपरेशन पूर्व-पश्चात सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।


विधानसभा अध्यक्ष के क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

राजनांदगांव प्रदेश के वरिष्ठ नेता और विधानसभा अध्यक्ष Dr. Raman Singh का क्षेत्र माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र के जिला अस्पताल की यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही है।

स्थानीय नागरिकों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि यदि विधानसभा अध्यक्ष के क्षेत्र के जिला अस्पताल की यह स्थिति है, तो प्रदेश के अन्य जिलों की हालत का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।


बड़ा सवाल

क्या शासन केवल आदेश जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहा है?
क्या संलग्नीकरण समाप्त करने से पहले जिला अस्पतालों की वास्तविक जरूरतों का आकलन नहीं किया गया?
क्या आम जनता की जान से बड़ा कोई प्रशासनिक आदेश हो सकता है?

राजनांदगांव जिला अस्पताल की मौजूदा स्थिति इन सभी सवालों को और अधिक गंभीर बना रही है।


SANSANI TIMES की मांग

स्वास्थ्य विभाग को तत्काल प्रभाव से जिला अस्पताल में पर्याप्त ड्रेसर, नर्स और आवश्यक स्टाफ की नियुक्ति करनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों को समय पर सुरक्षित और बेहतर उपचार मिल सके।

क्योंकि अस्पताल में देरी… कई बार सीधे जिंदगी और मौत के बीच का अंतर बन जाती है।

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