संजीव तिवारी पर शिकंजा कसने की मांग तेज! हाईकोर्ट पहुंचा मामला, पद से हटाने और CBI जांच की उठी मांग

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PMWA ने सौंपा ज्ञापन, जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग; प्रशासनिक गलियारों में बढ़ी हलचल

जगदलपुर/रायपुर। जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक संजीव तिवारी के खिलाफ शिकायतों, कथित भ्रष्टाचार एवं अन्य गंभीर आरोपों को लेकर कार्रवाई की मांग अब तेज होती दिखाई दे रही है। मामला अब उच्च न्यायालय तक पहुंच गया है, जहां जिला बस्तर के जगदलपुर से माननीय मुख्य न्यायाधीश, उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर को ज्ञापन भेजकर संजीव तिवारी को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने तथा उनके खिलाफ प्राप्त शिकायतों की उच्च स्तरीय एवं केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की गई है।

जानकारी के अनुसार, प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन (PMWA) ने इस मामले को गंभीरता से उठाते हुए संजीव तिवारी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन का आरोप है कि जनसंपर्क विभाग में कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से विभिन्न शिकायतें सामने आ रही हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

12 जून को भेजा गया था पहला पत्र

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि छत्तीसगढ़ प्रेस एवं मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के संभागीय अध्यक्ष रवि दुबे एवं अन्य पदाधिकारियों द्वारा 12 जून 2026 को इस संबंध में एक विस्तृत पत्र प्रेषित किया गया था। उक्त पत्र में संजीव तिवारी के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों और आरोपों का उल्लेख करते हुए जांच की मांग की गई थी।

बताया जा रहा है कि इस पत्र के आधार पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कार्यालय, बस्तर द्वारा मामले को आवश्यक कार्रवाई के लिए अग्रेषित भी किया गया है। इसके बाद अब मामले को उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाए जाने से इसकी गंभीरता और बढ़ गई है।

जांच पूरी होने तक पद से हटाने की मांग

PMWA द्वारा भेजे गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक संजीव तिवारी के खिलाफ प्राप्त शिकायतों, कथित भ्रष्टाचार एवं अन्य गंभीर आरोपों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। साथ ही संगठन ने यह भी मांग उठाई है कि जांच प्रक्रिया प्रभावित न हो, इसके लिए जांच पूरी होने तक उन्हें उनके वर्तमान पद से हटाया जाए।

संगठन का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, वहीं यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

हाईकोर्ट तक पहुंचने से बढ़ी राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल

मामला अब उच्च न्यायालय तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। विभिन्न पत्रकार संगठनों और सामाजिक संगठनों की भी इस मामले पर नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में संबंधित विभागों और प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

PMWA ने निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई

प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। संगठन ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि जनता और मीडिया जगत के बीच किसी प्रकार की शंका न रहे।

आधिकारिक पक्ष का इंतजार

इस मामले में समाचार लिखे जाने तक जनसंपर्क विभाग अथवा संजीव तिवारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। यदि उनका पक्ष प्राप्त होता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

नोट: संजीव तिवारी के खिलाफ लगाए गए आरोप शिकायतकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र अथवा न्यायिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

Sansani Times Special Report
“आरोपों से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंचे मामले ने प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में नई बहस छेड़ दी है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि जांच और प्रशासनिक कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ती है।”

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