हमर क्लीनिक या भ्रष्टाचार का क्लीनिक? 25 लाख का स्वास्थ्य केंद्र तीन साल से बंद, हैंडपंप हटाने को लेकर पार्षद पर आरोप

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राजनांदगांव। नगर निगम क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 49 में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर बनाए गए 6 बिस्तर उप स्वास्थ्य केंद्र और हमर क्लीनिक को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। करीब 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह भवन कथित तौर पर पिछले तीन से चार वर्षों से बंद पड़ा हुआ है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि भवन निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन आज तक यहां स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं।

तीन साल बाद भी नहीं मिली स्वास्थ्य सुविधा

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022-23 में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा शहरी हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर एवं हमर क्लीनिक योजना के तहत वार्ड क्रमांक 49 में 6 बिस्तर उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन बनने के बाद से आज तक यहां न डॉक्टरों की नियुक्ति हुई और न ही स्वास्थ्य कर्मियों की तैनाती की गई। परिणामस्वरूप करोड़ों की स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ क्षेत्रवासियों तक नहीं पहुंच पाया।

हैंडपंप हटाने को लेकर विवाद

मामले का सबसे चर्चित पहलू आंगनबाड़ी परिसर में लगे पुराने हैंडपंप को लेकर सामने आया है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि लगभग 30 वर्ष पुराने हैंडपंप को हटाकर उसकी जगह सबमर्सिबल पंप लगाया गया और पानी की व्यवस्था स्वास्थ्य केंद्र के लिए उपयोग में ली गई।

ग्रामीणों का दावा है कि उस समय उन्हें आश्वासन दिया गया था कि निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद हैंडपंप को पुनः स्थापित कर दिया जाएगा, लेकिन तीन वर्ष बीत जाने के बावजूद हैंडपंप वापस नहीं लगाया गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार जब इस संबंध में सवाल उठाए गए तो कथित तौर पर कहा गया कि हैंडपंप के पार्ट्स नगर निगम में जमा कर दिए गए हैं और अब मोटर नहीं हटाई जाएगी।

खर्चों पर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों ने निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितताओं का भी आरोप लगाया है। ग्रामीणों के अनुसार दस्तावेजों में कई ऐसे खर्च दर्शाए गए हैं जिनकी वास्तविकता की जांच आवश्यक है।

बताया जा रहा है कि दस्तावेजों में—

  • बोर खनन के नाम पर लगभग 96,913 रुपये खर्च दर्शाए गए हैं।
  • लोकार्पण साइन बोर्ड के लिए लगभग 15,000 रुपये का भुगतान दिखाया गया है।
  • हमर क्लीनिक के बाहर सेट निर्माण के नाम पर 53,000 रुपये से अधिक की राशि खर्च बताई गई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि इन मदों में वास्तविक कार्य और भुगतान की जांच कराई जानी चाहिए।

‘दिखावटी खुदाई’ का भी आरोप

स्थानीय लोगों का दावा है कि मामला चर्चा में आने के बाद कुछ दिन पूर्व हमर क्लीनिक के पीछे बोर खनन का कार्य दिखाने के लिए सीमित खुदाई की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि थोड़ी खुदाई कर मिट्टी वहीं छोड़ दी गई ताकि लोगों को यह प्रतीत हो कि वहां पहले बोरिंग का कार्य किया गया था।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

पार्षद और अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि पूरे मामले में संबंधित अधिकारियों, ठेकेदार और वार्ड पार्षद की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से निर्माण कार्य, खर्च की गई राशि तथा हैंडपंप हटाने के मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

साथ ही उन्होंने बंद पड़े स्वास्थ्य केंद्र को जल्द शुरू कर क्षेत्रवासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग भी की है।

प्रशासनिक जांच की मांग तेज

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए बनाई गई योजनाएं यदि समय पर शुरू नहीं होतीं तो सरकारी धन खर्च होने के बावजूद आम जनता को उसका लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में वार्ड क्रमांक 49 का यह मामला अब सिर्फ एक बंद स्वास्थ्य केंद्र का नहीं बल्कि सरकारी योजनाओं की निगरानी और जवाबदेही का भी प्रश्न बन गया है।

(नोट: खबर में शामिल आरोप स्थानीय नागरिकों द्वारा लगाए गए हैं। संबंधित पार्षद, नगर निगम और संबंधित विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)

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