जगदलपुर | Sansani Times Desk
छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। कभी नक्सली संगठन का हिस्सा रहे दो आत्मसमर्पित पूर्व नक्सली जोड़ों ने अब हिंसा का रास्ता छोड़कर सामाजिक जीवन की नई शुरुआत की है। मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना के तहत जगदलपुर के टाउन हॉल में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में इन दोनों जोड़ों ने विधिवत सात फेरे लेकर अपने रिश्ते को सामाजिक मान्यता दिलाई।
सोमवार को आयोजित इस सामूहिक विवाह समारोह में कुल 17 जोड़ों ने विवाह बंधन में बंधकर नए जीवन की शुरुआत की। इनमें दो ऐसे जोड़े भी शामिल रहे, जो पहले नक्सली संगठन से जुड़े थे और आत्मसमर्पण के बाद सरकार की पुनर्वास नीति के तहत मुख्यधारा में लौटे हैं।
नक्सली संगठन में नहीं मिलती सामाजिक विवाह की मान्यता
जानकारी के अनुसार, नक्सली संगठनों में पारंपरिक सामाजिक विवाह की व्यवस्था नहीं होती। संगठन के भीतर साथी अपनी इच्छा से साथ रहते हैं, लेकिन परिवार, समाज और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह करने का अवसर नहीं मिल पाता। ऐसे में आत्मसमर्पण के बाद इन युवाओं को पहली बार सामाजिक और कानूनी रूप से अपने रिश्ते को मान्यता दिलाने का मौका मिला।
मुख्यमंत्री कन्यादान विवाह योजना और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति ने इन पूर्व नक्सलियों को न सिर्फ नई पहचान दी, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी प्रदान किया है।
2018 में नक्सली संगठन से जुड़ा था मसीराम सोढ़ी
विवाह समारोह में शामिल पूर्व नक्सली दूल्हे मसीराम सोढ़ी ने बताया कि वह वर्ष 2018 से नक्सली संगठन में सक्रिय था। लंबे समय तक संगठन के साथ रहने के बाद उसने वर्ष 2025 में आत्मसमर्पण कर सरकार की पुनर्वास योजना का लाभ लेना शुरू किया।
मसीराम ने बताया कि पुनर्वास केंद्र में रहने के दौरान उसकी मुलाकात अपनी जीवनसाथी से हुई। दोनों के बीच आपसी समझ और विश्वास बढ़ा, जिसके बाद उन्होंने विवाह करने का निर्णय लिया। अब दोनों सामाजिक जीवन में नई शुरुआत कर भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
पुलिस ने बताया मुख्यधारा में वापसी का बड़ा संदेश
पुलिस अधिकारियों ने इस पहल को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति और पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे उदाहरण जंगलों में सक्रिय अन्य नक्सलियों को भी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रेरित करेंगे।
अधिकारियों के मुताबिक, सरकार की पुनर्वास नीति का उद्देश्य केवल आत्मसमर्पण करवाना नहीं, बल्कि लोगों को समाज में सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित करना भी है। सामूहिक विवाह जैसे आयोजन इसी प्रयास का हिस्सा हैं।
नई पहचान, नई उम्मीद
जगदलपुर में हुए इस सामूहिक विवाह समारोह ने यह साबित कर दिया कि सही अवसर और सहयोग मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपने अतीत को पीछे छोड़कर नई राह चुन सकता है। बंदूक छोड़कर सात फेरे लेने वाले इन पूर्व नक्सली जोड़ों की कहानी अब बस्तर में बदलाव, विश्वास और नई उम्मीद का प्रतीक बनकर उभर रही है।
Sansani Times शांति, पुनर्वास और सामाजिक बदलाव की यह कहानी बताती है कि मुख्यधारा में लौटने का रास्ता हमेशा खुला रहता है।






🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
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📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
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