जिला खेल एवं युवक कल्याण विभाग में RTI कानून की अनदेखी! नकद शुल्क लेने से इंकार पर शिकायत, कार्रवाई की मांग

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राजनांदगांव। जिले के खेल एवं युवक कल्याण विभाग में सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 के नियमों की कथित अनदेखी का मामला सामने आया है। विभाग पर आरोप है कि सूचना मांगने पहुंचे एक आवेदक से निर्धारित 10 रुपये आवेदन शुल्क नकद लेने से इंकार कर दिया गया, जिसके बाद मामले ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं और आरटीआई कानून के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, आवेदक ने जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं सहायक संचालक, खेल एवं युवक कल्याण विभाग, राजनांदगांव को लिखित शिकायत सौंपते हुए बताया कि वह सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जानकारी प्राप्त करने के लिए नियमानुसार आवेदन जमा करने विभागीय कार्यालय पहुंचे थे। आवेदन के साथ उन्होंने निर्धारित 10 रुपये शुल्क नकद जमा कराने का प्रयास किया, लेकिन कार्यालय कर्मचारियों ने नकद राशि स्वीकार करने से इंकार करते हुए आवेदन वापस लौटा दिया।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि विभागीय कर्मचारियों ने यह कहकर आवेदन लेने से मना कर दिया कि कार्यालय में नकद शुल्क स्वीकार नहीं किया जाता। जबकि आरटीआई अधिनियम और राज्य सूचना आयोग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन शुल्क नकद सहित अन्य माध्यमों से स्वीकार किया जा सकता है।

नियमों का हवाला देकर उठाए सवाल

शिकायत में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 6 और राज्य शासन द्वारा निर्धारित नियमों के तहत कोई भी नागरिक 10 रुपये आवेदन शुल्क नकद, पोस्टल ऑर्डर, डिमांड ड्राफ्ट अथवा बैंकर्स चेक के माध्यम से जमा कर सकता है। यदि शुल्क नकद लिया जाता है तो संबंधित कार्यालय द्वारा विधिवत रसीद जारी करना अनिवार्य होता है।

ऐसे में विभाग द्वारा आवेदन स्वीकार करने से इंकार करना न केवल आरटीआई कानून की भावना के विपरीत माना जा रहा है, बल्कि इसे प्रशासनिक लापरवाही और आम नागरिकों के अधिकारों के हनन के रूप में भी देखा जा रहा है।

कार्रवाई और सूचना उपलब्ध कराने की मांग

आवेदक ने अपनी शिकायत में मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई करने तथा आरटीआई आवेदन नियमानुसार स्वीकार कर मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने की मांग की है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि सरकारी कार्यालय ही सूचना के अधिकार कानून का पालन नहीं करेंगे, तो आम नागरिकों के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाएगा।

विभागीय कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

मामला सामने आने के बाद जिला खेल एवं युवक कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों का कहना है कि सूचना का अधिकार अधिनियम पारदर्शी शासन व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है और सरकारी विभागों की जिम्मेदारी है कि वे नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करते हुए नियमों का पालन सुनिश्चित करें।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है।

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