निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक बना मौत का कुंआ: दम घुटने से 6 मजदूरों की दर्दनाक मौत, गांव में पसरा मातम

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कालाहांडी से बड़ी खबर | रेस्क्यू के दौरान बढ़ा हादसा, जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी बनी मौत की वजह

Kalahandi से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। जिले के मदनपुर-रामपुर क्षेत्र अंतर्गत गौड़ कार्लाखुंटा गांव में निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक के अंदर काम करने के दौरान दम घुटने से 6 लोगों की मौत हो गई। इस हादसे ने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है।

जानकारी के मुताबिक गांव में एक निर्माणाधीन सेप्टिक टैंक का काम चल रहा था। इसी दौरान कुछ मजदूर टैंक के भीतर उतरकर निर्माण कार्य कर रहे थे। बताया जा रहा है कि टैंक के अंदर अचानक जहरीली गैस फैल गई और ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम हो गया, जिससे अंदर मौजूद मजदूर बेहोश होने लगे।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले एक मजदूर की तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उसे बचाने के लिए दूसरा व्यक्ति टैंक में उतरा। लेकिन कुछ ही देर में वह भी बेहोश हो गया। इसके बाद एक-एक कर अन्य लोग भी बचाव के लिए टैंक के अंदर उतरते गए और देखते ही देखते पूरा रेस्क्यू अभियान ही बड़े हादसे में बदल गया।

घटना की सूचना मिलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से सभी छह लोगों को टैंक से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद सभी को मृत घोषित कर दिया।

इस दर्दनाक हादसे के बाद पूरे गौड़ कार्लाखुंटा गांव में मातम पसरा हुआ है। मृतकों के परिजन रो-रोकर बदहवास हैं। गांव में शोक और गुस्से का माहौल देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी को हादसे की बड़ी वजह बताया है।

घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन, पुलिस और राहत टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सेप्टिक टैंक के अंदर जहरीली गैस और पर्याप्त सुरक्षा इंतजामों की कमी को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है।

वहीं Mohan Charan Majhi ने इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिवार को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

विशेषज्ञों के अनुसार सेप्टिक टैंक, सीवर और बंद स्थानों में काम करने के दौरान मीथेन, हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी जहरीली गैसें जानलेवा साबित हो सकती हैं। ऐसे कार्यों में सुरक्षा उपकरण, ऑक्सीजन सपोर्ट और गैस जांच उपकरण अनिवार्य होने चाहिए, लेकिन कई बार लापरवाही के चलते ऐसे हादसे सामने आते हैं।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। इस हादसे ने एक बार फिर मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण कार्यों में बरती जा रही लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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