इलाज में लापरवाही का आरोप: प्रसूता की मौत के बाद नेशनल हाईवे पर चक्काजाम, जांच टीम गठित

addtext 05 26 06.08.02

देवभोग में प्रसूता की मौत पर बवाल, अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप

गरियाबंद। देवभोग स्थित देवमाता हॉस्पिटल में इलाज के दौरान एक प्रसूता की मौत के बाद इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिला। मृतिका के परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए नेशनल हाईवे 130-C पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। घटना के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति निर्मित हो गई और सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।

मिली जानकारी के अनुसार मृतिका की पहचान भानुमति मांझी (लगभग 30 वर्ष) के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि प्रसव के दौरान तबीयत बिगड़ने पर उन्हें देवभोग के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौत की खबर मिलते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई और देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण और समाज के लोग अस्पताल परिसर में जमा हो गए।

“समय पर इलाज मिलता तो बच सकती थी जान” — परिजन

मृतिका के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा समय पर उचित उपचार नहीं दिया गया। उनका कहना है कि प्रसूता की हालत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन डॉक्टरों और स्टाफ ने गंभीरता नहीं दिखाई। परिजनों का दावा है कि यदि समय रहते सही इलाज मिलता तो भानुमति मांझी की जान बचाई जा सकती थी।

घटना से नाराज लोगों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। आक्रोशित ग्रामीणों ने बाद में शव को नेशनल हाईवे 130-C पर रखकर चक्काजाम शुरू कर दिया, जिससे आवागमन पूरी तरह प्रभावित हो गया।

हाईवे पर घंटों जाम, पुलिस-प्रशासन मौके पर पहुंचा

चक्काजाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। काफी देर तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद तहसीलदार अजय चंद्रवंशी की मध्यस्थता में मामला शांत हुआ।

प्रशासन की ओर से परिजनों को निष्पक्ष जांच और दोषियों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद आंदोलन समाप्त कराया गया और यातायात बहाल हो सका।

कलेक्टर ने गठित की जांच टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दे दिए हैं। जानकारी के अनुसार कलेक्टर द्वारा जिला स्तरीय जांच टीम गठित की गई है, जो पूरे मामले की जांच करेगी। वहीं प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

आदिवासी समाज में आक्रोश

घटना के बाद आदिवासी समाज में भी भारी नाराजगी देखी जा रही है। समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब है और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

आदिवासी नेता कन्हैया मांझी ने कहा कि यदि मामले में दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आगे बड़ा आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए।

बड़ा सवाल — क्या हुई मेडिकल लापरवाही?

फिलहाल प्रशासन जांच की बात कह रहा है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में इलाज में लापरवाही हुई? यदि अस्पताल प्रबंधन की गलती सामने आती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब तक होगी? ग्रामीणों और परिजनों की नजर अब प्रशासनिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई है।


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