गरियाबंद टाइगर रिजर्व में बड़ा खुलासा: ISRO की सैटेलाइट इमेजरी से 1 लाख पेड़ों की अवैध कटाई, 166 आरोपी रडार पर

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गरियाबंद | विशेष रिपोर्ट | शशिकांत सनसनी

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से पर्यावरण और वन संरक्षण को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। गरियाबंद टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में बड़े पैमाने पर अवैध कटाई और अतिक्रमण का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। इस पूरे मामले ने वन विभाग से लेकर प्रशासनिक हलकों तक हड़कंप मचा दिया है।

सबसे बड़ी बात यह है कि इस अवैध गतिविधि का खुलासा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation) की सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन सर्वे के माध्यम से हुआ है। आधुनिक तकनीक के जरिए सामने आई यह रिपोर्ट अब बड़े वन माफिया नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है।

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1 लाख पेड़ों की कटाई, 106 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में करीब 1 लाख पेड़ों की अवैध कटाई की गई है। इसके साथ ही लगभग 106 हेक्टेयर भूमि पर अवैध अतिक्रमण भी पाया गया है। यह क्षेत्र संरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण यहां किसी भी प्रकार की मानवीय गतिविधि सख्ती से प्रतिबंधित होती है।

इसके बावजूद इतने बड़े स्तर पर जंगल की कटाई और जमीन पर कब्जा होना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

CARTOSAT सैटेलाइट से खुला पूरा खेल

जांच में यह भी सामने आया है कि Indian Space Research Organisation के CARTOSAT सैटेलाइट की वर्ष 2008, 2010, 2012 और 2022 की इमेजरी का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया। इन अलग-अलग वर्षों की तस्वीरों की तुलना से यह स्पष्ट हुआ कि समय के साथ धीरे-धीरे सुनियोजित तरीके से जंगल की कटाई और भूमि कब्जा किया गया।

ड्रोन सर्वे ने भी इन तथ्यों की पुष्टि की, जिससे पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।

166 आरोपी जेल जा सकते हैं

वन विभाग की जांच में अब तक 166 लोगों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। सूत्रों के अनुसार, इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है और जल्द ही कई आरोपियों की गिरफ्तारी संभव मानी जा रही है।

यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो ये सभी आरोपी जेल भेजे जा सकते हैं।

उपनिदेशक वरुण जैन के निर्देश पर कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए उपनिदेशक वरुण जैन के निर्देश पर विभागीय टीम ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा कार्रवाई शुरू कर दी है। वन विभाग और संबंधित एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई हैं।

अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में बड़े स्तर पर कार्रवाई हो सकती है और कई प्रभावशाली नाम भी सामने आ सकते हैं।

सवाल बड़ा है—जंगल बचेंगे कैसे?

टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील और संरक्षित क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर अवैध कटाई और अतिक्रमण केवल वन अपराध नहीं, बल्कि पर्यावरणीय सुरक्षा पर सीधा हमला है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कोर एरिया तक सुरक्षित नहीं है, तो जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा आखिर कैसे सुनिश्चित होगी?

Sansani Times इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, नए खुलासे सामने आने की पूरी संभावना है।

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