अरबों की सरकारी जमीन पर चला बुलडोजर: अवैध प्लाटिंग और मैरिज पैलेस ध्वस्त, बड़े कारोबारी पर प्रशासन का शिकंजा

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राजनांदगांव | सन्सनी टाइम्स

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में प्रशासन ने सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए करीब 100 एकड़ जमीन को कब्जामुक्त कराया है। कलेक्टर जितेंद्र यादव के निर्देश पर चली इस बड़ी कार्रवाई में अवैध प्लाटिंग, मैरिज पैलेस और अन्य व्यावसायिक निर्माणों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन की इस कार्रवाई से जिलेभर में हड़कंप मच गया है, खासकर उन लोगों में जिन्होंने सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कर कारोबार खड़ा कर रखा है।

बड़े कारोबारी पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला दुर्ग के एक बड़े व्यवसायी से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है, जिस पर लंबे समय से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने के आरोप थे। प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बिना वैधानिक अनुमति के सरकारी भूमि पर प्लाटिंग कर भूखंड बेचे जा रहे हैं और वहां बड़े स्तर पर निर्माण कार्य भी किए गए हैं।

जांच के बाद जब रिकॉर्ड खंगाले गए तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इसके बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए राजस्व, नगर निगम, पुलिस और अन्य विभागों की संयुक्त टीम गठित कर कार्रवाई शुरू की।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चला अभियान

सुबह से ही प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचा। कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस जवान तैनात किए गए थे। जेसीबी और बुलडोजर की मदद से अवैध रूप से विकसित प्लाटिंग को हटाया गया, वहीं करोड़ों रुपए की लागत से बने मैरिज पैलेस को भी ध्वस्त कर दिया गया।

अधिकारियों के अनुसार संबंधित निर्माण बिना वैध अनुमति और भूमि उपयोग परिवर्तन के किए गए थे। सरकारी जमीन का व्यवसायिक उपयोग कर शासन को भारी राजस्व क्षति पहुंचाई जा रही थी।

अरबों रुपए की जमीन पर था कब्जा

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि जिस जमीन को कब्जामुक्त कराया गया है उसकी बाजार कीमत अरबों रुपए आंकी जा रही है। लंबे समय से इस जमीन का उपयोग निजी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। आरोप है कि अवैध प्लाटिंग के जरिए भोले-भाले लोगों को जमीन बेचने का काम भी किया जा रहा था।

कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर मौजूद रहे। कई लोगों ने प्रशासन की इस कार्रवाई का समर्थन करते हुए कहा कि सरकारी जमीनों पर कब्जे के कारण आम लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है।

दस्तावेजों की भी होगी जांच

प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि केवल निर्माण हटाने तक कार्रवाई सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अब जमीन से जुड़े दस्तावेजों, रजिस्ट्री, अनुमति और राजस्व रिकॉर्ड की भी गहन जांच की जाएगी। यदि किसी स्तर पर अधिकारियों या अन्य लोगों की मिलीभगत सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार प्रशासन अब जिलेभर में सरकारी जमीनों की सूची तैयार कर रहा है, जहां अवैध कब्जे या प्लाटिंग की शिकायतें मिली हैं। आने वाले दिनों में कई और बड़े अभियान चलाए जा सकते हैं।

कलेक्टर का सख्त संदेश

कलेक्टर जितेंद्र यादव ने स्पष्ट कहा है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि शासन की जमीन जनता की संपत्ति है और उस पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने आम लोगों से अपील की कि जमीन खरीदने से पहले सभी दस्तावेजों, भूमि स्वामित्व, नक्शा और प्रशासनिक अनुमति की पूरी जांच जरूर करें, ताकि भविष्य में किसी तरह की कानूनी परेशानी का सामना न करना पड़े।

जिलेभर में मचा हड़कंप

राजनांदगांव में हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद अवैध कॉलोनाइजरों, कब्जाधारियों और बिना अनुमति प्लाटिंग करने वालों में डर का माहौल है। प्रशासन की इस कार्रवाई को जिले में अवैध कब्जों के खिलाफ बड़े अभियान की शुरुआत माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह लगातार कार्रवाई जारी रही तो सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध कब्जों पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।

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