गरियाबंद में बाघ शिकार जांच पर बवाल: “थर्ड डिग्री” के आरोपों से घिरा वन विभाग, उठे इंसानियत पर सवाल

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उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की जांच अब खुद जांच के घेरे में

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले स्थित उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व में बाघ शिकार मामले की जांच अब नया विवाद खड़ा करती नजर आ रही है। वन विभाग जहां बाघ शिकार के आरोपियों तक पहुंचने के लिए लगातार कार्रवाई कर रहा है, वहीं अब विभाग पर ही “थर्ड डिग्री” देने जैसे गंभीर आरोप लगने लगे हैं।

ओडिशा के नुआपड़ा निवासी जालंधर बगर्ती और उसके परिवार ने आरोप लगाया है कि वन विभाग ने गलत पहचान के आधार पर उसे पूछताछ के नाम पर उठाया और पूरी रात कथित रूप से प्रताड़ित किया। इस घटना के बाद ग्रामीणों और स्थानीय समाजसेवियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।


“हिंगोल” समझकर उठा ले गई टीम?

परिवार का कहना है कि वन विभाग की टीम जालंधर बगर्ती को “हिंगोल” नामक संदिग्ध समझकर पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई थी। आरोप है कि रातभर उसे वन विभाग कार्यालय में रखा गया और वहां उसके साथ मारपीट की गई।

जालंधर ने दावा किया कि पूछताछ के दौरान दो लोग उसके हाथ पकड़ते थे, जबकि तीसरा व्यक्ति डंडे से उसकी पिटाई करता था।

सुबह जब उसे छोड़ा गया, तब उसके शरीर पर सूजन, काले निशान और चलने में तकलीफ साफ दिखाई दे रही थी। परिवार का आरोप है कि यह सिर्फ पूछताछ नहीं, बल्कि अमानवीय प्रताड़ना थी।


वायरल वीडियो ने बढ़ाई हलचल

इस पूरे मामले को लेकर एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में जालंधर खुद कथित मारपीट और प्रताड़ना की बात कहते नजर आ रहा है।

वीडियो सामने आने के बाद गांव में लोगों का गुस्सा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति आरोपी है, तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए, न कि दबाव और हिंसा का सहारा लिया जाए।


वन विभाग ने आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर वन विभाग के अधिकारी वरुण कुमार जैन ने सभी आरोपों से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि मुख्य आरोपियों के बयान और पहचान के आधार पर ही जालंधर को पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

उन्होंने दावा किया कि पूछताछ के दौरान किसी प्रकार की मारपीट नहीं हुई और मेडिकल जांच यानी एमएलसी रिपोर्ट भी सामान्य आई है।

वन विभाग की ओर से यह भी कहा गया कि पूछताछ के दौरान जालंधर को “माजा” और “पतंजलि बिस्किट” दिए गए थे।


ग्रामीणों का सवाल: “फिर शरीर पर निशान कैसे?”

वन विभाग के दावों के बावजूद ग्रामीण कई सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि कोई मारपीट नहीं हुई, तो जालंधर के शरीर पर सूजन और काले निशान कैसे आए?

परिवार का कहना है कि यदि उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत थे, तो उसे अदालत में पेश किया जाना चाहिए था। बिना कानूनी प्रक्रिया के कथित दबाव बनाना कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।


आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय समाजसेवी सौदागर साहू ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषी वनकर्मियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो वन विभाग कार्यालय का घेराव कर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

उनका कहना है कि वन्यजीव संरक्षण जरूरी है, लेकिन उसके नाम पर किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अमानवीय व्यवहार स्वीकार नहीं किया जा सकता।


बाघ शिकार केस से जुड़ा है मामला

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में जहर देकर बाघ के शिकार की साजिश का खुलासा हुआ था। इस मामले में छह लोगों को पकड़ा गया था।

उसी जांच के सिलसिले में वन विभाग की टीम ओडिशा के नुआपड़ा क्षेत्र पहुंची थी, जहां से जालंधर बगर्ती को पूछताछ के लिए लाया गया।


अब सबसे बड़ा सवाल…

बाघों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण बेहद जरूरी है। लेकिन इस पूरे विवाद ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—

“क्या बाघ बचाने की लड़ाई में इंसानियत घायल हो रही है?”


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