दूषित पानी से मवेशी बीमार, शिवनाथ नदी प्रदूषण पर बढ़ा विवाद

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🟥 Sansani Times | News Report

📍 राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ | विशेष संवाददाता

राजनांदगांव जिले में पर्यावरण प्रदूषण को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। शिवनाथ नदी में कथित रूप से औद्योगिक इकाइयों द्वारा छोड़े जा रहे दूषित पानी से आसपास के गांवों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस प्रदूषण के कारण मवेशी बीमार हो रहे हैं और पानी का उपयोग असुरक्षित हो गया है।


क्या है पूरा मामला?

अर्जुनी क्षेत्र के सुखरी, बरसनटोला और अन्य निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि झींका स्थित धनलक्ष्मी पेपर मिल द्वारा बिना उपचार के गंदा पानी सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है। इससे नदी का पानी न केवल दूषित हो गया है, बल्कि भूजल स्तर पर भी इसका असर पड़ रहा है।


जनप्रतिनिधि ने उठाई आवाज

जिला पंचायत सदस्य विभा साहू ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए बताया कि लगभग दो महीने पहले संबंधित कंपनियों को इस समस्या से अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही प्रदूषण रोकने के लिए उचित व्यवस्था नहीं की गई, तो इस मामले की शिकायत उच्च स्तर पर की जाएगी।


ग्रामीणों में आक्रोश

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स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी का पानी अब पीने योग्य नहीं रहा। मवेशियों के बीमार होने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। साथ ही जलजनित बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है।


कंपनी का पक्ष

ढुल्स पेट फूड प्राइवेट लिमिटेड ने ग्राम पंचायत सुखरी को दिए जवाब में कहा है कि कंपनी ने तत्काल प्रभाव से दूषित पानी को नाली में बहाने की प्रक्रिया रोक दी है। कंपनी ने भविष्य में प्रदूषण न करने का आश्वासन भी दिया है और वर्षा जल निकासी के लिए पंचायत से सहयोग मांगा है।


विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह का औद्योगिक प्रदूषण जल स्रोतों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है। इसका असर न केवल मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है, बल्कि कृषि, पशुपालन और पूरे पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित करता है।


प्रशासन पर बढ़ा दबाव

मामले के सामने आने के बाद प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। ग्रामीण अब ठोस समाधान की मांग कर रहे हैं और इस मुद्दे पर जल्द हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं।


निष्कर्ष

राजनांदगांव में उभरता यह मामला केवल स्थानीय समस्या नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा बन चुका है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इसके दूरगामी परिणाम सामने आ सकते हैं।


🔴 Sansani Times | सच के साथ

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