शासकीय दफ्तर में नशे में मिला सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी, मचा हड़कंप

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महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय में ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में धुत्त मिला कर्मचारी, जांच शुरू

शशिकांत देवांगन | सनसनी टाइम्स | राजनांदगांव (छत्तीसगढ़)

राजनांदगांव के महिला एवं बाल विकास विभाग कार्यालय में सोमवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी राधेश्याम ठाकुर ड्यूटी के दौरान शराब के नशे में धुत्त पाया गया। बताया जा रहा है कि कर्मचारी की हालत इतनी खराब थी कि वह ठीक से खड़ा तक नहीं हो पा रहा था और कार्यालय परिसर में ही कुर्सी पर सो गया, जिससे पूरे कार्यालय का कामकाज प्रभावित हो गया।

कार्यालय में मचा हड़कंप, कामकाज हुआ प्रभावित

प्रत्यक्षदर्शियों और विभागीय सूत्रों के अनुसार, राधेश्याम ठाकुर सुबह कार्यालय पहुंचे, लेकिन उनकी हालत सामान्य नहीं थी। शराब के अत्यधिक नशे के कारण वे न तो ठीक से बातचीत कर पा रहे थे और न ही अपने नियमित कार्यों का निर्वहन कर पा रहे थे।

स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब उन्होंने सहकर्मियों के साथ बहस शुरू कर दी। कर्मचारियों ने पहले उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन जब मामला नियंत्रण से बाहर होने लगा, तब इसकी सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई।

कुछ ही देर बाद संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे और कर्मचारी की स्थिति देखकर हैरान रह गए। बताया जा रहा है कि कर्मचारी अपनी सीट पर ही सो गया था, जिससे विभागीय कार्य पूरी तरह बाधित हो गया।

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आम नागरिकों को भी हुई परेशानी

महिला एवं बाल विकास विभाग में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आम नागरिक अपने कार्यों के लिए पहुंचते हैं। इस घटना के कारण कई लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा और आवश्यक कार्य समय पर नहीं हो सके।

कार्यालय पहुंचे लोगों ने इस लापरवाही पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सरकारी दफ्तरों में इस प्रकार की घटनाएं प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाती हैं। लोगों का कहना है कि यदि जिम्मेदार कर्मचारी ही इस तरह ड्यूटी के दौरान नशे में पाए जाएंगे, तो आम जनता का भरोसा कैसे कायम रहेगा।

विभागीय जांच शुरू, अनुशासनहीनता मानकर कार्रवाई की तैयारी

मामले को गंभीरता से लेते हुए विभागीय अधिकारियों ने संबंधित कर्मचारी के खिलाफ जांच प्रारंभ कर दी है। प्रारंभिक स्तर पर इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय प्रतिवेदन तैयार किया जा रहा है और जांच रिपोर्ट के आधार पर निलंबन अथवा अन्य कठोर प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है।

अधिकारियों का कहना है कि शासकीय सेवा में इस प्रकार की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल

यह घटना केवल एक कर्मचारी की व्यक्तिगत लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी कार्यालयों में कार्य संस्कृति और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।

स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि दोषी कर्मचारी के खिलाफ उदाहरणात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में कोई भी शासकीय कर्मचारी ड्यूटी के दौरान ऐसी हरकत करने का साहस न कर सके।

जनता की मांग—हो सख्त कार्रवाई

स्थानीय लोगों का स्पष्ट कहना है कि सरकारी दफ्तरों में अनुशासन और जवाबदेही सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि ऐसे मामलों में केवल औपचारिक जांच कर मामला दबा दिया जाता है, तो इससे गलत संदेश जाएगा।

अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है—क्या यह मामला सिर्फ जांच तक सीमित रहेगा, या दोषी कर्मचारी पर वास्तव में कोई सख्त कदम उठाया जाएगा।


सनसनी टाइम्स की नजर इस पूरे मामले पर बनी हुई है।

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