आरटीआई के खुलासे से हड़कंप! आरी डोंगरी माइंस में CSR के 28.94 करोड़ के खर्च पर उठे सवाल

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आरटीआई के खुलासे से हड़कंप! आरी डोंगरी माइंस में CSR के 28.94 करोड़ के खर्च पर उठे सवाल
CSR के 28.94 करोड़ पर बड़ा सवाल! कागजों में करोड़ों खर्च, जमीन पर ग्रामीण बेहाल?”

कागजों में करोड़ों खर्च, लेकिन माइंस प्रभावित गांवों में लाल पानी और बदहाल सुविधाओं की शिकायत; 8.81 करोड़ की सड़क, 5.64 करोड़ स्वास्थ्य-एम्बुलेंस और 53.51 लाख के डायग्नोस्टिक सेंटर खर्च पर जवाब मांग रहे ग्रामीण
भानुप्रतापपुर – आरी डोंगरी माइंस क्षेत्र में CSR फंड के खर्च को लेकर आरटीआई से सामने आए आंकड़ों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपलब्ध आरटीआई जानकारी के अनुसार वर्ष 2009 से 2023 के बीच अलग-अलग मदों में कुल 28.94 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। अब सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद माइंस प्रभावित गांवों में मूलभूत सुविधाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर शिकायतें क्यों बनी हुई हैं?
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि माइंस प्रभावित क्षेत्रों में कई जगह हैंडपंपों से लाल रंग का पानी निकल रहा है और खेती प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। ऐसे में CSR मद से हुए खर्च और जमीन पर हुए काम के बीच वास्तविक स्थिति जानने के लिए स्वतंत्र जांच की मांग उठ रही है।
8.81 करोड़ की सड़क और रिटेनिंग वॉल पर सवाल
आरटीआई से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक माइंस क्षेत्र में करीब 2 किलोमीटर सीसी रोड और रिटेनिंग वॉल पर लगभग 8.81 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का उल्लेख है। शिकायतकर्ताओं का सवाल है कि CSR की राशि से किए गए इस निर्माण का वास्तविक लाभ माइंस प्रभावित ग्रामीणों को कितना मिला?
मांग उठ रही है कि संबंधित निर्माण कार्य का तकनीकी परीक्षण, मौके का सत्यापन और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराई जाए।
डायग्नोस्टिक सेंटर: 32.33 लाख निर्माण, एक साल में 53.51 लाख संचालन खर्च!
भानुप्रतापपुर के डायग्नोस्टिक सेंटर को लेकर भी आरटीआई के आंकड़े चर्चा में हैं। जानकारी के अनुसार सेंटर के भवन निर्माण में करीब 32.33 लाख रुपये खर्च हुए, जबकि वर्ष 2023 में इसके संचालन पर 53.51 लाख रुपये खर्च दर्शाया गया है।
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि सेंटर में बोर्ड पर कई तरह की जांचों का उल्लेख होने के बावजूद मरीजों को अपेक्षित संख्या में जांच सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने की शिकायत है। ऐसे में सवाल है कि संचालन पर खर्च हुई राशि के अनुपात में मरीजों को वास्तविक स्वास्थ्य सुविधा कितनी मिली?
स्वास्थ्य और एम्बुलेंस पर 5.64 करोड़, फिर भी ग्रामीण परेशान!
आरटीआई के अनुसार वर्ष 2009 से 2023 के बीच स्वास्थ्य सेवाओं और एम्बुलेंस से संबंधित मद में करीब 5.64 करोड़ रुपये खर्च किए गए। इसके बावजूद माइंस प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीणों द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
अब ग्रामीण यह जानना चाहते हैं कि इस राशि से कितनी एम्बुलेंस संचालित हुईं, कितने मरीजों को सेवा मिली और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च का वास्तविक लाभ किन क्षेत्रों तक पहुंचा।
शिक्षकों के वेतन पर हर साल 12 से 14 लाख का खर्च
CSR के तहत शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक शिक्षकों के वेतन पर प्रतिवर्ष करीब 12 से 14 लाख रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इसके बावजूद स्कूलों की व्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आता।
अधिकारी ही निगरानीकर्ता या ठेकेदार? जांच की मांग
सबसे गंभीर आरोप CSR कार्यों की निगरानी और क्रियान्वयन को लेकर लगाए जा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि माइंस प्रबंधन के कुछ जिम्मेदार अधिकारी ही विभिन्न कार्यों की प्रक्रिया में प्रभावी भूमिका निभाते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यही वजह है कि पूरे मामले में जिला प्रशासन द्वारा स्वतंत्र जांच, कार्यों का भौतिक सत्यापन, भुगतान रिकॉर्ड की जांच और CSR राशि के उपयोग का ऑडिट कराने की मांग जोर पकड़ रही है।
बड़ा सवाल: 28.94 करोड़ खर्च, फिर जमीन पर असर कितना?
आरटीआई में सामने आए करोड़ों के आंकड़ों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि CSR फंड से खर्च की गई 28.94 करोड़ रुपये की राशि का वास्तविक लाभ माइंस प्रभावित जनता तक कितना पहुंचा?
क्या निर्माण कार्य वास्तव में उसी उद्देश्य के लिए हुए जिसके लिए CSR राशि स्वीकृत हुई थी?
क्या खर्च किए गए प्रत्येक रुपये का मौके पर सत्यापन हुआ?
क्या स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल जैसी सुविधाओं का स्वतंत्र मूल्यांकन कराया गया?
इन सवालों के जवाब अब गोदावरी माइंस प्रबंधन और जिला प्रशासन से मांगे जा रहे हैं।
नोट: खबर में उल्लेखित आरोप और दावे शिकायतकर्ताओं/उपलब्ध आरटीआई जानकारी पर आधारित हैं। संबंधित विभाग अथवा माइंस प्रबंधन का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जायेगा

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