गरियाबंद में सिस्टम की नाकामी! उफनती नदी में ट्यूब के सहारे मरीज को कराया पार, 9 करोड़ की स्वीकृति के बाद भी पुल का इंतजार

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गरियाबंद- जिले के वनांचल क्षेत्र से सिस्टम की बदहाली और विकास के दावों की पोल खोलती तस्वीर सामने आई है। जंगल धवलपुर के आश्रित ग्राम जरंडीह के ग्रामीण आज भी जान जोखिम में डालकर उफनती बाकड़ी पैरी नदी को पार करने को मजबूर हैं। बारिश के बीच नदी में तेज बहाव के बावजूद एक मरीज को ट्यूब के सहारे नदी पार कराया गया, जिसका वीडियो/तस्वीर अब सामने आया है।
मरीज को अस्पताल पहुंचाने के लिए जान जोखिम में
बारिश के दिनों में बाकड़ी पैरी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद जरंडीह सहित आसपास के ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव में गंभीर स्थिति में मरीज को अस्पताल पहुंचाना भी ग्रामीणों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
सामने आई तस्वीर में मरीज को नदी पार कराने के लिए ट्यूब का सहारा लिया गया। तेज बहाव के बीच इस तरह नदी पार करना किसी बड़े हादसे को न्योता देने से कम नहीं है।
नदी पहले भी ले चुकी है जान
ग्रामीणों के मुताबिक, इस नदी को पार करने के दौरान अब तक दो ग्रामीण और एक छात्र की जान जा चुकी है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बारिश के मौसम में हर साल यही समस्या सामने आती है और नदी पार करना ग्रामीणों की मजबूरी बन जाता है, तो आखिर अब तक सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था क्यों नहीं हो सकी?
9 करोड़ रुपये स्वीकृत, फिर भी पुल का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि नदी पर पुल निर्माण के लिए करीब 9 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हो चुकी है। इसके बावजूद पुल निर्माण की स्थिति क्या है और काम कब शुरू होगा, यह सवाल अब जिम्मेदार विभाग और प्रशासन से पूछा जा रहा है।
राशि स्वीकृत होने के बाद भी अगर पुल जमीन पर नजर नहीं आ रहा, तो आखिर अड़चन कहां है? क्या प्रक्रिया में देरी हो रही है या निर्माण कार्य को लेकर कोई और वजह है—इसका जवाब ग्रामीण जानना चाहते हैं।
बड़ा सवाल—किस हादसे का इंतजार?
एक तरफ विकास और ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाएं पहुंचाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ जरंडीह के ग्रामीण बारिश में उफनती नदी को ट्यूब के सहारे पार करने को मजबूर हैं।
क्या प्रशासन किसी और बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
9 करोड़ की स्वीकृति के बाद भी पुल क्यों नहीं बना?
कब खत्म होगी ग्रामीणों की जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी?
ग्रामीणों की मांग है कि पुल निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और तब तक बारिश के दौरान नदी पार करने वाले लोगों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
नोट: नदी में हादसों और 9 करोड़ रुपये की स्वीकृति से संबंधित आंकड़े/दावे स्थानीय ग्रामीणों से प्राप्त जानकारी पर आधारित हैं; संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष मिलने पर खबर में शामिल किया जा सकता है।

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