
बस्तर -जिले में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के दावों के बीच स्कूलों की जर्जर हालत ने सरकारी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के 124 स्कूल अति जर्जर स्थिति में बताए जा रहे हैं। इनमें 76 प्राथमिक और 48 माध्यमिक स्कूल शामिल हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सुरक्षा के मद्देनजर अतिरिक्त कक्षों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर पढ़ाया जा रहा है।
टूटी छत, दरकती दीवारें…कब तक चलेगी बच्चों की पढ़ाई?
जर्जर स्कूल भवनों की तस्वीरें शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत बयां कर रही हैं। कहीं छत टूट चुकी है तो कहीं दीवारों में गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। कुछ जगहों पर भवन की हालत इतनी खराब है कि वहां बच्चों को बैठाकर पढ़ाना खतरे से खाली नहीं है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्कूल भवनों की हालत पहले से ही खराब है, तो नई शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले इनकी मरम्मत क्यों नहीं कराई गई?
अतिरिक्त कक्षों में पढ़ने को मजबूर बच्चे
जिले के अति जर्जर स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को तत्काल खतरे से बचाने के लिए अतिरिक्त कक्षों और अन्य सुरक्षित स्थानों पर पढ़ाने की व्यवस्था की गई है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ऐसे स्कूलों में बच्चों को नहीं पढ़ाया जा रहा है, जहां भवन की स्थिति उनके लिए खतरा बन सकती है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने जिले के सभी बीईओ और बीआरसी को निर्देश दिए हैं कि अति जर्जर भवनों में बच्चों की कक्षाएं संचालित न की जाएं और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पढ़ाया जाए।
तीन महीने बीते, फिर भी स्कूल भवनों की हालत जस की तस
नई शिक्षा सत्र शुरू हुए करीब तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन जिले के 124 स्कूलों की जर्जर स्थिति अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। शासन स्तर से हर साल स्कूलों की मरम्मत और रखरखाव के लिए राशि जारी की जाती है, ताकि बारिश और नए शिक्षा सत्र से पहले बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार किया जा सके।
इसके बावजूद जर्जर भवनों की हालत सवाल खड़े करती है कि आखिर मरम्मत के नाम पर खर्च होने वाली राशि का कितना असर जमीन पर दिखाई दे रहा है?
कहीं हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?
बारिश के मौसम में कमजोर छत और दरकती दीवारें बच्चों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं। अगर समय रहते जर्जर भवनों की मरम्मत या पुनर्निर्माण नहीं किया गया तो किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
बच्चों को सुरक्षित जगह पर पढ़ाने के निर्देश अपनी जगह हैं, लेकिन स्थायी समाधान कब होगा? 124 स्कूलों की जर्जर हालत यह सवाल पूछ रही है कि आखिर जिम्मेदार विभाग कब जागेगा और इन स्कूलों की तस्वीर कब बदलेगी?
सबसे बड़ा सवाल—अगर किसी जर्जर स्कूल भवन में हादसा हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?

🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
📍 पता: राजीव नगर, वार्ड नं. 42, बसंतपुर, राजनांदगांव, Chhattisgarh – 491441
📞 मोबाइल: 9406138940
📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
✨ पहचान — बेबाक, तेज़ और सच को जनता तक पहुँचाने वाली पत्रकारिता।


