नशे के अंधेरे से नई जिंदगी की ओर: 10 साल के मासूम के लिए ‘सहारा’ बनी राजनांदगांव पुलिस, SP अंकिता शर्मा की पहल से नशामुक्ति केंद्र पहुंचा बालक

addtext 08 20 09.33.23

राजनांदगांव -हाई स्कूल ग्राउंड में बच्चों के बीच हुई मामूली झड़प के बाद पुलिस के सामने पहुंचे एक 10 वर्षीय बालक की कहानी ने पुलिस अधिकारियों को भी भावुक कर दिया। पूछताछ में सामने आया कि कम उम्र में ही पिता को खो चुके इस मासूम की मां भी उसे छोड़कर चली गई थी। माता-पिता का साया उठने के बाद अकेलेपन और उपेक्षा के बीच बच्चा धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में चला गया।

मामला राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के संज्ञान में आया तो उन्होंने इसे महज पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा। एसपी ने बालक के भविष्य और उसके सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए उसे नशे की लत से बाहर निकालने और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

हाई स्कूल ग्राउंड की झड़प से खुली दर्दनाक कहानी

दरअसल, 9 अगस्त की शाम हाई स्कूल ग्राउंड में बच्चों के बीच विवाद हुआ था। मामला पुलिस तक पहुंचने के बाद 10 वर्षीय बालक को नियमानुसार पुलिस अभिरक्षा में लिया गया। पुलिस अधिकारियों ने जब उसके परिवार और सामाजिक परिस्थितियों की जानकारी जुटाई तो सामने आई कहानी ने सभी को झकझोर दिया।

बताया गया कि कई साल पहले एक हत्या की घटना में बालक ने अपने पिता को खो दिया था। इसके बाद उसकी मां भी उसे छोड़कर चली गई। कम उम्र में ही माता-पिता का सहारा छिन जाने के बाद बच्चा अकेला पड़ गया। देखरेख और संरक्षण के अभाव में वह नशे की गिरफ्त में चला गया।

नशे की वजह से उसके व्यवहार में भी बदलाव आने लगा और छोटी-छोटी बातों पर विवाद की स्थिति बनने लगी।

SP अंकिता शर्मा ने दिखाई संवेदनशीलता

मामले की जानकारी मिलने के बाद एसपी अंकिता शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बच्चे के साथ केवल कानूनी प्रक्रिया के नजरिए से नहीं, बल्कि एक ऐसे मासूम के रूप में व्यवहार किया जाए जिसे संरक्षण, काउंसलिंग और सही दिशा की जरूरत है।

एसपी के निर्देश पर डोंगरगढ़ थाना प्रभारी, प्रशिक्षु डीएसपी सुमन जायसवाल और पुलिस टीम ने बालक को बाल कल्याण समिति, राजनांदगांव के समक्ष पेश किया। समिति के सामने उसकी काउंसलिंग कराई गई और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की गई।

रायपुर के नशामुक्ति केंद्र में कराया दाखिला

बालक की नशे की लत छुड़ाने और उसे सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उसे रायपुर स्थित नई उम्मीद नशा मुक्ति केंद्र में दाखिल कराया गया। खास बात यह रही कि डोंगरगढ़ पुलिस की टीम स्वयं बालक को लेकर रायपुर पहुंची और उसे केंद्र में सुरक्षित रूप से सुपुर्द किया।

पुलिस की इस पहल को महज कार्रवाई नहीं, बल्कि एक बच्चे को उसके अंधेरे वर्तमान से निकालकर बेहतर भविष्य की ओर ले जाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

‘कानून’ के साथ ‘इंसानियत’ का चेहरा भी

डोंगरगढ़ पुलिस की यह पहल यह संदेश देती है कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध और विवाद पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है। परिस्थितियों से भटके बच्चों को संरक्षण देना, उनकी काउंसलिंग कराना और उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने का प्रयास भी पुलिस की संवेदनशील जिम्मेदारी का हिस्सा है।

एक झड़प से शुरू हुई यह कहानी अब उम्मीद की ओर बढ़ रही है—जहां 10 साल का यह मासूम नशे के अंधेरे से निकलकर एक नई जिंदगी की राह तलाश रहा है।

Advertisement
Advertisement

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top