रानीसागर में आपदा का रियल टाइम टेस्ट: NDMA की मॉक ड्रिल में परखी गई प्रशासन और रेस्क्यू टीमों की तैयारी

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राजनांदगांव। -अगर रानीसागर में अचानक बाढ़, नाव पलटने या किसी बड़ी प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति बन जाए तो प्रशासन कितनी तेजी से लोगों की जान बचा पाएगा? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), नई दिल्ली के मार्गदर्शन में रानीसागर क्षेत्र में व्यापक मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास में प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और राहत-बचाव दलों ने आपदा जैसी परिस्थितियों में अपने कौशल और समन्वय का प्रदर्शन किया।

मॉक ड्रिल के दौरान कृत्रिम रूप से आपदा की स्थिति तैयार की गई। सूचना मिलते ही अलग-अलग विभागों की टीमें मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। बचाव दलों ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, प्राथमिक उपचार देने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने तक की पूरी प्रक्रिया का अभ्यास किया।

सूचना से अस्पताल तक हर मिनट की हुई जांच

अभ्यास में केवल बचाव कार्य ही नहीं, बल्कि आपदा की सूचना मिलने के बाद प्रशासन की प्रतिक्रिया का समय भी परखा गया। कंट्रोल रूम से सूचना जारी होने, पुलिस और बचाव दलों के घटनास्थल तक पहुंचने, राहत कार्य शुरू करने और घायलों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तक हर चरण का परीक्षण किया गया।

इस दौरान यह भी देखा गया कि किसी वास्तविक आपदा के समय अलग-अलग विभाग आपस में कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से तालमेल बनाकर काम कर सकते हैं।

कमियां चिन्हित कर होगी सुधार की तैयारी

अधिकारियों ने बताया कि मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य किसी वास्तविक आपदा से पहले संभावित चुनौतियों को पहचानना है। ऐसे अभ्यासों से राहत-बचाव दलों की कार्यप्रणाली, उपलब्ध संसाधनों और विभागीय समन्वय में मौजूद कमियों को चिन्हित किया जाता है, ताकि वास्तविक संकट की घड़ी में बिना समय गंवाए प्रभावी कार्रवाई की जा सके।

अधिकारियों ने देखी तैयारियां

रानीसागर में आयोजित इस मॉक ड्रिल में प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस बल, स्वास्थ्य विभाग, नगर निगम और राहत-बचाव दलों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। सभी टीमों ने अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए आपदा प्रबंधन की तैयारियों का प्रदर्शन किया।

मॉक ड्रिल ने यह संदेश दिया कि किसी भी आपदा से निपटने के लिए केवल संसाधन ही नहीं, बल्कि विभागों के बीच मजबूत समन्वय, त्वरित निर्णय और प्रशिक्षित बचाव दल सबसे अहम होते हैं।

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