
बालोद -ऑपरेशन थिएटर मरीज के लिए अस्पताल का सबसे संवेदनशील और भरोसेमंद स्थान होता है। यहां मरीज अपनी जिंदगी और शरीर डॉक्टरों की विशेषज्ञता और भरोसे पर सौंपता है। ऐसे में बालोद-दुर्ग मार्ग स्थित सिवनी मोड़ के उम्मीद अस्पताल को लेकर सामने आई एक जानकारी ने मरीजों की निजता और निजी अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जा रहा है कि अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान बनाया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें ऑपरेशन टेबल पर मौजूद मरीज का चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। यदि यह तथ्य सही है, तो सवाल केवल वीडियो रिकॉर्डिंग का नहीं, बल्कि मरीज की पहचान और निजी चिकित्सा प्रक्रिया को सार्वजनिक किए जाने का भी है।
ऑपरेशन टेबल पर मरीज या कैमरे के सामने ‘कंटेंट’?
मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचता है, न कि अपनी चिकित्सा प्रक्रिया को सार्वजनिक कराने के लिए। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि ऑपरेशन के दौरान वीडियो किसने बनाया? किस उद्देश्य से बनाया गया? ऑपरेशन थिएटर में रिकॉर्डिंग की अनुमति किसने दी? और सबसे अहम—यह वीडियो सार्वजनिक रूप से वायरल कैसे हुआ?
यदि वीडियो किसी चिकित्सकीय, प्रशिक्षण या दस्तावेजी उद्देश्य से बनाया गया था, तो उसके सार्वजनिक प्रसार की अनुमति किस स्तर पर थी? क्या मरीज की स्पष्ट सहमति ली गई थी? इन सवालों का जवाब अस्पताल प्रबंधन को तथ्य और दस्तावेजों के साथ देना चाहिए।
अनुमति से रिकॉर्डिंग हुई तो वायरल किसने किया?
अस्पताल प्रबंधन की ओर से यदि यह कहा जाता है कि वीडियो किसी अधिकृत व्यक्ति ने बनाया था, तो सवाल और गंभीर हो जाता है। रिकॉर्डिंग की अनुमति और मरीज की पहचान वाले वीडियो को सार्वजनिक करने की अनुमति एक जैसी नहीं होती।
वीडियो किस डिवाइस से रिकॉर्ड हुआ, उसे किसने सुरक्षित रखा, किन लोगों तक उसकी पहुंच थी और सोशल मीडिया तक वह कैसे पहुंचा—इन तमाम बिंदुओं की जांच जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर भी सवाल
मामला सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल जिला स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी उठता है। निजी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा, चिकित्सा मानकों और मरीजों की गोपनीयता से जुड़े प्रावधानों की निगरानी किस तरह की जा रही है?
यदि वायरल वीडियो की जानकारी विभाग को है, तो क्या अस्पताल से जवाब मांगा गया? क्या मौके का निरीक्षण हुआ? क्या रिकॉर्डिंग की परिस्थितियों की जांच शुरू हुई? और यदि कोई नियम उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया क्या होगी?
स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी अब अपने आप में सवाल बनती जा रही है।
स्वास्थ्य मंत्रालय से भी जवाब की उम्मीद
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य स्तर पर भी इसकी निष्पक्ष जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। यदि किसी मरीज की पहचान उसके इलाज के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो के माध्यम से सार्वजनिक हुई है, तो यह देखना जरूरी है कि निजी अस्पतालों में मरीजों की निजता की सुरक्षा के लिए मौजूद व्यवस्था वास्तव में कितनी प्रभावी है।
नियम केवल फाइलों और कागजों तक सीमित नहीं रह सकते। उनका पालन अस्पताल के सबसे संवेदनशील हिस्से—ऑपरेशन थिएटर—में भी होना चाहिए।
प्रशासन से पांच सीधे सवाल
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को मामले की जांच में कम से कम इन सवालों के जवाब तलाशने चाहिए—
- वीडियो किसने रिकॉर्ड किया?
- ऑपरेशन थिएटर में रिकॉर्डिंग की अनुमति किसने दी?
- क्या मरीज की स्पष्ट सहमति ली गई थी?
- वीडियो अस्पताल से बाहर और सोशल मीडिया तक कैसे पहुंचा?
- यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
यदि अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत हुई, तो उसे भी सामने आकर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
मरीज की निजता से बड़ा कुछ नहीं
ऑपरेशन टेबल पर पड़ा मरीज सबसे संवेदनशील स्थिति में होता है। उसकी मजबूरी, बीमारी और चिकित्सा प्रक्रिया किसी भी सूरत में प्रचार या सार्वजनिक प्रदर्शन का माध्यम नहीं बननी चाहिए।
अब सवाल सिर्फ उम्मीद अस्पताल से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था से भी है।
क्या मरीज की निजता की सुरक्षा सिर्फ कागजों में होगी?
क्या ऑपरेशन थिएटर में वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर स्पष्ट प्रोटोकॉल लागू है?
और यदि मरीज का चेहरा दिखाता वीडियो सार्वजनिक हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी तय कब होगी?
मरीजों को इलाज के साथ भरोसा भी चाहिए—और इस भरोसे की पहली शर्त है उनकी निजता और गरिमा की सुरक्षा।

🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
📍 पता: राजीव नगर, वार्ड नं. 42, बसंतपुर, राजनांदगांव, Chhattisgarh – 491441
📞 मोबाइल: 9406138940
📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
✨ पहचान — बेबाक, तेज़ और सच को जनता तक पहुँचाने वाली पत्रकारिता।


