
शिकायतों के बाद हुआ था तबादला, फिर 15 अगस्त के मंच पर सम्मान से उठे गंभीर सवाल
बालोद -स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बालोद कलेक्टर दिव्या मिश्रा द्वारा विद्युत विभाग के अधिकारी एस.के. बंड को सम्मानित किए जाने के बाद प्रशासनिक हलकों और कर्मचारियों के बीच सवाल उठने लगे हैं। वजह यह है कि संबंधित अधिकारी का कुछ महीने पहले बालोद से रायपुर तबादला हुआ था और उनके खिलाफ शिकायतों की चर्चा भी सामने आई थी। ऐसे में तबादले के बाद जिला प्रशासन के सार्वजनिक मंच पर सम्मान दिए जाने को लेकर सम्मान के आधार और प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
15 अगस्त का समारोह शासन-प्रशासन की उपलब्धियों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित करने का महत्वपूर्ण अवसर होता है। ऐसे में किसी अधिकारी को सम्मान मिलना स्वाभाविक रूप से उनके कार्य और योगदान की प्रशासनिक स्वीकृति माना जाता है। लेकिन जब उसी अधिकारी के संबंध में पूर्व में शिकायतों और तबादले की चर्चा हो, तो सम्मान का आधार स्पष्ट किया जाना जरूरी हो जाता है।
शिकायतों के बाद तबादला, फिर सम्मान क्यों?
बताया जा रहा है कि एस.के. बंड का कुछ समय पहले बालोद से रायपुर तबादला किया गया था। अधिकारी के खिलाफ कई लोगों द्वारा शिकायतें किए जाने की बात भी सामने आई थी। हालांकि शिकायतों की प्रकृति, जांच की स्थिति और तबादले के वास्तविक प्रशासनिक कारणों को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत जानकारी सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आई है।
यही वजह है कि अब कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि यदि शिकायतों के बाद तबादला किया गया था, तो स्वतंत्रता दिवस के मंच पर सम्मान देने का आधार क्या रहा? क्या सम्मान से पहले संबंधित शिकायतों की समीक्षा की गई थी? क्या शिकायतों की जांच पूरी हो चुकी थी? और यदि शिकायतें निराधार पाई गई थीं, तो क्या इसकी जानकारी सार्वजनिक की गई?
कर्मचारियों के बीच उठ रहे कई सवाल
कार्यक्रम के दौरान और उसके बाद कर्मचारियों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा होने की बात सामने आई। कर्मचारियों का कहना है कि प्रशासनिक निर्णयों में स्पष्टता और पारदर्शिता बेहद जरूरी है। एक ओर किसी अधिकारी का तबादला होता है और दूसरी ओर कुछ समय बाद उसी अधिकारी को सार्वजनिक मंच पर सम्मानित किया जाता है, तो इन दोनों फैसलों के बीच प्रशासनिक आधार स्पष्ट होना चाहिए।
कर्मचारियों के बीच मुख्य सवाल यह भी है कि सम्मान किस उपलब्धि या कार्य के लिए दिया गया और चयन की प्रक्रिया क्या थी?
सम्मान पर सवाल, व्यक्ति पर आरोप नहीं
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अधिकारी के खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए शिकायतों को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा। सवाल मुख्य रूप से सम्मान के प्रशासनिक आधार और निर्णय की पारदर्शिता को लेकर हैं।
यदि अधिकारी को उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया है, तो प्रशासन द्वारा सम्मान का स्पष्ट आधार सार्वजनिक किया जा सकता है। वहीं यदि पूर्व में हुई शिकायतों की जांच में अधिकारी को क्लीन चिट मिल चुकी है, तो उसकी स्थिति भी स्पष्ट होने से कर्मचारियों और आम लोगों के बीच उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकता है।
अब प्रशासन के जवाब पर टिकी निगाहें
मामला अब केवल एक अधिकारी के सम्मान तक सीमित नहीं रह गया है। यह सवाल प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से भी जुड़ गया है। कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि शिकायतों के बाद तबादले और उसके बाद सम्मान—इन दोनों फैसलों के पीछे आखिर प्रशासनिक आधार क्या था?
सम्मान किसी व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि सार्वजनिक निर्णय के आधार पर सवाल है। यदि निर्णय नियमों और तथ्यों के आधार पर लिया गया है, तो प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने पर तमाम सवालों का समाधान हो सकता है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कोई स्पष्टीकरण देता है या कर्मचारियों के बीच उठ रहे सवाल यूं ही चर्चा का विषय बने रहते हैं।

🖋️ शशिकांत “सनसनी” देवांगन (शशि कुमार देवांगन)
👨👦 पिता: स्वर्गीय गिरधारी प्रसाद देवांगन
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📰 वर्ष 2010 से पत्रकारिता जगत में सक्रिय शशिकांत “सनसनी” देवांगन ने अपनी पहचान निर्भीक, निष्पक्ष और जनहित की पत्रकारिता से बनाई है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत समय दर्शन दैनिक अख़बार से राजनांदगांव जिला ब्यूरो चीफ के रूप में की। वर्ष 2012 में राजनांदगांव पत्रिका दैनिक से जुड़ने के बाद उन्हें “शशिकांत सनसनी” नाम से विशेष पहचान मिली।
🎙️ प्रिंट मीडिया के साथ-साथ उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में Swaraj Express, Lalluram.com, Anadi News, Sudarshan News, वंदे भारत न्यूज़ तथा AB News में स्पेशल रिपोर्टर और स्टेट हेड, Chhattisgarh के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभाईं।
📺 वर्तमान में वे “सनसनी टाइम्स” YouTube चैनल एवं 🌐 SansaniTimes.in पोर्टल के संपादक के रूप में सक्रिय हैं।
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