पुलिस विभाग के विवेचना अधिकारी संविधान के नौकर और नियमों रूल के परिपालन के लिए है या अफसरों के आदेश का पालन करने के लिये बाध्य ?

addtext 08 02 11.50.41

थाना बसंतपुर, जिला राजनांदगांव के अंतर्गत ग्राम मोहड़ में 30 जुलाई 2026 की रात्रि लगभग 10:30 बजे घटित एक कथित घटना को लेकर पीड़ित परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवार के अनुसार, भूपेन्द्र साहू एवं उनकी माता द्वारा घर में घुसकर जातिसूचक शब्दों का प्रयोग, मां-बहन की गाली-गलौज, लोहे एवं स्टील की रॉड तथा डंडे से जान से मारने की धमकी दी गई तथा घर में रखे सामान को नुकसान पहुंचाया गया।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना की तत्काल सूचना थाना बसंतपुर प्रभारी को फोन पर दी गई और उसी रात लगभग 12:00 बजे लिखित आवेदन भी प्रस्तुत किया गया। आवेदन के साथ वीडियो, फोटोग्राफ तथा सीडी के रूप में साक्ष्य भी उपलब्ध कराए गए। परिवार का कहना है कि जाति संबंधी दस्तावेजों की जानकारी भी पुलिस को दी गई थी तथा कूलर, स्कूटी, चार्जर एवं अन्य सामान को हुए नुकसान की जानकारी भी दी गई।
पीड़ित परिवार के अनुसार, उनकी शिकायत के आधार पर थाना बसंतपुर में अपराध क्रमांक 357/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 351(2), 333 एवं 3(5) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया। हालांकि उनका आरोप है कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं को शामिल नहीं किया गया और इससे अपराध की गंभीरता कम करने तथा आरोपियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास हुआ।
परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि मामले में ‘पुरानी रंजिश’ का उल्लेख कर घटनाक्रम को भिन्न रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे अपराध की प्रकृति और गंभीरता प्रभावित हुई। उनका कहना है कि यदि जातिसूचक अपमान और धमकी के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित विशेष कानून की धाराओं के अनुप्रयोग पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
पुलिस के अनुसार, प्रकरण की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई और पुलिस अधीक्षक राजनांदगांव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक तथा नगर पुलिस अधीक्षक के मार्गदर्शन में मामला पंजीकृत किया गया है जो कि पुलिस विभाग के ऊपर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है ?
इस प्रकरण को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं भारतीय किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने जिला कलेक्टर एवं पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं विधिसम्मत जांच कराई जाए, सभी उपलब्ध साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच हो तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही या पक्षपात पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि कानून का समान एवं निष्पक्ष अनुपालन ही आम नागरिकों का संविधान, शासन और प्रशासन पर विश्वास बनाए रखने का आधार है।
जारीकर्ता:****शिवशंकर सिंहराष्ट्रीय अध्यक्ष, भारतीय किसान मोर्चा ,राष्ट्रीय उपाध्यक्ष फॉरवर्ड डेमोक्रेटिक लेबर पार्टी

Advertisement
Advertisement

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top