किसानों के हितों की अनदेखी और कथित प्रशासनिक लापरवाही का आरोप; लोक सेवा आयोग से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

addtext 07 16 12.12.31

नकली खाद-बीज मामले में भारतीय किसान मोर्चा का बड़ा कदम, मुख्य सचिव समेत कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कृषि मंत्री के खिलाफ शिकायत की पहल

रायपुर _ छत्तीसगढ़ में नकली खाद, बीज, उर्वरक, कीटनाशक और जैव-उत्तेजकों (बायोस्टिमुलेंट्स) के कथित अवैध कारोबार तथा किसानों की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने के आरोपों के बीच भारतीय किसान मोर्चा ने बड़ा कदम उठाया है। संगठन ने मुख्य सचिव, कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों एवं कृषि मंत्री के विरुद्ध छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग में शिकायत दर्ज कराने की पहल की है।
रायपुर प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में भारतीय किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने कहा कि संगठन पिछले लगभग दो वर्षों से कृषि विभाग, कृषि संचालनालय और राज्य शासन को लगातार शिकायतें, ज्ञापन, राजपत्र की प्रतियां तथा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त दस्तावेज सौंपता रहा है। उनका आरोप है कि इन शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण अब उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायत की जा रही है।
संगठन के अनुसार शिकायत में मुख्य सचिव विकास शील, पूर्व कृषि सचिव एवं आयुक्त शहला निगार, वर्तमान कृषि सचिव एवं आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी, संचालक कृषि राहुल देव तथा कृषि मंत्री रामविचार नेताम के खिलाफ कथित प्रशासनिक लापरवाही, शिकायतों के निराकरण में उदासीनता और कृषि संबंधी नियमों के पालन में कमी के आरोप लगाए गए हैं।
भारतीय किसान मोर्चा का दावा है कि मार्च 2025 में भारत सरकार द्वारा उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ) में संशोधन किए जाने के बावजूद जैव-उत्तेजकों के पंजीकरण, गुणवत्ता नियंत्रण और बिक्री की प्रभावी निगरानी नहीं की गई। संगठन का आरोप है कि संशोधित नियमों की जानकारी समय पर उत्पादकों, वितरकों और विक्रेताओं तक नहीं पहुंचाई गई, जिससे किसानों में भ्रम की स्थिति बनी रही।
प्रेसवार्ता में मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में बिक्री किए जा रहे “काला हीरा (ह्यूमिक एसिड)” उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर पूर्व में की गई शिकायतों का भी उल्लेख किया गया। संगठन का कहना है कि लिखित शिकायतों के बावजूद संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई।
भारतीय किसान मोर्चा ने यह भी दावा किया कि आरटीआई के माध्यम से प्राप्त करीब 40 पृष्ठों के दस्तावेजों के अध्ययन में कई प्रक्रियागत और प्रशासनिक विसंगतियां सामने आई हैं। संगठन के अनुसार कृषि संचालनालय द्वारा जारी कुछ पत्रों में तथ्यात्मक और प्रक्रियागत त्रुटियां दिखाई देती हैं, जिन पर शासन से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
संगठन ने बताया कि खरीफ सीजन 2026 से पहले भी नकली खाद-बीज, उर्वरकों की कालाबाजारी और अवैध भंडारण के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की मांग की गई थी। साथ ही जून 2026 में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का प्रस्ताव भी दिया गया था, जिस पर कोई निर्णय नहीं लिया गया।
भारतीय किसान मोर्चा ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि जांच में नियमों के उल्लंघन या प्रशासनिक लापरवाही की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाए। संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, अधिकारी, कंपनी या संस्था को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाना नहीं, बल्कि किसानों के हितों की रक्षा, कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित कराना है।
नोट: यह खबर भारतीय किसान मोर्चा द्वारा प्रेसवार्ता में लगाए गए आरोपों और दावों पर आधारित है। संबंधित अधिकारियों या विभाग की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

Advertisement
Advertisement

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top