नकली खाद-बीज और जैव-उत्तेजकों के कथित अवैध कारोबार पर भारतीय किसान मोर्चा का हल्ला बोल, मंत्रालय घेराव के बाद निष्पक्ष जांच की मांग, रायपुर प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता लेकर किया खुलासा

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रायपुर _ 14 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में नकली खाद, बीज, उर्वरक, कीटनाशक एवं जैव-उत्तेजकों (बायोस्टिमुलेंट्स) के कथित अवैध कारोबार, विभागीय उदासीनता और किसानों के हितों की अनदेखी के आरोपों को लेकर भारतीय किसान मोर्चा ने राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने 10 जुलाई को रायपुर स्थित मंत्रालय एवं सचिवालय का लोकतांत्रिक घेराव कर कृषि विभाग और शासन का ध्यान किसानों से जुड़े गंभीर मुद्दों की ओर आकर्षित करने का दावा किया। वही रायपुर प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता कर जानकारी दी
भारतीय किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवशंकर सिंह ने प्रेस वार्ता लेते कहा कि पिछले लगभग दो वर्षों से संगठन द्वारा कृषि विभाग, कृषि संचालनालय और शासन को लगातार शिकायतें, ज्ञापन, राजपत्र की प्रतियां और आरटीआई के तहत प्राप्त दस्तावेज सौंपे जाते रहे हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
राजपत्र के प्रावधानों के पालन पर उठाए सवाल
संगठन का आरोप है कि भारत सरकार द्वारा मार्च 2025 में जारी उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ) के संशोधित प्रावधानों के बाद भी जैव-उत्तेजकों के पंजीकरण और बिक्री को लेकर राज्य स्तर पर पर्याप्त निगरानी नहीं की गई। किसान मोर्चा का दावा है कि कई ऐसे उत्पाद बाजार में बिकते रहे जिनकी वैधानिक स्थिति को लेकर सवाल बने हुए थे।
संगठन ने आरोप लगाया कि कृषि विभाग द्वारा संशोधित नियमों और राजपत्रीय प्रावधानों की जानकारी समय पर उत्पादकों, वितरकों और विक्रेताओं तक नहीं पहुंचाई गई, जिससे किसानों में भ्रम की स्थिति बनी रही।
“काला हीरा” उत्पाद को लेकर भी शिकायत
भारतीय किसान मोर्चा ने मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में बिक रहे “काला हीरा (ह्यूमिक एसिड)” नामक उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि उत्पाद की गुणवत्ता संदिग्ध प्रतीत होने पर कृषि विभाग के अधिकारियों को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन मामले में संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई।
संगठन के मुताबिक, विभागीय पत्राचार और उपलब्ध दस्तावेजों के अध्ययन से कई प्रशासनिक एवं प्रक्रियागत प्रश्न सामने आए हैं, जिनकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
आरटीआई से मिले दस्तावेजों में विसंगतियों का दावा
किसान मोर्चा ने बताया कि शिकायतों पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने के बाद सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी गई। फरवरी 2026 में प्राप्त लगभग 40 पृष्ठों के दस्तावेजों के अध्ययन के बाद कई प्रक्रियागत विसंगतियां सामने आने का दावा किया गया है।
संगठन का आरोप है कि कृषि संचालनालय द्वारा जारी कुछ पत्रों में तथ्यात्मक और प्रक्रियागत त्रुटियां दिखाई देती हैं, जिन पर शासन से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
खरीफ सीजन से पहले भी उठाई थी कार्रवाई की मांग
संगठन के अनुसार मार्च 2026 में भी शासन को आवेदन देकर नकली खाद-बीज, कालाबाजारी, अवैध भंडारण और किसानों को प्रभावित करने वाले कृषि आदानों के खिलाफ व्यापक जांच की मांग की गई थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
किसान मोर्चा का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो खरीफ सीजन में किसानों को कई समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता।
संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का प्रस्ताव भी नहीं माना गया
भारतीय किसान मोर्चा ने दावा किया कि जून 2026 में कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने का प्रस्ताव दिया गया था, ताकि किसानों और जनता के सामने दोनों पक्षों की बात रखी जा सके। संगठन का आरोप है कि इस प्रस्ताव पर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया।
मुख्य सचिव, कृषि सचिव और कृषि मंत्री के खिलाफ लोक आयोग में प्रकरण दर्ज कराने की तैयारी
संगठन ने कहा है कि उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर मुख्य सचिव, वर्तमान एवं पूर्व कृषि सचिव, कृषि संचालक तथा कृषि मंत्री के खिलाफ कथित लापरवाही और अनियमितताओं को लेकर लोक आयोग में प्रकरण दर्ज कराया जा रहा है।
निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग
भारतीय किसान मोर्चा ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, अधिकारी, कंपनी या संस्था को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि किसानों के हितों की रक्षा, कृषि व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्तायुक्त कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों के उल्लंघन या लापरवाही की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की जाए।
(नोट: यह समाचार भारतीय किसान मोर्चा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और उसमें किए गए दावों पर आधारित है। संबंधित आरोपों पर शासन अथवा कृषि विभाग का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।)

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