राजनांदगांव में बढ़ते अपराधों पर उठे सवाल: पुलिसिंग, साइबर सेल और लंबित मामलों को लेकर गंभीर आरोप

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राजनांदगांव जिले में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं के बीच पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विभिन्न मामलों का हवाला देते हुए यह आरोप लगाया जा रहा है कि आधुनिक संसाधनों और तकनीक से लैस होने के बावजूद अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। साथ ही, साइबर अपराध, गुमशुदगी और लंबित प्रकरणों के निराकरण को लेकर भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
आरोपों के अनुसार जिले में महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े मामलों में अपेक्षित गति से कार्रवाई नहीं हो रही है। कुछ मामलों में प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई में ढिलाई बरतने के भी आरोप लगाए गए हैं। वहीं, वर्ष 2023 से लापता एक बच्ची का अब तक पता नहीं चलने का मामला भी चर्चा में है।
इसके अलावा, एक ही थाना क्षेत्र में दर्ज दो अलग-अलग मर्ग मामलों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि एक मामले में बिना पर्याप्त साक्ष्य के त्वरित गिरफ्तारी की गई, जबकि दूसरे मामले में पर्याप्त साक्ष्य होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
साइबर सेल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
आलोचना में यह भी कहा गया है कि शहर और जिले में बड़ी संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगे होने तथा पुलिस को आधुनिक तकनीक से प्रशिक्षित किए जाने के बावजूद अपराधियों तक पहुंचने और साइबर ठगी पर अंकुश लगाने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है। आए दिन साइबर ठगी के मामले सामने आने से लोगों में चिंता बढ़ रही है।
बैठकों के बावजूद धरातल पर असर नहीं?
जिले में समय-समय पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा अपराध नियंत्रण को लेकर समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं, लेकिन आरोप है कि इन बैठकों के निर्णयों का जमीनी स्तर पर अपेक्षित प्रभाव दिखाई नहीं देता। इस कारण अपराध नियंत्रण और लंबित मामलों के निराकरण को लेकर सवाल लगातार उठ रहे हैं।
मानसून सत्र में गूंज सकता है मुद्दा
13 जुलाई से प्रस्तावित विधानसभा के मानसून सत्र के मद्देनजर माना जा रहा है कि विपक्ष जिले की कानून-व्यवस्था और बढ़ते अपराधों का मुद्दा सदन में उठा सकता है। विशेष रूप से इसलिए भी क्योंकि राजनांदगांव विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह करते हैं।

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