पुरुष को बना दिया ‘महतारी’! एक साल तक खाते में आती रही योजना की राशि, ई-केवाईसी में खुली बड़ी लापरवाही

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हितग्राही और पति दोनों के नाम एक ही व्यक्ति, फिर भी मिलती रही योजना की राशि; वसूली शुरू, जिम्मेदारों पर कार्रवाई का इंतजार

खैरागढ़। छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना के क्रियान्वयन में बड़ी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई है। खैरागढ़-छुईखदान-गंडई (केसीजी) जिले में एक पुरुष का आवेदन महिला हितग्राही के रूप में स्वीकृत कर दिया गया। इतना ही नहीं, आवेदन में हितग्राही और पति दोनों के स्थान पर एक ही व्यक्ति ‘तिलोक साहू’ का नाम दर्ज होने के बावजूद आवेदन का सत्यापन कर दिया गया और करीब एक वर्ष तक उसके खाते में योजना की राशि भी पहुंचती रही।

यह मामला ई-केवाईसी प्रक्रिया के दौरान सामने आने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग अब राशि की रिकवरी में जुटा है, लेकिन सत्यापन में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार कर्मचारियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं।


क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, मुढ़ीपार निवासी तिलोक साहू का आवेदन महतारी वंदन योजना के तहत महिला हितग्राही के रूप में स्वीकार कर लिया गया। आवेदन में महिला हितग्राही का नाम भी तिलोक साहू और पति का नाम भी तिलोक साहू ही दर्ज था।

इसके बावजूद आवेदन ऑनलाइन प्रक्रिया पार करते हुए संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सुपरवाइजर के स्तर पर सत्यापित हो गया। इसके बाद मार्च से दिसंबर 2024 तक योजना की किस्तें लगातार उसके बैंक खाते में जमा होती रहीं।


ई-केवाईसी में खुली पोल

जब जिले में महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों की ई-केवाईसी कराई जा रही थी, तब यह मामला सामने आया। इसके बाद विभाग ने रिकॉर्ड की जांच की तो पूरी गड़बड़ी उजागर हो गई।

खैरागढ़ परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव के अनुसार, संबंधित हितग्राही से राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब तक करीब 10 हजार रुपये की रिकवरी की जा चुकी है, जबकि शेष राशि वापस लेने की कार्रवाई जारी है।


‘ट्रायल’ के लिए भरा था आवेदन

तिलोक साहू का कहना है कि वह मूल रूप से बलदेवपुर का निवासी है और पिछले लगभग दस वर्षों से अपने मामा के घर मुढ़ीपार में रहकर कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) का संचालन कर रहा था।

उसके अनुसार, जब महतारी वंदन योजना का पोर्टल शुरू हुआ, तब आवेदन प्रक्रिया समझने और परीक्षण (ट्रायल) के उद्देश्य से उसने अपने नाम से आवेदन भर दिया। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से आवेदन स्वीकृत हो गया और लगातार उसके खाते में राशि आती रही। उसका दावा है कि उसे 10 किस्तों की राशि मिली थी, जिसे उसने वापस कर दिया है।


दो स्तर की जांच के बावजूद कैसे हुई इतनी बड़ी गलती?

ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार आवेदन पब्लिक श्रेणी से भरा गया था। इसके बाद संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र और सुपरवाइजर ने दस्तावेजों का सत्यापन कर आवेदन को मंजूरी भी दे दी।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब आवेदन में हितग्राही और पति दोनों के नाम एक ही पुरुष के दर्ज थे, तब भी यह विसंगति किसी अधिकारी या कर्मचारी की नजर में क्यों नहीं आई?


जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं

मामला सामने आने के बावजूद अब तक सत्यापन प्रक्रिया में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर या संबंधित सीएससी संचालक के खिलाफ किसी प्रकार की विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है।

विभाग फिलहाल केवल राशि की रिकवरी पर ध्यान दे रहा है, जबकि लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय नहीं होने से पूरे मामले पर सवाल उठ रहे हैं।


सीएससी सेंटर भी मिला बंद

मामला सामने आने के बाद तिलोक साहू का सीएससी सेंटर बंद मिला। विभागीय अधिकारियों ने उससे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। वहीं जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी से भी संपर्क का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो पाया।


जिले में एक लाख से अधिक हितग्राही

केसीजी जिले में महतारी वंदन योजना के कुल 1,10,439 हितग्राही हैं। इनमें से 1,06,818 हितग्राहियों की ई-केवाईसी पूरी हो चुकी है। इसी सत्यापन अभियान के दौरान यह मामला सामने आया।


उठ रहे हैं बड़े सवाल

  • एक पुरुष का आवेदन महिला हितग्राही के रूप में कैसे स्वीकृत हो गया?
  • हितग्राही और पति दोनों के नाम एक ही व्यक्ति होने के बावजूद सत्यापन कैसे हो गया?
  • करीब एक वर्ष तक योजना की राशि जारी रहने के दौरान विभागीय निगरानी क्यों नहीं हुई?
  • सत्यापन में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
  • क्या जिले में ऐसे और भी मामले हो सकते हैं जिनकी अभी जांच बाकी है?

Sansani Times Analysis

यह मामला केवल एक व्यक्ति द्वारा गलत तरीके से योजना का लाभ लेने का नहीं, बल्कि सरकारी सत्यापन व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है। यदि आवेदन में इतनी स्पष्ट त्रुटि होने के बावजूद वह कई स्तरों की जांच पार कर सकता है और महीनों तक सरकारी राशि जारी रहती है, तो यह पूरी मॉनिटरिंग प्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि विभाग केवल रिकवरी तक सीमित रहता है या लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी जवाबदेही तय करता है।

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