जल जीवन मिशन या ‘खलको’ का कमीशन?

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शशिकांत सनसनी की रिपोर्ट

खैरागढ़ की जनता प्यासी, साहब की फाइलो को अलमारी में फांसी!
​क्या प्रधानमंत्री की ‘ड्रीम योजना’ को ग्रहण लगाने का ठेका कार्यपालन अभियंता प्रदीप खलको ने ले रखा है? खैरागढ़ लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) में इन दिनों विकास की गंगा नहीं, बल्कि लापरवाही की कीचड़ बह रही है!
बड़ा सवाल: आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहे हैं खलको साहब?
​एक तरफ केंद्र और राज्य सरकार हर घर तक नल से जल पहुंचाने के लिए दिन-रात एक कर रही है, वहीं दूसरी तरफ प्रदीप खलको की ‘अड़ंगा नीति’ ने जल जीवन मिशन का गला घोंट दिया है।
कार्यों पर लगा ‘खलको’ ब्रेक:
​भुगतान पर कुंडली: ठेकेदारों का रनिंग पेमेंट रोककर विकास की रफ़्तार शून्य कर दी गई है।
​डिजिटल भ्रष्टाचार या लापरवाही?: विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो ठेकेदारों के कार्यों का ऑनलाइन डिमांड तक पोर्टल पर नहीं चढ़ाया जा रहा है। जब डिमांड ही नहीं, तो भुगतान कैसा?
​मजदूरों का चूल्हा ठंडा: भुगतान न होने से ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है, जिससे गांवों में पाइपलाइन अधूरी पड़ी है।
सीधे सरकार के खिलाफ बगावत?
जब सरकार का लक्ष्य ‘हर घर जल’ है, तो ये अधिकारी सरकार की नीतियों के विपरीत जाकर ‘हर घर प्यासा’ पर क्यों काम कर रहे हैं? क्या यह अधिकारी सरकार की छवि खराब करने की किसी गहरी साजिश का हिस्सा है?
​खैरागढ़ की जनता पूछती है— साहब! ये कुर्सी जनता की सेवा के लिए है या फाइलों को दबाकर ‘सिस्टम’ को फेल करने के लिए? अगर यही हाल रहा, तो प्रधानमंत्री की ड्रीम योजना खैरागढ़ में सिर्फ कागजों पर ही दम तोड़ देगी।
जागो प्रशासन जागो! खैरागढ़ को ‘खलको स्टाइल’ कार्यप्रणाली से मुक्ति दिलाओ!

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