घास भूमि पर अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर: ग्रामीणों के विरोध के बाद प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, अब जिम्मेदारों की भूमिका पर उठे सवाल

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By Sansani Times डेस्क | शशिकांत देवांगन | स्थान: पटेवा, राजनांदगांव


पटेवा में सरकारी घास भूमि से हटाया गया अतिक्रमण, तहसीलदार की मौजूदगी में चली जेसीबी

राजनांदगांव जिले के जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत पटेवा में सरकारी घास भूमि पर किए जा रहे कथित अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए निर्माणाधीन मकान को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई घुमका तहसीलदार की मौजूदगी में राजस्व अमले द्वारा की गई। मौके पर पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौजूद रहे।

प्रशासन की यह कार्रवाई ग्रामीणों की लगातार शिकायतों और विरोध के बाद हुई। हालांकि पूरे मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पंचायत की भूमिका को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।


क्या है पूरा मामला?

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत पटेवा की सरकारी घास भूमि पर कुछ लोगों द्वारा मकान निर्माण कराया जा रहा था। ग्रामीणों ने इसे सरकारी भूमि पर अतिक्रमण बताते हुए तहसील, एसडीएम, कलेक्टर, विधायक, सांसद और मुख्यमंत्री तक शिकायत की, लेकिन लंबे समय तक निर्माण कार्य जारी रहा।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद न तो निर्माण रोका गया और न ही समय रहते कोई कार्रवाई हुई। जब गांव में विरोध तेज हुआ, तब पंचायत ने प्रशासन को जानकारी दी कि निर्माण गौठान की भूमि पर नहीं बल्कि घास भूमि पर किया जा रहा है। इसके बाद एसडीएम के निर्देश पर राजस्व विभाग ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की।


कार्रवाई से पहले हटाया गया अधिकांश निर्माण?

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन के मौके पर पहुंचने से पहले ही सरपंच द्वारा जेसीबी और मजदूर लगाकर अधिकांश निर्माण हटा दिया गया था। उनका कहना है कि पहले चार स्थानों पर निर्माण कार्य चल रहा था, लेकिन कार्रवाई के समय केवल एक-दो निर्माण ही मौके पर बचे थे।

ग्रामीणों का यह भी दावा है कि लगभग एक सप्ताह पहले पटवारी द्वारा तैयार पंचनामे में तीन निर्माणाधीन मकानों और एक नींव खुदाई का उल्लेख किया गया था।


तहसीलदार की मौजूदगी में चली जेसीबी

एसडीएम के निर्देश के बाद घुमका तहसीलदार अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे। राजस्व अमले ने जेसीबी की मदद से शेष निर्माणाधीन मकान को हटाया। कार्रवाई के दौरान पुलिस बल भी मौजूद रहा और पूरे घटनाक्रम की निगरानी की गई।


सरपंच का पक्ष

सरपंच एवं सरपंच पति ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद सरकारी घास भूमि पर हो रहे निर्माण को हटाया गया। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति का मकान हटाया गया, वह अत्यंत गरीब परिवार से है और उसका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में स्वीकृत है। परिवार के पास स्वयं की जमीन नहीं है।

उन्होंने कहा कि पंचायत शासन के नियमों के अनुरूप संबंधित परिवार को वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने का प्रयास करेगी, ताकि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उसका आवास बनाया जा सके।


कार्रवाई के बाद उठे कई अहम सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं—

  • यदि निर्माण सरकारी घास भूमि पर हो रहा था तो शुरुआत में ही उसे क्यों नहीं रोका गया?
  • शिकायतों के बावजूद प्रशासन और पंचायत लंबे समय तक निष्क्रिय क्यों रहे?
  • गरीब परिवार को वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराए बिना निर्माण की स्थिति क्यों बनने दी गई?
  • निर्माण ध्वस्त होने से हुए आर्थिक नुकसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
  • क्या इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी?

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और पंचायत समय रहते हस्तक्षेप करते तो न सरकारी भूमि पर निर्माण होता और न ही गरीब परिवार को नुकसान उठाना पड़ता। ग्रामीण अब जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और प्रभावित परिवार के पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।


आगे क्या?

ग्रामीणों का दावा है कि राजनांदगांव जिले में यह संभवतः पहला मामला है, जिसमें ग्राम पंचायत की घास भूमि पर हुए अतिक्रमण को ग्रामीणों के विरोध के बाद बुलडोजर चलाकर हटाया गया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित रहेगा या फिर इस पूरे मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार लोगों पर भी कार्रवाई होगी। साथ ही, प्रभावित गरीब परिवार को वैकल्पिक भूमि और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ कब तक मिलेगा, यह भी बड़ा सवाल बना हुआ है.

(नोट: इस समाचार में ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोप और संबंधित पक्ष का पक्ष दोनों शामिल किए गए हैं। प्रशासन की ओर से यदि इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया जाता है, तो समाचार को अपडेट किया जाएगा।)

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